Home » इंडिया » In King Bhumibol's demise, turbulent Thailand has lost a steadying hand, 1 year mourning
 

88 की उम्र में राजा का निधन: थाइलैंड ने अपनी ताक़त खोई

विवेक काटजू | Updated on: 15 October 2016, 4:34 IST
QUICK PILL
  • थाईलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का 13 अक्टूबर को बैंकॉक में निधन हो गया. दुख की इस घड़ी में थाईलैंड में एक साल का शोक घोषित किया गया है. 
  • दुनिया में किसी देश पर सबसे ज़्यादा लंबे वक़्त तक शासन करने वाले 88 साल के भूमिबोल 70 साल तक बैंकॉक के राजा रहे. वे पिछले दस साल से बीमार थे और एकाकी जीवन जी रहे थे.

थाई राजा भूमिबोल ने वाकई एक आदर्श जिंदगी जी. वे जनता के कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित थे और उन्होंने कई सामाजिक और आर्थिक सुधारों की शुरूआत की, खासतौर पर थाईलैंड की कृषि व्यवस्था. इससे उन्हें सैन्य और राजनीति जगत सहित हर वर्ग में सम्मान मिला.

हालांकि वे एक संवैधानिक पद पर थे फिर भी उन्होंने कई मौकों पर हल्का ही सही लेकिन प्रभावी हस्तक्षेप किया ताकि देश में राजनीतिक स्थिरता बनी रहे. 

अपने शासन काल के अंतिम दशक में राजा भूमिबोल थाई समाज और राजनीति में फैलते ध्रुवीकरण से बुरी तरह से परेशान थे. उनमें अब राष्ट्र को फिर से एक करने की ताकत नहीं बची थी. और उनके किसी भी उत्तराधिकारी के लिए ऐसा आत्मविश्वास व सम्मान पाना मुश्किल है. 

बेटा, उत्तराधिकार और विवाद

इसमें कोई दो राय नहीं है कि उनके इकलौते बेटे क्राउन प्रिंस महा वजीरालॉंगकार्न ही उनके बाद राजा बनेंगे. प्रधानमंत्री जनरल प्रयुत चान-ओछा ने बताया 1972 में ही भूमिबोल का उत्तराधिकारी चुन लिया गया था. सरकार जल्द ही इसके बारे में संसद को सूचित कर देगी. 

उन्होंने क्राउन प्रिंस का नाम नहीं लिया क्योंकि कायदे से इस संबंध में औपचारिक तौर पर पहले असेंबली को बताया जाता है. केवल संसद ही स्वर्गीय राजा के चुने हुए उत्तराधिकारी पर स्वीकृति की मुहर लगा सकती है.

गुरुवार को नेशनल एसैम्बली की बैठक हुई थी लेकिन बैंकॉक से मिली खबरों के मुताबिक इसमें सिर्फ राजा भूमिबोल की मृत्यु की औपचारिक सूचना दी गई और उत्तराधिकार के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई. माना जा रहा है कि क्राउन प्रिंस के कहने पर ऐसा किया गया क्योंकि वे चाहते थे कि उत्तराधिकारी की घोषणा थोड़े समय बाद ही की जाए.

खैर, अगर कुछ गड़बड़ नहीं होती है तो प्रिंस ही अगले राजा होंगे. थाईलैंड के समाज में कई वर्गों के बीच उत्तराधिकार काफी चिंता की बात है. क्राउन प्रिंस का जीवन काफी विवादों भरा रहा है. पिछले कुछ दशकों से प्रिंस के खिलाफ कई तरह की अफवाहें और कानाफूसी सुनाई देती रही हैं. 

बेटी थी प्रिय

राजा और उनके बेटे स्वभाव से एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं लेकिन थाईलैंड के राज परिवार की मर्यादा अनुसार, इस बारे में कभी सार्वजनिक रूप से बात नहीं की गई. भूमिबोल की संतानों में से एक, प्रिंसेस महाचक्री सिरिनड्रोन अपने पिता जैसे ही चरित्र की हैं और उनकी प्रिय संतान थीं.

वे अविवाहित हैं और उन्होंने अपना जीवन अध्ययन को समर्पित कर दिया है. उन्हें संस्कृत भाषा से खासा लगाव है और जन कल्याण के काम करती हैं. वे काफी लोकप्रिय हैं.

कई बार बीच में ऐसी उड़ती-उड़ती खबरें भी आईं कि प्रिंसेस महाचक्री अपने पिता की उत्तराधिकारी हो सकती हैं. भूमिबोल ने एक प्रिंसेस को राजा बनाने के लिए थाईलैंड के उत्तराधिकार कानून में बदलाव कर दिया था. ऐसी खबरों से भूमिबोल जैसे उत्तराधिकारी की उम्मीद जगती है. अन्यथा पिछले दशक में विघटनकारी सामाजिक और राजनीतिक ताकतें देश पर हावी होती दिखी थी. राजमहल के इर्द-गिर्द रहने वाले उच्चवर्ग और सेना के लिए महत्वपूर्ण यह है कि राजा का उत्तराधिकारी निर्विवाद रूप से चुना जाए. 

अंदरुनी चुनौती

पिछले एक दशक में महल से जुड़े शाही लोगों को नए-नए अमीर हुए कुछ लोगों से चुनौती मिल रही है. इन लोगों ने डिजिटल इकॉनॉमी के जरिये शाही लोगों के इस वर्ग की पूंजी हथिया ली. राजनीति में आकर वे शक्तिशाली बन गए. थकसिन शिनवात्रा उनके नेता थे. कभी पुलिस अधिकारी रहे थकसिन आज अरबपति टेलीकॉम उद्योगपति हैं. 2001 में उन्होंने लोकप्रिय नारों के साथ उत्तर और उत्तर पूर्व के गरीबों को संगठित करके सत्ता हथिया ली थी. उसके बाद 2005 में भारी बहुमत के साथ दोबारा प्रधानमंत्री चुने गए.

तख़्तापलट

पुराने शाही लोगों ने उन पर और उसके सहयोगियों पर राजा के अपमान का आरोप लगाया और कुछ दिन बाद थाई सेना ने तख्ता पलट कर अक्टूबर 2006 में उन्हें अपदस्थ कर दिया. तख्ता पलट से शुरू हुआ राजनीतिक संकट आज तक जारी है और इसके जल्द खत्म होने की संभावना दिखाई नहीं देती. इस वजह से थाईलैंड की राजीनीति और समाज में कई तरह के विरोधाभास उजागर हुए हैं, जो अब तक राजा के प्रभावशाली व्यक्तित्व के चलते दबे हुए थे.

2006 से देश में सैन्य शासन पर सिविल सरकार का प्रभाव भी रहा जो थकसिन के समर्थकों ने चुनाव जीतने के बाद बनाई जबकि थकसिन स्वयं निर्वासित जीवन जी रहे हैं. मई 2014 में थकसिन की बहन प्रधानमंत्री यिंगलक शिनवात्रा जनरल प्रयुथ द्वारा किए गए एक तख्ता पलट में अपदस्थ कर दी गईं थीं. 

जनरल प्रयुथ के नेतृत्व में चल रही सरकार ने एक संविधान बनाया जिसे अगस्त में एक जनमत संग्रह के जरिये मंजूरी दी गई. आलोचक इसे ‘सेना द्वारा निर्देशित प्रणाली’ कहते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, इस संविधान के तहत 2017 में चुनाव करवाए जाएंगे. चुनाव हों चाहे न, सेना थकसिन और उसके समर्थकों को सत्ता से दूर ही रखेगी.

कारोबारियों की चिंता स्थिरता

देश का व्यापारी वर्ग लोकतंत्र के बजाय स्थिरता को तरजीह देगा, यही थाईलैंड के एशियाई पड़ोसी और अंतरराष्ट्रीय जगत की भी मंशा है. और इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि राजा के निधन पर घोषित एक साल के शोक के खत्म होने तक थकसिन थोड़े झुक कर चलेंगे.

खैर थाईलैंड के राजा को जनता हर हाल में याद करेगी, जिन्हें वह एक पिता समान आदर देती आई है क्योंकि उन्होंने अपने देश रूपी जहाज को गहरे पानी में भी डगमगाने नहीं दिया हालांकि वृद्ध होने पर वे लाचार हो गए थे और अब कभी संभाल नहीं पाएंगे.

First published: 15 October 2016, 4:34 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी