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कोयला घोटाला: जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया, रंजीत सिन्हा के आदेश पर बंद की जांच

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
(एजेंसी)

कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में सीबीआई के जांचकर्ता डीएसपी संजय दुबे ने विशेष अदालत को बताया कि कोयला घोटाले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश तत्कालीन सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी नियुक्त समिति इस मामले में रंजीत सिन्हा की भूमिका की जांच कर रही है कि क्या उनके फैसलों से घोटाले की जांच प्रभावित हुई.

जांच अधिकारी दुबे ने रंजीत सिन्हा का नाम बतौर अभियोजन के गवाह के रूप में दिए अपने बयान में लिया है.

कोयला ब्लॉक आवंटन का यह मामला मध्य प्रदेश के कमल स्पंज स्टील एंड पॉवर लिमिटेड (केएसएसपीएल) तथा अन्य से जुड़ा हुआ है, जिसमें अदालत ने सीबीआई द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और मुकदमे पर आगे बढ़ाने का आदेश दिया था.

सीबीआई ने एफआईआर में आरोपियों के तौर पर केएसएसपीएल, इसके निदेशकों, पवन, कमलजीत अहलूवालिया, प्रशांत अहलूवालिया, अमित गोयल और कुछ अज्ञात लोकसेवकों का नाम दर्ज कराया था.

इन पर कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए कथित तौर पर तथ्यों को गलत तरह से पेश करने का आरोप है.

अधिकारी ने इस मामले में कोर्ट को बताया कि जांच पूरी होने के बाद उन्होंने रिपोर्ट अपने वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी थी, लेकिन उन्हें ‘सक्षम प्राधिकार’ से मामले को बंद करने का अंतिम आदेश मिला.

सीबीआई जज के यह पूछने पर कि यह ‘सक्षम प्राधिकार’ कौन है, क्लोजर रिपोर्ट दायर करने का आदेश किसने दिया था.'

इस सवाल का जांच अधिकारी डीएसपी संजय दुबे ने जवाब दिया, ‘रंजीत सिन्हा, तत्कालीन सीबीआई निदेशक.’

सीबीआई के निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सिन्हा के आधिकारिक आवास पर कोयला ब्लॉक आवंटन के कुछ आरोपियों से कथित मुलाकात से उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठन किया है.

सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक एमएल शर्मा के नेतृत्व वाली यह समिति सुप्रीम कोर्ट को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दे चुकी है और यह अब भी इन आरोपों में जांच कर रही है कि आरोपियों और अन्य के साथ सिन्हा की बैठकों से कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में जांच प्रभावित हुई थी.

First published: 22 May 2016, 2:13 IST
 
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