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केसीआर ने बदला तेलंगाना का भूगोल, 10 से 31 हुई जिलों की संख्या

ए साए शेखर | Updated on: 12 October 2016, 7:28 IST

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव उर्फ केसीआर सूबे में 21 नए जिले जोड़ कर कौन सी राजनीति कर रहे हैं? उनके इस कदम के बाद तेलंगाना में जिलों की संख्या 31 हो जाएगी.

देश के 29 राज्यों में से तेलंगाना एक मात्र ऐसा राज्य है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की परवाह किए बगैर घोषणाओं का पिटारा खोल दिया है. लोगों की मांगें मानते हुए 27 जिलों को बढ़ा कर 31 कर दिया गया है. स्थानीय नेता, खास तौर पर कांग्रेसी पिछले कई दिनों से यह मांग करते हुए आंदोलन कर रहे थे. यह संख्या अभी और भी बढ़ सकती है.

केसीआर ने 200 पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंगलवार सुबह 11 बज कर 12 मिनट पर सिड्डीपेट को जिला घेषित कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की. कार्यक्रम में 9 अन्य धार्मिक नेता भी उपस्थित रहे. केसीआर का विधानसभा क्षेत्र गजवेल सिड्डीपेट में ही आता है. अन्य जिलों में मंत्रिगण यह काम करेंगे.

राजनीतिक स्तर पर केसीआर का यह कदम काफी सोच समझ कर किया गया प्रयोग कहा जा सकता है लेकिन मुख्यमंत्री ने नियत समय सीमा के चलते प्रशासनिक अमले के सिर पर भारी भरकम बोझ लाद दिया है. सरकार का विजयादशमी यानी मंगलवार को ही नए जिले और पुलिस कमिश्नरेट खोलने का प्रस्ताव था. सरकार को अभी तो यह स्पष्ट करना होगा कि इन दस में से नौ जिलों का प्रशासनिक स्तर पर किस प्रकार वर्गीकरण किया जाएगा.

हैदराबाद को छोड़कर बाकी नौ जिलों को तीन या चार भागों में किया जाएगा. जिलों को छोटे-छोटे प्रशासनिक खंड में बांटने का कारण कभी जनसंख्या तो कभी भौगोलिक परिस्थिति होता है लेकिन फिलहाल यह मामला राजनीतिक ज्यादा लगता है. आईटी इंडस्ट्री और म्युनिसिपल प्रशासन मंत्री केटी रामाराव ने कहा, छोटी प्रशासनिक इकाइयां लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाएंगी? इसीलिए जिलों को बांटा गया है.

चूंकि केसीआर ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों में से अब तक एक भी पूरा नहीं किया है, इसलिए वे कम से कम यह एक वादा पूरा करने की जल्दबाजी में दिखाई दे रहे हैं. इससे आम आदमी को कोई खास फायदा मिलेगा या नहीं इस बारे में भरोसे के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कृष्णा सागर राव ने कहते हैं, 'सरकार के इस कदम से जनता को तो नुकसान ही होगा, बस टीआरएस को जरूर राजनीतिक लाभ मिलेगा.'

आंकड़ों में तेलंगाना

  • मौजूदा जिलों की कुल संख्या-10
  • अक्टूबर 11 से जिलों की संख्या-31
  • अधिसूचना जारी हुई मंगलवार दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर
  • प्रत्येक जिले में रहने वाले परिवारों की संख्या- 2 से 4 लाख प्रति गांव (मुख्यमंत्री केसीआर के अनुसार)
  • सिड्डीपेट जिला- मंगलवार सुबह 11.12 बजे मुख्यमंत्री द्वारा औपचारिक घोषणा
  • नए पुलिस कमिश्नरेट की संख्या- 5 (कुल मिलाकर 9)
  • सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला- 39,43,323
  • सबसे कम जनसंख्या वाला जिला- 5,43,594
  • दो-तीन जिलों में विधानसभा के खंडों का विस्तार-37

टीडीपी की आपत्ति

तेलुगुदेशम पार्टी के तेज तर्रार विधायक ए रेवन्त रेड्डी ने कहा, केद्र सरकार ने विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करने से पहले ही नए जिले बनाने पर रोक लगा दी थी. साथ ही उन्होंने कहा, जिस आधार पर राज्य सरकार जिलों को बांटने का तर्क दे रही है, वह पूर्णतः बकवास और निरर्थक है. उनका आरोप है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता भी सत्ताधारी पार्टी के साथ हो लिए हैं. उन्होंने कुछ सवाल उठाए और पांच खामियां गिनाईं:

  1. जनसंख्या के असमान वितरण (20,000 से 80,000 लोग मंडल में) का प्रभाव सीमा निर्धारण के समय विधानसभा क्षेत्रों के आरक्षण पर भी पड़ता है.
  2. जिलेवार जनसंख्या का असमान वितरण. सिरसिला की जनसंख्या 5 लाख बताई गई है तो हैदराबाद की 40 लाख. इससे भी सीमा निर्धारण प्रभावित होगा और छोटी प्रशासनिक इकाइयों की अवधारणा में कोेई सार नहीं है.
  3. संविधान की पांचवीं अनुसूची में अधिसूचित इलाकों में सौ प्रतिशत रोजगार, व्यापार और यहां रह रहे आदिवासियों को प्राकृतिक संसाधन मुहैया करवाने की गारंटी दी गई है. ये जिले संविधान के अधिनियम 1/70 के अनुरूप नहीं है, जिसमें कहा गया है कि मैदानी इलाकों के लोग इन अधिसूचित इलाकों के लोगों से लेन-देन नहीं कर सकते. इन इलाकों का मैदानी इलाकों के साथ विलय होने से निश्चित रूप से आदिवासियों के अधिकार प्रभावित होंगे. इसके लिए एक आदिवासी परामर्श समिति का गठन किया जाना चाहिए, जो कि राज्यपाल को सिफारिश करे क्योंकि इन क्षेत्रों के विलय या इन्हें अलग करने का अधिकार राज्यपाल के ही पास है.
  4. जिलों के बंटवारे से राष्ट्रपति के आदेश और संविधान के अनुच्छेद 371(डी) के अनुसार निर्धारित जोनल प्रणाली प्रभावित होगी. जिले में भर्ती के लिए जोनल और मल्टी जोनल प्रक्रिया प्रभावित होगी. इसमें कोई भी बदलाव राष्ट्रपति की अधिसूचना से ही होना चाहिए.
  5. जहां तक विधानसभा क्षेत्र निर्धारण का सवाल है, माना जाता है कि जिलों को आरक्षण को अंतिम रूप देने वाली इकाई माना जाता है. एक राजनीतिक साजिश के तहत टीआरएस सरकार ने कांग्रेस, टीडीपी और अन्य नेताओं को खुश करने के लिए जिलों का बंटवारा किया है. टीडीपी नेता रेवंत रेड्डी ने कहा, 'टीडीपी मुख्य चुनाव आयुक्त व गृह मंत्रालय तथा कानून मंत्रालय से इस बारे में शिकायत करेगी कि राज्य सरकार ने कानून का उललंघन किया है. एक बार अधिसूचना जारी हो जाए, हम अदालत में शिकायत ले कर जाएंगे.'

अधिकारियों का टोटा

चूंकि अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों की कमी है. जिला प्रमुख कलेक्टरों को बनाया जाएगा, जो आईएएस कैडर के अधिकारी हैं और जॉइंट कलेक्टर उनका सहयोग करेंगे. ज्यादातर ये अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के होते हैं.

कई बार राज्य के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को जॉइंट कलेक्टर बनाया जाता है. राज्य में पहले पांच पुलिस कमिश्नरेट बनाने की ही बात थी; खम्मम्म को ऐन वक्त पर जोड़ा गया. जूनियर प्रशासनिक ग्रेड के अधिकारी को ही कमीश्नर का टैग दिया जा सकता है. ये कमिश्नर ‘नए शहरों’ को देखेंगे, जो कि सिर्फ नाम के हैं.

जिलों का प्रशासन संभालने वाले अधिकारियों की वाकई कमी है. सरकार ने चार नए पुलिस कमिश्नरेट खोलने की बात कही है. कुछ जिलों में आईएएस के अधिकारी कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं किए जाएंगे. कमिश्नरेट की संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

और, क्या राज्य सरकार जिला न्यायालय खोल सकती है या फिर मौजूदा न्यायालयों को ही जिलों के अनुसार ढालेगी?

प्रशासन

तेलंगाना में एक प्रकार का मॉड्यूलर प्रशासन है. आवश्यकता अनुसार नियमों में परिवर्तन किए जाएंगे. मुख्यमंत्री के अनुसार, कर्मचारियों को बदलते जॉब परिदृश्य के अनुसार ढलना होगा.

केसीआर ने माना है कि हर जिले में एक सा प्रशासन नहीं हो सकता हमें कपड़े को देख कर कोट काटना है. हर जिले की आवश्यकता के हिसाब से विभाग बनाए जाएंगे. हो सकता है एक जगह जिस विभाग की जरूरत हो, दूसरे में न हो और हो सकता है कुछ विभाग केवल कुछ ही जिलों में जरूरी हों. ऐसी स्थिति में सरकार ने जिलों में प्रदेश सरकार की इकाई का विलय करने, बांटने या हटाने का निर्णय किया है.

अगले बजट में 2000 करोड़

राज्य सरकार नए जिलों के लिए 2000 करोड़ रूपए जारी करने को तैयार है यानी हर नए जिले को अगले बजट में 100 करोड़ रूपए के आस पास मिलेंगे. हर जिले के लिए जीओ जारी किया जाएगा, जो इन जिलों की भौगोलिक सीमा और बाकी संबंधित जानकारियां देगा. इस प्रकार सभी 31 जिलों को जीओ दिया जाएगा. तेलंगाना के हर जिले में 64 विभाग और 36 सहायक प्रकोष्ठ हैं.

नए जिलों के शुभारंभ पर अनिवार्य उपस्थिति के कारण तेलंगाना के सभी कर्मचारियों की दशहरा की छुट्टी कैंसल कर दी गई है और उन्हें इसके बदले बाद में छुट्टी दी जाएगी. राज्य के कई प्रशासनिक इकाइयों में बंटने से नए जिलों में उसके राजस्व विभाग और मंडल कार्यालयों की भी संख्या बढ़ेगी. तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया इस तरह के जिलों के वर्गीकरण का कोई वैज्ञानिक व स्थाई आधार नहीं था.

जिलों का नाम पूजा स्थलों के नाम पर, प्रसिद्ध मंदिरों, देवी-देवताओं के नाम और साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व नेताओं के नाम पर भी जैसे यादाद्री, वेमाद्रि, जयशंकर जिला, महेंद्रनाथ जिला, कौमुराम भीम जिला रखे गए हैं. नामकरण में जगह का नाम की भौगोलिक स्थिति के अनुसार हो, जो आसानी समझ आ जाए. राजनीतिक दांव खेलकर केसीआर ने अब भी मांग हुई तो जिलों की संख्या बढ़ाने का विकल्प खुला रखा है. फिलहाल इन जिलों की संख्या 31 है.

First published: 12 October 2016, 7:28 IST
 
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