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कश्मीर में पैलेट गन की जगह होगा मिर्ची बम का प्रयोग!

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 August 2016, 9:52 IST
(एजेंसी)

कश्मीर हिंसा में कई प्रदर्शनकारियों की आंख की रोशनी छीनने वाले पैलेट गन पर पाबंदी लग सकती है. पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए बनी केन्द्रीय गृह मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने इसकी जगह मिर्ची बम के इस्तेमाल को वरीयता देने की बात कही है.

जानकारों के मुताबिक पैनल पैलेट गन की जगह पावा बम का इस्तेमाल बेहतर रहेगा. पावा शेल मिर्ची के गोले हैं, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता. मिर्च आधारित यह कम घातक हथियार निशाने को अस्थाई रूप से अक्षम बना देता है और वे कुछ मिनट के लिए जड़ हो जाते हैं. 

गृह मंत्रालय का ब्लूप्रिंट तैयार

‘पावा’ का पूरा नाम ‘पेलऑर्गेनिक एसिड वैनिलिल एमिदे’ है और इसे नोनिवामिदे के नाम से भी जाना जाता है. यह एक ऑर्गेनिक यौगिक है, जो प्राकृतिक रूप से मिर्च में पाया जाता है.

समिति ने इस सप्ताह के आरंभ में राष्ट्रीय राजधानी में इन गोलों का प्रदर्शन देखा और कश्मीर घाटी में प्रदर्शन जैसी स्थिति तथा भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा बलों को छर्रे वाली बंदूकों के स्थान पर इसके प्रयोग की हामी भर दी.

छर्रे वाली पैलेट गन के प्रयोग के कारण घाटी में कई लोग घायल हो गए हैं और अंधेपन के शिकार हो गए हैं, इसके कारण भारी आलोचना हो रही है.

इस संबंध में तैयार किए गए ब्लू-प्रिंट और लखनऊ स्थित ‘वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) की प्रयोगशाला भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में ‘पावा गोलों’ का परीक्षण एक वर्ष से ज्यादा समय से चल रहा है और इसका पूर्ण विकास बिलकुल सही समय पर हुआ है, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. 

'50 हजार गोलों का उत्पादन हो'

समिति के कामकाज से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पैनल ने पैलेट बंदूकों के विकल्प के रूप में ‘पावा गोलों’ का पक्ष लिया है और सिफारिश की है कि ग्वालियर स्थित बीएसएफ के टियर स्मोक यूनिट (टीएसयू) को ‘तुरंत’ गोलों के उत्पादन का काम सौंप दिया जाए. पहली खेप में कम से कम 50,000 गोलों का उत्पादन किया जाए.

मिर्च की ताकत मापने वाले स्कोविले स्केल पर ‘पावा’ को ‘अत्यधिक से ऊपर’ की श्रेणी में रखा गया है. इसका अर्थ है कि यह मनुष्य को बुरी तरह प्रभावित और लकवाग्रस्त कर सकता है, लेकिन अस्थाई रूप से. इस यौगिक का प्रयोग भोजन सामग्री में तीखापन, फ्लेवर और मसालेदार स्वाद के लिए होता है.

ब्लूप्रिंट के अनुसार, समिति ने पाया कि ‘पावा’ को कम-घातक हथियार की श्रेणी में रखा जा सकता है. दागे जाने के बाद गोला फटता है और निशाने (प्रदर्शनकारियों) को अस्थाई रूप से सुन्न, जड़ और लकवाग्रस्त बना देता है. अच्छी बात यह है कि आंसू गैस और पेपर-स्प्रे के मुकाबले इसका प्रभाव तेजी से कम होता है.

First published: 26 August 2016, 9:52 IST
 
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