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मुस्लिमों ने किया कश्मीरी पंडित का अंतिम संस्कार

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 February 2016, 18:49 IST

कश्मीर में घाटी के मुसलमानों ने 84 साल के बुजुर्ग कश्मीरी पंडित की मृत्यु के बाद हिंदू रीति-रिवाजों से अन्त्येष्टी करके घाटी से मानवता की संदेश पूरे देश को दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह मामला दक्षिण कश्मीर के कूल्गाम शहर के पास एक गांव का है, यहां के कश्मीरी पंडित जानकी नाथ ने आतंकियों की धमकी को दरकिनार करते हुए अपना गांव छोड़ने से इंकार कर दिया था. जानकीनाथ की मृत्यु शनिवार को कूल्गाम के पास मलवा गांव में हो गई थी. जब नाथ का देहांत हुआ तो उनका कोई भी रिश्तेदार या घरवाला उनके पास नहीं था.

तब गांव के सभी मुसलमानों ने मिलकर उनके अंतिम क्रिया-कर्म की व्यवस्था की. बताया जाता है कि साल 1990 में जानकी नाथ जब सरकारी सेवा से रिटायर हुए तो घाटी में आतंकवाद चरम पर था. उनके परिवार ने दहशत में जीने से इंकार करते हुए पुश्तैनी घर को छोड़ने का फैसला किया, लेकिन नाथ ने परिवार के इस फैसले के खिलाफ जाते हुए पुरखों की जमीन को छोड़ने से मना कर दिया था.

उसके बाद साल 1990 से अपनी मृत्यु तक वो कश्मीर घाटी के अपने पुश्तैनी गांव मालवा गांव में 5000 मुस्लिम परिवारों के बीच अकेले ही रहे. पिछले पांच सालों से जानकी नाथ की तबियत लगातार खराब रही थी और उस दौरान उनके पड़ोसी मुस्लिम परिवार ने ही उनकी देखभाल की. मलवा के लोगों का कहना है कि जानकी नाथ को अपने परिवार वालों के खिलाफ घाटी में रहने के फैसले पर कोई पछवाता नहीं था.

जैसे ही आस-पड़ोस में लोगों के उनके मरने की खबर हुई. हर तरफ शोक की लहर फैल गई. उनके पड़ोसी और साथी गुल मोहम्मद अली ने इस बारे में कहा कि 'मुझे तो ऐसा लग रहा है कि कोई अपना आज नहीं रहा. नाथ मेरे लिए बड़े भाई की तरह थे और कई मसलों पर मैं उनसे सलाह लिया करता था'.

जानकी नाथ को याद करते हुए एक दूसरे पड़ोसी गुलाम हसन ने कहा कि 'आज हमने अपना एक बेहतरीन दोस्त खो दिया है, जो अच्छे और बुरे दिनों में हमारे साथ खड़ा रहा. उनके इंतकाल के बाद हमारा ये फर्ज बनता था कि हम हिंदू रीति-रिवाजों के हिसाब से उनका अंतिम संस्कार करें'.

First published: 2 February 2016, 18:49 IST
 
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