Home » इंडिया » in jim corbett hunting the tigers
 

जिम कॉर्बेट में फैल रहा बेधड़क बाघों का शिकार

निहार गोखले | Updated on: 18 March 2016, 22:57 IST
QUICK PILL
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार इस वर्ष अब तक बाघों के अवैध \r\nशिकार (कॉर्बेट में हुई हत्याओं के अलावा) की चार घटनाएं हो चुकी हैं
  • नेपाल में पिछले महीने पहले तीन बाघों की खालें बरामद की गई थीं और आशंका जताई \r\nजा रही है कि ये खालें कॉर्बेट-राजाजी के बाघों की हो सकती हैं

उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के आसपास के जंगलों में पिछले कुछ महीनों में पांच बाघों की हत्या कर दी गई. यह हालिया वर्षों में अभ्यारण्य में अवैध शिकार के सबसे बड़े मामलों में से एक है. हैरानी की बात यह है कि उत्तराखंड के वन विभाग को समय रहते आगाह कर देने के बावजूद यह अवैध शिकार हुआ है.

साल 2016 में अब तक अवैध शिकार और बाघों के अंगों की बरामदगी के मामलों की संख्या 19 तक जा पहुंची है. साल 2015 में ऐसे कुल 25 मामले दर्ज किए गए थे, जिन्हें देखते हुए यह संख्या बहुत बड़ी है.

बाघों के अवैध शिकार के ताजा मामलों का खुलासा तब हुआ, जब वन्य जीवों के लिए गठित उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने रविवार को एक शिकारी राम चंद्र को गिरफ्तार किया.

शिकारी राम चंद्र की गिरफ्तार के बाद बाघों के अवैध शिकार का खुलासा हुआ

पूछताछ के दौरान राम चंद्र ने बताया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर बाघों की खाल को बिजनौर जिले के एक गांव में दफना दिया था. बताते चलें कि उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटा हुआ है.

भारतीय वन्यजीव संस्थान ने बाघों की खालों का मिलान जंगलों में लगे ट्रैप कैमरों से मिले फोटो के साथ कर लिया है. संस्थान ने पुष्टि कर दी है कि इनमें से चार बाघ अभयारण्य में ही रहने वाले थे.

पढ़ें: ओडिशा: बाघों की गिनती पर नक्सली हमले का साया

हालांकि पांचवें बाघ के बारे में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है जिससे उसकी पहचान हो सके, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह भी कॉर्बेट नेशनल पार्क का ही होगा. (बाघों की निगरानी के लिए लगाए गए ट्रैप कैमराें में सभी बाघों के फोटो नहीं आ पाते हैं.)

दुःख की बात यह है कि उत्तराखंड वन विभाग को पहले ही चेतावनी दे दी गई थी कि वहां बाघों का शिकार किया जा सकता है. वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रोग्राम मैनेजर टीटो जोसेफ कहते हैं, "पिछले तीन से चार महीनों के दौरान हम कई मौकों पर उत्तराखंड वन विभाग को सूचना दे चुके हैं. बाघों की हत्या को रोका जा सकता था.”

आंकड़े करते हैं पुष्टि

वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा जुटाए गए आंकड़े पुष्टि करते हैं कि वर्ष 2016 में कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध शिकार किए गए (या जब्त किए गए) बाघों की संख्या 19 है. यह वर्ष 2015 में अवैध शिकार के कुल मामलों के तीन चौथाई के बराबर है. अवैध शिकार के 19 में से 9 मामले तो अकेले जनवरी में ही सामने आ गए थे.

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार इस वर्ष अब तक बाघों के अवैध शिकार (कॉर्बेट में हुई हत्याओं के अलावा) की चार घटनाएं हो चुकी हैं. यह पिछले पूरे साल में हुई ऐसी घटनाओं के आधे के बराबर है.

पढ़ें: 2015 में कई प्रजातियों को मिला जीवनदान

वन्यजीव अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब या सुराग नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ. वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि एक क्षेत्र विशेष के लिए पांच घटनाएं होना बहुत बड़ी बात है. जो भी खामियां रही होंगी, उनके लिए राज्य सरकार और एनटीसीए जिम्मेदार हैं.

नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ के एक पूर्व सदस्य कहते हैं, “कॉर्बेट देश के प्रमुख बाघ अभ्यारण्यों में से एक है. यदि कॉर्बेट जैसे प्रमुख अभ्यारण्य से भी इतने बाघों का अवैध शिकार हो सकता है तो मैं हैरान हूं कि देश के बाकी संरक्षित  अभ्यारण्यों में बाघों की सुरक्षा का क्या हाल होगा? इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए.”

चर्चाएं हैं कि और बाघों की भी हत्या हो चुकी है. सूत्रों ने बताया कि कॉर्बेट अभ्यारण्य से बाघों को फंसाने वाले 16 ट्रैप बरामद किए जा चुके हैं. तीन बाघों की खालें पिछले महीने नेपाल में बरामद की गई थीं और आशंका जताई जा रही है कि ये खालें भी कॉर्बेट-राजाजी जंगलों के बाघों की हो सकती हैं.

कॉर्बेट अभ्यारण्य से बाघों को फंसाने वाले 16 ट्रैप बरामद किए जा चुके हैं

यह सर्वविदित तथ्य है कि बाघों का अवैध शिकार एक संगठित अपराध है, जिसे संगठित गिरोह सीमा पार के गिरोहों के साथ मिलकर अंजाम देते हैं.

हालांकि जोसेफ ने अब भी उम्मीद छोड़ी नहीं है. वे कहते हैं कि हाल में हुई गिरफ्तारियों ने अवैध शिकारियों और खरीद-फरोख्त करने वालों के नए गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसे अब तोड़ा जा सकेगा. वे कहते हैं, “उम्मीद है कि इस तरह की निगरानी और सख्ती अवैध शिकार पर लगाम लगाएगी.”

बाघ संरक्षण और पैदल सिपाही


बाघ संरक्षण मुख्य रूप से पैदल सैनिकों के ऊपर निर्भर करता है. पैदल सैनिक वे फॉरेस्ट गार्ड और रेंजर्स होते हैं जो लगातार जंगलों में पेट्रोलिंग करते हैं. हालांकि कॉर्बेट में उन्हें चिढ़ा दिया गया है. पिछले साल उन्हें लगभग छह महीने तक पगार का भुगतान ही नहीं किया गया.

हाल ही में, 15 और 16 मार्च को कॉर्बेट के फॉरेस्ट इंस्पेक्टर हड़ताल पर थे. वे पदोन्नति, ओवरटाइम पगार और रिस्क अलाउंस की मांग कर रहे थे.

पढ़ें: वीडियो: मोगली की द जंगल बुक में प्रियंका, इरफान, नाना, ओमपुरी की आवाज

ताजा गिरफ्तारियां उत्तराखंड राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स फॉर वाइल्डलाइफ ने की थीं. लेकिन उत्तराखंड के पास उस तरह के विशेष बाघ सुरक्षा बल नहीं हैं, जिस तरह के बल की सिफारिश वर्ष 2009 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने की थी.

बाघों की हाल में हुई हत्याओं ने सरकार को सात साल की नींद से जगा दिया है. बाघों की खालें बरामद होने के एक दिन बाद 16 मार्च को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कॉर्बेट के लिए विशेष बाघ सुरक्षा बल गठित करने को स्वीकृति दे ही दी.

First published: 18 March 2016, 22:57 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

पिछली कहानी
अगली कहानी