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राज्यसभा चुनाव: आनंद शर्मा और चिदंबरम की होगी वापसी!

आकाश बिष्ट | Updated on: 10 March 2016, 22:52 IST
QUICK PILL
  • राज्यसभा की आसाम, नागालैंड, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और पंजाब की रिक्त होने वाली 13 सीटों के लिये चुनाव 21 मार्च को होना है.
  • केरल से भी तीन सीट दो अप्रैल को रिक्त हो रही हैं. इनमें से दो सीटों पर \r\nकांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के जीतने की संभावना है और एक पर सीपीआई \r\n(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के.

राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया है. राजस्थान से चुनकर आने वाले शर्मा का कार्यकाल नौ मार्च को समाप्त हो गया था. वे दो मार्च को हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की बिमला कश्यप सूद का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली होने वाली सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे.

हिमाचल शर्मा का गृहराज्य है और प्रदेश में उनकी पार्टी सत्ता में है. ऐसे में उनके लिये चुनाव जीतना बेहद आसान माना जा रहा है.

विद्या स्टोक्स और कपिल सिब्बल के नामों पर चर्चाओं के विस्तृत दौर के बाद उनके नाम को अंतिम रूप दिया गया. पार्टी के भीतरी सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में नहीं थे बल्कि के सिब्बल को चुने जाने के पक्ष में थे.

पेशे से वकील सिब्बल दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वीरभद्र के खिलाफ आयकर विभाग, सीबीआई और ईडी द्वारा दायर किये गए मामलों में उनकी पैरवी कर रहे हैं. अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस सिब्बल को पंजाब से राज्यसभा का प्रत्याशी बना सकती है जहां से आने वाले पांच सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

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दूसरे राज्यों में भी ऐसी ही उठा-पटक चल रही है. छह राज्यों में कुल मिलाकर 13 सीटें दावेदारी में हैं. इस वर्ष राज्यसभा के 72 सदस्य सेवानिवृत हो रहे हैं और बीजेपी इसे उच्च सदन में अपनी स्थिति सुधारने के अवसर के रूप में देख रही है जहां वह अल्पमत में है.

वर्तमान में उच्च सदन में यूपीए के 91 सदस्यों के मुकाबले एनडीए के सिर्फ 64 सांसद हैं. बाकी के सांसद क्षेत्रीय पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो इनमें से किसी भी गठबंधन के साथ नहीं हैं.

राज्यों की स्थिति


पंजाब में पांच सीट रिक्त हो रही हैं. कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल को दो-दो सीटे मिलेंगी जबकि बीजेपी को एक सीट मिलने की संभावना है. कांग्रेस की तरफ से सिब्बल, मनीष तिवारी, लाल सिंह, सुनील कुमार जाखड़, जसमीत सिंह बरार और प्रताप सिंह बाजवा के नाम आगे आ रहे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ अपनी नजदीकी के चलते जून में सेवानिवृत होने वाली अंबिका सोनी के भी पंजाब से दोबारा चुने जाने की पूरी संभावना है.

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इस बात की भी उम्मीद है कि शिरोमणि अकाली दल अपने दोनों निवर्तमान सदस्यों, नरेश गुजराल और सुखदेव सिंह ढींढसा को ही दोबारा चुनकर भेजेगा. हालांकि अभी तक बीजेपी के उम्मीदवार को लेकर कयासों का दौर जारी है.

रिपोर्टों के अनुसार पार्टी सिख उम्मीदवार का चयन करना चाहती है, ऐसे में नवजोत सिंह सिद्धू और पार्टी की राज्य इकाई के उपाध्यक्ष राजिंदर मोहन चीना के नाम निकलकर सामने आ रहे हैं.

सिद्धू द्वारा की गई शिरोमणि अकाली दल की आलोचना बीजेपी का खेल बिगाड़ सकती है, जिसके चलते अकाली उनके खिलाफ वोट कर सकते हैं और बीजेपी की हार भी हो सकती है. इसके अलावा आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ सिद्धू की बढ़ती नजदीकी की खबरें भी उनकी संभावित दावेदारी को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

सिद्धू द्वारा की गई शिरोमणि अकाली दल की आलोचना बीजेपी का खेल बिगाड़ सकती है

राज्यसभा की आसाम, नागालैंड, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और पंजाब की रिक्त होने वाली 13 सीटों के लिये चुनाव 21 मार्च को होना है. पंचाब को अलग कर दें तो बाकी राज्यों में बीजेपी सिर्फ एक दर्शक की भूमिका में है और राज्यसभा में मजबूत होने की पार्टी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं.

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कांग्रेस के एक वरिष्ठ राज्यसभा सांसद कहते हैं, ‘‘2016 तो दूर की बात है इन्हें 2019 में भी बहुमत नहीं मिलेगा. हो सकता है कि हमें कुछ सीटों से हाथ धोना पड़े लेकिन इतनी नहीं कि बीजेपी बहुमत में आ जाए. इन्हें सपने देखने दो.’’

आसाम से आने वाले कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसदों - पंकज बोरा और नाजनीन फारुक का कार्यकाल दो अप्रैल को समाप्त हो रहा है अौर दोनों ने ही दोबारा चुने जाने की इच्छा जताई है.

हालांकि सात अन्य नेता अपनी ख्वाहिश जता चुके हैं और आने वाले कुछ दिनों में लाॅबिइंग पूरे जोरों पर रहने की संभावना है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अंजन दत्ता, अब्दुल मुहीब, द्विजन समराह, किरीप चलीहा, पबन सिंह घटोवर, रानी नाराह और बिष्णु प्रसाद के नामों पर चर्चा चल रही है.

इस सबके बीच त्रिपुरा की अकेली सीट पर सीपीआई (एम) का कब्जा है जिसके उम्मीदवार का अभी तक चयन न होने के बावजूद बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है. इसके अलावा नागालैंड में भी नागा पीपल्स फ्रंट का केवल एक ही प्रतिनिधि है और उन्होंने केजी केयनी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. यह सीट खेकिहो जिमोमी के निधन के फलस्वरूप रिक्त हुई है.

केरल से भी तीन सीट दो अप्रैल को रिक्त हो रही हैं. इनमें से दो सीटों पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के जीतने की संभावना है और एक पर सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के.

कांग्रेस ने पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है

कांग्रेस ने पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है और दूसरी जिताऊ सीट गठबंधन की सहयोगी पार्टी जदयू के लिये छोड़ दी है. इस बीच सीपीआई (एम) और सीपीआई के बीच मतभेदों के चलते एलडीएफ अभी तक उम्मीदवार का चयन करने में नाकामयाब रहा है.

अन्य रिक्तियां

यह चुनाव एनडीए के लिये अधिक उम्मीद लेकर नहीं आए हैं. अपनी मर्जी से सात नामित सदस्यों का चुनाव करने की आजादी ही उनके लिये उम्मीद की सबसे बड़ी किरण है.

इस वर्ष मणिशंकर अयर, जावेद अख्तर, बी जयश्री, मृणाल मीरी, बालाचंद्र मुंगेकर, अशोक गांगुली और एचके दुआ सेवानिवृत हो चुके हैं. इस बात की पूरी संभावनाएं है कि नामित किये जाने वाले सदस्य राज्यसभा में उठाए जाने वाले विभिन्न मुद्दों पर सत्ताधारी दल का समर्थन करते हुए दिखेंगे.

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि हाल के दिनों के घटनाक्रम के चलते पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम का नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में अचानक निकलकर आया है जबकि उनके नाम की दूर-दूर तक चर्चा भी नहीं थी.

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एक नेता का कहना है, ‘‘पार्टी उन्हें कर्नाटक से मनोनीत कर सकती है. बीजेपी और उसके सहयोगियों द्वारा एयरसेल-मैक्सिस सौदे को लेकर उनपर लगाए जा रहे आरोप उनके पक्ष में काम करते प्रतीत हो रहे हैं.’’ पार्टी द्वारा कर्नाटक से दो उम्मीदवार मनोनीत किये जाने की संभावना है और चिदंबरम उनमें से एक हो सकते हैं.

2016 के आने वाले महीनों में राज्यसभा के 56 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश नए सांसदों का चुनाव करेंगे.

इस बात की पूरी संभावना है कि बीजेपी के संख्याबल में बढ़ोतरी होगी और कांग्रेस नीचे जाएगी.

मोटे अनुमान के मुताबिक 2016 के अंत तक बीजेपी सात नामित सदस्यों और राज्यों से सात सदस्यों के बूते 14 सीटों के फायदे में रहेगी लेकिन इसके बावजूद भी उनकी मौजूदा स्थिति में अधिक सुधार होने की अधिक संभावना नहीं है.

First published: 10 March 2016, 22:52 IST
 
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