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राजनीति के माहिर खिलाड़ी पर फिर मंडराया विवादों का साया

राजकुमार सोनी | Updated on: 16 July 2016, 13:40 IST

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को राजनीति का चतुर खिलाड़ी माना जाता है, लेकिन विवादों का साया इस धुंरधर खिलाड़ी का पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा है.

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नाम की एक नई पार्टी बनाकर सबको भौंचक कर देने वाले जोगी पर हाल के दिनों में उनके कट्टर समर्थक शिव डहरिया ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि जैसे 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की हत्या एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा थीं, ठीक वैसे ही उनकी मां की हत्या भी एक राजनीतिक साजिश हो सकती है.

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दरअसल इसी साल 11 जून को कुछ अज्ञात लोगों ने डहरिया की मां की हत्या कर उनके पिता को घायल कर दिया था.

लगभग एक माह की खामोशी के बाद डहरिया ने कहा है कि जोगी ने जब नई पार्टी बनाई तब उन पर कांग्रेस छोड़ने का दबाव था, लेकिन उन्होंने कांग्रेस में रहने का फैसला किया.

डहरिया ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा है कि यह पुराना हथकंडा उनके परिवार पर भी इसलिए आजमाया गया ताकि उन्हें कमजोर किया जा सकें.

मचा भूचाल

डहरिया के इस आरोप के बाद सूबे की राजनीति में भूचाल आ गया है. छत्तीसगढ़ में इन दिनों मानसून सत्र चल रहा है.

जोगी के खिलाफ मुखर रहे नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल ने विधानसभा में मामला उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

दोनों नेताओं का कहना है कि जब शिव डहरिया ने खुद मां की हत्या और पिता पर हमले के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया है तो पूरे मामले की जांच गंभीरता से होनी चाहिए.

एक सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने भी जोगी परिवार से अपनी जान को खतरा बताया है. कुणाल का कहना है कि वे जोगी और उनके पुत्र के खिलाफ एक बड़े मामले का खुलासा करने वाले थे, जिसकी भनक पिता-पुत्र को लग गई.

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अब उनकी जान खतरे में है. कुणाल का कहना है कि वर्ष 2002 में जब जोगी की सरकार थी, तब वे वीसी शुक्ल के समर्थक थे, लेकिन उन पर भी शुक्ल का साथ छोड़ने के लिए दबाव बनाया गया था.

जब वे नहीं माने तो जोगी के लोगों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा था. जोगी ने उनके पीछे भी शूटर लगा रखे थे लेकिन इस बीच जग्गी हत्याकांड हो गया. परिस्थितियां बदल गई और वे बच गए.

कुछ भी कर सकते हैं जोगी

वर्ष 2003 में जब वीसी शुक्ल ने कांग्रेस का दामन छोड़कर राष्ट्रवादी पार्टी का दामन थामा था तब छत्तीसगढ़ में जोगी की सरकार थी.

शुक्ल ने पार्टी के लिए फंड एकत्रित करने की जवाबदेही अपने सबसे करीबी राम अवतार जग्गी को दे रखी थीं, लेकिन चार जून 2003 की रात गोली मारकर जग्गी की हत्या कर दी गई थी.

जग्गी की हत्या को विपक्ष ने पहली राजनीतिक हत्या करार देते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी, मगर जोगी ने उनकी इस मांग को अनदेखा कर दिया था.

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जोगी के सत्ता से बाहर होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पूरा मामला सीबीआई को सौंपा. जोगी के पुत्र अमित जोगी को लगभग एक साल जेल में रहना पड़ा. जिला और हाईकोर्ट से मामला खारिज होने के बाद फिलहाल प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

अपने पिता की हत्या के पीछे गहरा षडयंत्र देखने वाले सतीश जग्गी इन दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

वे कहते हैं, जोगी और उनका परिवार स्वयं को स्थापित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. जो लोग आरोप लगा रहे हैं उनकी बातों की गहन छानबीन होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सकें.

फिलहाल सरकार ने डहरिया और कांग्रेस की सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को कहना पड़ा है कि मामला गंभीर है और जांच में तेजी लाने की जरूरत है.

इधर जोगी के पुत्र अमित जोगी का कहना है कि उन पर और उनके परिवार पर आरोप लगाना अब एक फैशन बन गया है.

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उनका परिवार पहले भी कई तरह के आरोप झेल चुका है और हर बार बेदाग होकर निकलता रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने डहरिया और कांग्रेस की सीबीआई जांच की मांग का यह कहते हुए समर्थन किया है कि राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश तो सीबीआई जांच से ही संभव हो सकता है.

जोगी का कहना है कि पूरे मामले में वे किसी का न तो हाथ देखते हैं और न ही पैर. वे सक्रिय राजनीति में हैं और विरोधियों के सामने डटे हुए हैं तो राजनीति होगी ही.

First published: 16 July 2016, 13:40 IST
 
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