Home » इंडिया » in vasundhra raje state Baba Ramdev another food park land allotment in controversy
 

फूडपार्क बनाने के लिए मंदिर की जमीन रामदेव को देना वसुंधरा के लिए बना बड़ी आफत

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2018, 17:30 IST
(Facebook )

बाबा रामदेव की पतंजलि से जुड़े ट्रस्ट ने राजस्थान के करौली जिले में फूडपार्क बनाने के लिए 403 बीघा जमीन लीज पर ली थी लेकिन यह जमीन अब सवालों के घेरे में आ गई है. यही नहीं राज्य की वसुंधरा राजे सरकार के लिए यह गले की हड्डी बनती जा रही है. दरअसल राजस्थान के करौली जिले में साल 2016 बाबा रामदेव के स्वाभिमान भारत ट्रस्ट ने यह जमीन श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट से 11 अगस्त, 2016 में 30 साल के लिए लीज पर ली थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जमीन को लीज पर देने के लिए नियम-कानूनों का उल्लंघन किया गया है. जबकि राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार इस विवाद के बाद नियमों को ही बदल देना चाहती है, ताकि इस पूरे मामले को संभाला जा सके.

इस जमीन पर शिलान्यास 22 अप्रैल को खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और स्वामी रामदेव के हाथों से हो चुका है. यहां योगपीठ, गुरुकुल, आयुर्वेदिक अस्पताल, आयुर्वेदिक दवाइयों का उत्पादन केंद्र और गोशाला का निर्माण होना है. रिपोर्ट के मुताबिक इस लीज की जमीन के एवज में श्री गोविंद देव जी मंदिर की सेवा-पूजा के लिए ट्रस्ट को हर महीने एक लाख रुपये का भुगतान करना है.

मंदिर माफी की जमीन नहीं दी जा सकती है लीज पर 

नियमों के मुताबिक इस जमीन को बेचने का हक़ मंदिर ट्रस्ट के पास नहीं है क्योंकि उसका इस पर मालिकाना हक़ नहीं है, बल्कि इस जमीन पर खुद गोविन्द देव जी का अधिकार है, यानी मंदिर की मूर्ति के नाम दर्ज ज़मीन पर सिर्फ़ भगवान का हक़ होता है. मंदिर के पुजारी या मंदिर से जुड़े ट्रस्ट का इस पर कोई अधिकार नहीं होता. इसलिए इस ज़मीन को मंदिर का ट्रस्ट न तो बेच सकता है और न ही ग़ैर कृषि कार्य के लिए लीज़ पर दे सकता है.

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक़ ‘'कई बार सरकार की अनुमति से मंदिर माफ़ी की ज़मीन जनहित से जुड़ा कोई प्रयोजन बताकर लीज़ पर दी जाती. लेकिन क़ानून के मुताबिक मंदिर माफ़ी की ज़मीन ग़ैर कृषि कार्य के लिए लीज़ पर नहीं दी जा सकती है.’ श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर की ज़मीन को भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को लीज़ पर देने से पहले सरकार से भी कोई अनुमति नहीं ली.

वायर की रिपोर्ट के अनुसार एक लाख रुपये के स्टांप पेपर पर हुई इस लीज़ डीड पर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की ओर से महामंत्री अजय आर्य जबकि श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट की ओर से प्रबंध समिति के रामजी लाल, पुरुषोत्तम सिंघल, महादेव प्रसाद, जगदीश प्रसाद, देवी लाल, वीरेंद्र व रमेश चंद गुप्ता के हस्ताक्षर हैं.

नियमों की माने तो ऐसी जमीन को कृषि कार्य के लिए अधिकतम पांच साल और अन्य कार्यों के लिए तीन साल के लिए लीज पर दिया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि इस जमीन को लीज पर देने को लेकर कई अधिकारी फंस सकते हैं.

सरकार के समाने मुश्किल यह खड़ी हो गई है कि इस जमीन को कैसे लीज पर दिया जाए, इसलिए सरकार लीज के प्रावधानों में बदलाव करना चाहती है. रिपोर्ट के मुताबिक़ मुख्य सचिव के स्तर पर राजस्व विभाग को नियमों में बदलाव का दिर्देश दिए है, यही नहीं सरकार ने इसको लेकर एक समिति भी बनाई है.

First published: 20 June 2018, 17:15 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी