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बांदीपुर टाइगर रिज़र्व सूखे और जंगल की आग से तबाह

आकाश बिष्ट | Updated on: 23 February 2017, 8:13 IST

कर्नाटक में स्थित बांदीपुर टाइगर रिजर्व अपनी खूबसूरत प्राकृतिक सम्पदा-जंगल, झाड़ियों, वन्यजीवों के प्राकृतिक निवास के रूप में जाना जाता है. हाल के समय में यह टाइगर रिजर्व सूखे की भयंकर मार का सामना कर रहा है. वन्यजीव संरक्षणकर्ता पारिस्थितिकी के संरक्षण में अनादिकाल से रहते आए वन्यजीवों पर पड़ने वाले इसके विपरीत प्रभावों से चिन्तित हो उठे हैं.


बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान में 373 जलस्रोत हैं जिसमें से 350 से ज्यादा पूरी तरह सूख चुके हैं. और जो बचे भी हैं, उनमें भी 20 फीसदी से भी कम पानी बचा है जो किसी भी समय सूख सकता है.

 

दम तोड़ते वन्यजीव

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो सालों से या तो बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है या हुई भी है तो बहुत कम. इससे बांदीपुर की जैव-विविधता उजाड़ और बर्बाद हो गई है. नाम न छापे जाने की शर्त पर वन विभाग के एक अधिकारी ने दावा किया कि सूखे के हालात के चलते कम से कम 6 हाथी, पांच गौर (एक प्रकार के बैल) और आधा दर्जन से ज्यादा चीतल दम तोड़ चुके हैं. इस अधिकारी ने यह भी कहा कि यह जानकारी आधिकारिक नहीं हैं क्योंकि इससे वन विभाग की प्रतिष्ठा को आंच आएगी.


वन अधिकारियों को यह चिन्ता सता रही है कि गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा है. आने वाले समय में हालात और भयावह हो जाएंगे. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल 46 फीसदी बारिश कम हुई है और यह बारिश हर गुजरते दिन कम होती जा रही है और बदतर हालात बनते जा रहे हैं. अपनी कोशिशों के तहत वन विभाग के अधिकारियों ने उद्यान के भीतर स्थित जलस्रोतों को फिर भरने का प्रयास किया है. अधिकारी बोरवैल का सहारा लेने की योजना बना रहे हैं.

 

हालांकि, बांदीपुर में जलस्तर 400 फुट नीचे है. ऐसे में वन विभाग को जंगल में रहने वाले जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

 

जान पर भारी लग्ज़री


हालात को बदतर बनाने में बांदीपुर के आसपास बने लग्ज़री रिज़ार्ट्स भी कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं. इन रिज़ार्ट्स में बने स्वीमिंग पूल का पानी लगभग रोजाना ही बदला जाता है. रोजाना जमीन का पानी खींचने के कारण भी जलस्तर नीचे जा रहा है. वन विभाग से निकट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बांदीपुर के पास में ही स्थित सेराई लग्जरी रिज़ार्ट्स में सुपर डीलक्स कमरे हैं. हरेक कमरे से जुड़ा हुआ बहुत बड़ा स्नानागार है.

बांदीपुर में लगभग 18 रिज़ार्ट्स हैं. इनमें से लगभग 10 में स्वीमिंग पूल हैं. इनके लिए पानी के निरन्तर और खुल्लमखुल्ला दोहन ने संकट में और इजाफा ही किया है. भयंकर सूखे के चलते बांदीपुर के आसपास न केवल वन्य जीवों बल्कि घरेलू पशुओं की भी मौत हो चुकी है. एक स्थानीय नागरिक ने दावा किया कि सूखे के कारण 15-16 पशुधन की मौत हो चुकी है. यहां के हालात और भयावह होते जा रहे हैं और वन विभाग वन्य जीवों के लिए पानी की कमी को पूरा करने के वास्ते इस साल 16 सोलर-पम्प खुदवाने जा रहा है.

 

गर्मी की मार

 


बांदीपुर में तेज गर्मी पड़ती है. इस वजह से भी वनस्पतियां सूख जाती हैं. लेकिन पूरी गर्मी भर उद्यान के लगभग 50 फीसदी जल स्रोतों में जानवरों के लिए पर्याप्त पानी मिल जाया करता था. हालांकि दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व का मानूसन वर्ष 2015 से ही कम रहा है. इससे भी संकट बढ़ा है.


इस विपदा और संकट में और इजाफा किया है इंसान द्वारा पूरे रिजर्व क्षेत्र में लगाई जाने वाली आग से. टाइगर रिजर्व के संरक्षणकर्ता चिन्ताग्रस्त हो उठे हैं कि इससे प्राचीन समय का मौलिक जंगल और वन जीव नष्ट हो जाएंगे. एक रिपोर्ट के अनुसार वन विभाग के अथक प्रयासों के बावजूद लगभग 750 एकड़ जंगल राख में तब्दील हो चुका है उद्यान के कुछ भाग अभी भी सुलग रहे हैं.


अभी 18 फरवरी की सुबह आग बुझाने की कोशिश करते समय धुंए के कारण दम घुटने से वन विभाग के एक गार्ड की मौत हो गई तथा चार अन्य लोग बुरी तरह झुलस गए. बुरी तरह झुलसे लोगों में रेंज फॉरेस्ट अफसर गंगाधर और तीन स्थानीय
नागरिक शामिल हैं जिन्हें विभाग ने हायर किया था. सभी घायलों को अस्पताल में दाखिल किया गया है जहां उनका जले का इलाज चल रहा है.


हालांकि, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कि यह टाइगर रिजर्व जो जंगली हाथियों, टाइगर्स, गौर, चीतल, चार सीगों वाले काले हिरण आदि समेत अनेक प्रजातियों के लिए जाना जाता है, विभाग रिजर्व में आग की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ आगे आया है. उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति ज्यादा लम्बे समय तक नहीं रहने वाली है. विभाग बहुत जल्द ही कार्रवाई करेगा.

 

हर साल आग


बांदीपुर में आग लगने की घटना हर साल ही हो जाती है. अधिकारियों का मानना है कि जंगल की पत्तियों में गांव वाले ही, जिन्हें विभिन्न वन जीवों के साथ अपराधों के मामले में पकड़ा जाता है, वे बदला लेने के उद्देश्य आग लगा देते हैं. इसके अलावा यहां विशेष प्रकार का झाड़-झंखड़ है जिसमें आग तेजी से फैलती है. और यह आग कई एकड़ जंगल को अपनी चपेट में ले लेती है.


वर्तमान समय में, वन विभाग और ग्रामीण इसी आस में हैं कि बारिश जल्द आए जिससे जंगलों की आग बुझे और आग ज्यादा क्षेत्र में न फैले. ज्यादा समय तक होने वाली बारिश से सूखे जलस्रोत फिर से भर जाएंगे और सूखे के दौरान पशुओं के लिए पर्याप्त पानी मिलना सुनिश्चित हो सकेगा.


उल्लेखनीय है कि बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान मैसूर शहर से लगभग 80 किमी दूर गुंडलुपेट तालुका में है. यहां उन पेड़ों की अच्छी- खासी संख्या है जिनसे लकड़ी मिलती है-जैसे शीशम, चंदन, सागौन आदि. यहां पशु-पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं जिनके यहां प्राकृतिक निवास हैं.

 

First published: 23 February 2017, 8:12 IST
 
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