Home » इंडिया » In Uttar Pradesh, Is Amit Shah repeating the mistake of Bihar?
 

क्या उत्तर प्रदेश में बिहार की गलती दोहरा रहे हैं अमित शाह?

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 June 2016, 7:52 IST
QUICK PILL
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों में उत्तर प्रदेश की सरकार पर सीधा हमला करने से बचते रहे हैं. यहां तक कि वह अन्य दलों को भी निशाना नहीं बनाते हैं लेकिन पार्टी प्रेसिडेंट अमित शाह ने मोदी से उलट जाते हुए अखिलेश यादव की सरकार पर करारा हमला किया है.
  • शाह ने अब खुलकर अखिलेश यादव पर हमला बोल दिया है. उन्होंने सपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के पास विजन और कार्यक्रमों का अभाव है. राज्य में कहीं कोई विकास नहीं हुआ है और जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है.
  • अमित शाह के अखिलेश यादव की सरकार को निशाना बनाए जाने की वजहें हैं. पार्टी के लिए चुनाव अभियान को सपा बनाम बीजेपी करना जरूरी है. वह जानबूझकर मायावती को पूरे परिदृश्य से बाहर रखना चाहते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों में उत्तर प्रदेश की सरकार पर सीधा हमला करने से बचते रहे हैं. यहां तक कि वह अन्य दलों को भी निशाना नहीं बनाते हैं लेकिन पार्टी प्रेसिडेंट अमित शाह ने मोदी से उलट जाते हुए अखिलेश यादव की सरकार पर करारा हमला किया है.

उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की जुगत में लगी बीजेपी के लिए यह स्वाभाविक है. सत्ताधारी दल और नेता की आलोचना कर मतदाताओं के दिल में जगह बनाने की कोशिश की जाती है. उन्हें यह जनता को बताना होता है कि आखिर क्यों उनका सत्ता में आना जरूरी है और क्यों सत्ताधारी दल को सत्ता से बेदखल करना अनिवार्य है.

लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अमित शाह यही करने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि सपा सरकार पर हमले से बीजेपी को मदद मिलने जा रही है. अमित शाह दरअसल बिहार चुनाव में की गई गलतियों को एक बार फिर से दुहराते दिख रहे हैं.

अभी तक अधिकांश मौकों पर अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रचार अभियान का अहम चेहरा रहे हैं.

दोनों नेताओं की रैलियों में हालांकि राजनाथ सिंह समेत कुछ अन्य मंत्री भी मौजूद होते हैं. लेकिन मीडिया उन्हें उतना तवज्जो नहीं देता है. मीडिया की नजर में इन नेताओं की भूमिका दूसरे दर्जे की होती है.

पिछले कुछ महीनों के दौरान मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश का लगातार दौरा कर रहे हैं

पिछले कुछ महीनों के दौरान मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश का लगातार दौरा कर रहे हैं. वह शहरों में जाकर केंद्र सरकार के किए गए काम के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे हैं. हालांकि वह मोदी और शाह के मुकाबले उतना प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं.

शाह ने अब खुलकर अखिलेश यादव पर हमला बोल दिया है. उन्होंने सपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के पास विजन और कार्यक्रमों का अभाव है. राज्य में कहीं कोई विकास नहीं हुआ है और जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है.

गलत साबित हुई रणनीति?

तो क्या राज्य सरकार को सीधे निशाना बनाना शाह की सही रणनीति है? पार्टी के आंतरिक सूत्रों की माने तो, 'यह सही नहीं है.' सूत्र ने कहा कि बिहार में आप की गई गलतियों को देख लीजिए. वहां पूरी लड़ाई बिहारी बनाम बाहरी की हो गई. अगर हमने राज्य के राजनीतिक चेहरों को नजरअंदाज किया तो यह रणनीति गलत साबित हो सकती है.

उन्होंने कहा, 'असम जैसे राज्य में हमारी ताकत वहां का स्थानीय नेतृत्व रहा. दिल्ली और बिहार में हमारी कमजोरी यह रही कि हमने राज्य के नेतृत्व को सामने नहीं रखा. इससे बड़े नेताओं की छवि बिगड़ी और पार्टी का नुकसान हुआ. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय नेतृत्व के मुकाबले स्थानीय नेतृत्व को सामने आना चाहिए.'

अभी तक बीजेपी का उत्तर प्रदेश मिशन दो चेहरों पर केंद्रित रहा है. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह. अभी तक पार्टी ने किसी अन्य चेहरों को उतनी गंभीरता के साथ आगे नहीं बढ़ाया है. नहीं राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा किए जाने के बारे में फैसला लिया गया है. यह बिहार जैसी स्थिति है.

बीजेपी नेता ने बताया, 'उत्तर प्रदेश जैसेे बड़े राज्य में किसी चेहरे के जाना सही नहीं है. यह हमारा अनुभव है.'

हालांकि अमित शाह के अखिलेश यादव की सरकार को निशाना बनाए जाने की वजहें हैं. पार्टी के लिए चुनाव अभियान को सपा बनाम बीजेपी करना जरूरी है. वह जानबूझकर मायावती को पूरे परिदृश्य से बाहर रखना चाहते हैं. राज्य में दोनों दलों के लिए मायावती सबसे बड़ी चुनौती हैं. मायावती को पूरे दृश्य से बाहर रखकर दोनों दल अपनी जीत की स्थिति को सुनिश्चित करना चाहते हैं.

अमित शाह शायद खुद और पार्टी के लिए अहम काम कर रहे हैं लेकिन ऐसा करते वक्त पार्टी का ढांचा समावेशी और क्षेत्रीय नेतृत्व से भरपूर होना चाहिए. फिलहाल बीजेपी क्षेत्रीय दलों से मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व पर ध्यान दे रही है. जितनी जल्दी यह बात बीजेपी को समझ में आ जाए, वह पार्टी के लिए बेहतर होगा.

First published: 10 June 2016, 7:52 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

पिछली कहानी
अगली कहानी