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भूख से गायों की मौत: वसुंधरा के राज में गोशाला बनी मरणशाला

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 August 2016, 14:34 IST
(एजेंसी)

राजस्थान की वसुंधरा सरकार के द्वारा संचालित गोशाला में रोजाना भूख से तड़प कर 10 से 20 गायों के मरने की खबर है. यह गोशाला जयपुर नगर निगम के द्वारा संचालित होती है.

गोशाला का नाम हिंगोनिया गोशाला है, जहां रोजाना कई गायें भूख से मर रही हैं. सरकार की इस लापरवाही पर हाई कोर्ट की जयपुर बेंच ने सख्ती दिखाई है.

हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए जयपुर नगर निगम की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए अफसरों को फौरन गोशाला का मौका मुआयना करने का आदेश दिया है. इसके बाद ही अफसरों में हड़कंप मच गया.

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि राज्य की वसुंधरा राजे सरकार ने गोरक्षा के नाम पर बाकायदा गोरक्षा मंत्रालय भी बनाया हुआ है.

सरकारी संरक्षण के बावजूद रोजाना जिस तरह भूख से गायें दम तोड़ रही हैं, वो वसुंधरा सरकार के लिए बेहद ही शर्मनाक है. 

गायों की मौत पर हाईकोर्ट में सुनवाई

गोशाला में गायों की मौत के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत में एसओजी के आईजी दिनेश एमएन और निगम आयुक्त हेमंत गेरा भी मौजूद थे.

अदालत ने आइजी को गौशाला जाकर मौका मुआयना करने का निर्देश दिया. उनसे वहां जाकर पूरे हालात का जायजा लेने को भी कहा गया.

गोशाला के निरीक्षण का आदेश

अदालत आईजी के साथ ही निगम अधिकारियों, याचिकाकर्ता के वकील पूनम चंद भंडारी और अन्य संबंधित विभागों के अफसरों को भी गोशाला का मुआयना करने का आदेश दिया.

अदालत की सख्ती के बाद एडवोकेट जनरल एनएम लोढ़ा ने भी हिंगोनिया गोशाला जाकर हालात देखने की बात कही.

उन्होंने बताया कि वे भी जाकर सारे हालात और निगम के काम को देखेंगे. नगर निगम गायों के लिए क्या व्यवस्था कर रहा है और किस स्तर पर कमियां हैं, इसका पता लगा कर पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. हाईकोर्ट और राज्य सरकार को वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा.

हिंगोनिया गोशाला की दुर्दशा

जयपुर में लगातार बारिश होने से नगर निगम गौशाला में मिट्टी डलवा रहा है, इससे वहां कीचड़ भी हो गया है. कीचड़ रहने के कारण वहां पिछले कुछ दिनों में ही करीब सौ गायों की मौत हो गई है.

गोशाला में हुआ कीचड़ बीमार और बूढी गायों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है. चारे और पानी की कमी से कमजोर हो चुकी गायों के लिए भारी बारिश झेल पाना कठिन बना हुआ है. कीचड़ को दबाने के लिए अब निगम प्रशासन वहां सूखी मिट्टी डलवा रहा है.

दो हफ्ते में 500 गायों की मौत

गोशाला में गायों की मौत पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार को निशाने पर लिया. गहलोत ने कहा, "गाय पर राजनीति करने और देश भर में छद्म गोभक्ति का झूठा माहौल बनाने वाली बीजेपी के खुद के शासित प्रदेश में गाय के साथ जो हो रहा है वह बेहद निंदनीय है."

गहलोत ने कहा, "गोमाता के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा के शासन काल में गायों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंतनीय है. सरकार की गोशाला में महज दो दिनों के भीतर 90 गाय और दो हफ्तों में 500 गायों की मौत हुई है."

हिंगोनिया गोशाला में 8 हजार गाय

जयपुर की हिंगोनिया गोशाला के रख-रखाव का जिम्मा वैसे तो जयपुर नगर निगम के पास है. हालांकि नगर निगम में भी भारतीय जनता पार्टी का ही बहुमत है. बीजेपी से आने वाले निर्मल नाहटा जयपुर शहर के मेयर हैं.

हालांकि जब कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल जयपुर की मेयर थीं, उस वक्त भी हिंगोनिया गोशाला की दुर्दशा का मुद्दा चर्चा में था. इस बीच कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है, "बीजेपी का कोई भी मंत्री संभालने वाला नहीं है. सालाना 22 करोड़ रुपये चारा का दे रहे हैं. उसके बावजूद रोजाना गायों की मौत हो रही है." 

सालाना 20 करोड़ का बजट

बताया जा रहा है कि करीब 6000 पशुओं की क्षमता वाली इस गोशाला में करीब 8 हजार गायें हैं. जबकि इसका सालाना बजट 20 करोड़ का है. गोशाला समिति के अध्यक्ष भगवत सिंह देवल का कहना है, "बरसात के कारण गोशाला में दलदल हो गया है. लगातार इसमें बैठे रहने से गायों की मौत हो गई."

देवल बताते हैं, "गौशाला की कमजोर और बीमार गाएं बारिश के मौसम को नहीं झेल पा रही हैं. इसलिए नगर निगम के संसाधन लगाकर सूखी मिट्टी डालवाई जा रही है."

इस बीच राज्य सरकार ने इस मामले में बचाव किया है. स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा, "कांग्रेस गोशाला के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रही है. गोशाला में कोई लापरवाही नहीं हुई है."

गौरतलब है कि हिंगोनिया गोशाला में पिछले दो हफ्ते से कर्मचारी हड़ताल पर हैं. गोशाला के करीब दो सौ कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे हैं. इस बीच डॉक्टरों के मुताबिक कई गायों की मौत बीमारी से जबकि कई की मौत भूख के चलते हुई है.

फटकार के बाद हिंगोनिया पहुंचे अफसर

हाईकोर्ट की तल्खी के बाद गुरुवार देर शाम को नगर निगम के आयुक्त हेमंत गेरा, मामले के जांच अधिकारी आईजी दिनेश एमएन, एडवोकेट जनरल सहित तीन एएजी हिंगोनिया गोशाला पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया.

अदालत ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट 10 अगस्त को पेश करने का आदेश दिया है. याचिकाकर्ता एडवोकेट पूनमचंद भंडारी ने बताया कि इस दल ने गोशाला का निरीक्षण किया, तो मौके पर पशुओं की देखभाल के लिए कोई कर्मचारी नहीं मिला.

यही नहीं गोशाला कमिश्नर सहित दोनों अधिकारियों के कई दिनों से अवकाश पर होने की बात सामने आयी है. इससे पहले गायों की मौत के मामले पर सुनवाई करते हुए एकल खंडपीठ के जस्टिस महेशचंद शर्मा के समक्ष जांच अधिकारी और एसओजी आईजी दिनेश एमएन पेश हुए थे. 

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "एक साथ इतनी गायों की मौत होना नगर निगम की लापरवाही को बताता है. गायों की मौतों को जब तक नहीं रोका जा सकता है, तब तक हम संवेदनशील नहीं होते हैं."

हिंगोनिया गोशाला की हालात का जायजा लेने के लिए राज्य के एडवोकेट जनरल नरपतमल लोढा, अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल, बीएन सांदू व एसके गुप्ता ने दोपहर बाद गोशाला का दौरा किया.

इस दल ने गोशाला में यह पता लगाने की कोशिश की कि नगर निगम गायों के लिए किस तरह का इंतजाम कर रहा है और इतनी संख्या में क्यों गायें मर रही हैं. रिपोर्ट तैयार करने के बाद हाईकोर्ट और राज्य सरकार को गोशाला की वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी.

First published: 5 August 2016, 14:34 IST
 
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