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छत्तीसगढ़ में ईसाइयों और चर्चों पर बढ़ रहे हैं हमले

सुहास मुंशी | Updated on: 21 April 2016, 20:31 IST
QUICK PILL
  • छत्तीसगढ़ इवैंजेलिकल फाउंडेशन द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक समय के साथ ईसाइयों पर हमले बढ़ रहे हैं. अक्सर सत्ताधारी लोगों द्वारा सटीक ढंग से उकसाकर और संचालित कर यह हमले करवाए जाते हैं. 
  • लोगों पर होने वाले हमले उतने चिंताजनक नहीं हैं जितना यहां के प्रशासन का एटीट्यूड. प्रशासन राज्य में मॉडल स्कूलों पर नियंत्रण करने के साथ ही निजीकरण कर रहा है और उन्हें एक विशेष समुदाय को दिया जा रहा है. 

करीब एक माह पहले रायपुर के एक चर्च में कुछ बदमाश घुस गए और उसे तहस-नहस कर दिया. बदमाशों ने वहां मौजूद औरतों-बच्चों पर हमला कर दिया थाा. इस शनिवार को बस्तर के एक चर्च में ईसाई जोड़े पर हमला किया गया.

कथित रूप से हथियारबंद गुंडे हाथों में तमंचे, रॉड और चाकू लिए हुए थे. बताया जाता है कि शनिवार रात को वे चर्च में घुसे और पैस्टर दीनबंधु समेली, उनकी सात माह की गर्भवती पत्नी और बेटी रोशनी विद्या पर हमला कर दिया. 

हमला

चर्च परिसर में घुसने के बाद गुंडों ने पैस्टर पर हमला किया और बाइबल, फर्नीचर और वहां रखे धार्मिक सामानों को नष्ट करने की कोशिश की. इतना ही नहीं उन्होंने चर्च में आग लगाने की भी कोशिश की.

छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल कहते हैं कि यह हमला बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया था. उन्होंने पुलिस पर इस मामले पर पर्दा डालने का आरोप लगाया.

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उन्होंने कहा, "हिंदू कट्टरपंथियों ने शनिवार को प्रार्थना के दौरान चर्च में तोड़फोड़ की. सिर पर भगवा कपड़े बांधे सभी कार्यकर्ता ईसाइयों को जबरन 'जय श्री राम' बोलने के लिए कह रहे थे. इसके बाद उन्होंने पैस्टर को और उनकी सात माह की गर्भवती पत्नी पर पेट्रोल उड़ेल दिया. और अब पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है." 

लेकिन अगर पुलिस हमलावरों को पकड़ भी लेती है तो उन पर कौन सी धारा लगाने की योजना है?

इसकी जांच कर रहे पुलिस अधिकारी अब्दुल खान इस मामले पर बिल्कुल अलग ही राय रखते हैं. उन्होंने कहा, "तुम्हें किसने बताया कि हमलावर 'जय श्री राम' केे नारे लगा रहे थे? लोगों के पास जाकर तुम यह सवाल पूछो...जहां तक जांच की बात है तो यह चल रही है और हम लोग समय रहते इसके लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ लेंगे." 

लेकिन अगर पुलिस हमलावरों को पकड़ भी लेती है तो उन पर कौन सी धारा लगाने की योजना है? जाहिर है हत्या की कोशिश, गंभीर चोट पहुंचाना या आपराधिक षड़यंत्र ऐसी धाराएं नहीं हैं जो इस अपराध की गंभीरता से मेल खाती हैं कि एक सात माह की गर्भवती औरत को आग में जलाने की कोशिश.

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इसके बजाय पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की है. जिसमें दफा 452 (घर में बिना इजाजत घुसना), 395 (डकैती), 435, 427, 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे के साथ पूजा के स्थान को दूषित करना) और दफा 34 (सुनियोजित तौर पर किया गया अपराध) शामिल हैं.

ईसाईयों पर है निशाना

छत्तीसगढ़ इवैंजेलिकल फाउंडेशन द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक समय के साथ ईसाइयों पर हमले बढ़ रहे हैं. अक्सर सत्ताधारी लोगों द्वारा उकसाकर हमले करवाए जाते हैं. 

उदाहरण के लिए देखेंः

  1. 2013 में छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों ने फैसला किया कि वे अपने गांवों में गैर हिंदुओं के प्रवेश नहीं करने देंगे. बीते वर्ष तक करीब 150 गांवों में इस तरह के फरमान सुना दिए गए. आखिर में इन फरमानों को हाई कोर्ट ले जाया गया जहां अदालत ने इन्हें असंवैधानिक बताते हुए खत्म कर दिया.
  2. छत्तीसगढ़ देश के उन पांच राज्यों में से एक है जहां धर्मांतरण विरोधी कानून लागू है. कानून के मुताबिक किसी अन्य आस्था में धर्मांतरण पर पाबंदी है लेकिन इसमें प्रावधान हैं कि कोई भी अपने पूर्वजों की आस्था या फिर उनके वास्तविक धर्म को वापस अपना सकता है. इसे कानून के मुताबिक धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.
  3. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने क्रिसमस के मौके पर सांता क्लॉज द्वारा क्षेत्र में मिठाई बांटने पर पाबंदी लगा दी है. 
  4. विहिप ने बस्तर के आसपास के चर्चों को जबरन अपने स्कूलों में हिंदू देवी सरस्वती की तस्वीर लगाने का दबाव डाला है.

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पन्नालाल कहते हैं, "लोगों पर होने वाले हमले उतने चिंताजनक नहीं हैं जितना यहां के प्रशासन का एटीट्यूड. प्रशासन राज्य में मॉडल स्कूलों पर नियंत्रण करने के साथ ही उनका निजीकरण कर रहा है और उन्हें एक विशेष समुदाय को दे रहा है. हमें इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और बीते माह हमें स्टे मिला."

उन्होंने कहा कि कोरबा में हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा एक सिस्टर पर जबरन सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने का दबाव डाला जा रहा है.

पन्नालाल कहते हैं, "जब सिस्टर ने इनकार किया तो उस क्षेत्र के कलेक्टर ने उस पर सामुदायिक सद्भाव बिगाड़ने की धारा लगा दी. जब हमनें राष्ट्रीय मानवाधिकार का दरवाजा खटखटाया, तो उन्होंने भी उसी कलेक्टर को मामले का जांच अधिकारी बना दिया."

जगदलपुर में बच्चों-बुजुर्गों के लिए बनाए जा रहे एक आश्रम को ग्राम सभा से अनुमति के बावजूद ढहा दिया गया

रेवरेंड राजेश रॉबिन ने सामुदायिक हमले और राज्य के भेदभाव को काफी करीब से देखा है. वो कई आंदोलनों का हिस्सा रहे जिनमें एक तो कब्र की तोड़फोड़ के विरोध में था. बदमाशों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किए जाने के बजाए उन पर ही हत्या का प्रयास, अपहरण और फिरौती मांगने जैसी धाराएं लगा दी गईं. इसके चलते उन्होंने तीन दिन जेल में भी बिताने पड़े.

वो कहते हैं, "अकेले इस साल ही हमनें बीजापुर, नारायणपुर, रायपुर, मधौता में पैस्टर्स और पैरिशनर्स को पीटे जाने की घटनाएं देखी हैं... नारायणपुर में उन्हें इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उन्हें इलाज के लिए जगदलपुर लाना पड़ा. जगदलपुर में हम कुछ सही हैं लेकिन यहां पर भी पुलिस और हिंदू कट्टरपंथियों से खतरा है."

राज्य में इस समुदाय की कब्रों को तहस नहस करने जैसी घटनाओं से पैस्टर राजेश जैसे लोगों का भी भरोसा उठने लगा है.

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वो कहते हैं, "अब इन लोगों ने हाल ही में एक कब्रिस्तान के चारों ओर बनीं दीवार ही ढहा दी. पुलिस ने इस पर कोई मामला भी दर्ज नहीं किया. फिर वे बदमाश हमारे पास आए और दावा किया कि यह कब्रिस्तान करीब डेढ़ सौ साल पहले उनका था. ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने बाबरी मस्जिद मामले में किया था. अब हमें क्या करना चाहिए?"

जगदलपुर में बच्चों और बुजुर्गों का आश्रम चलाने वाले पैस्टर सुरेंद्र चाल्की को भी हाल ही में एक सदमा लगा. पड़ोसियों से जमा किए गए दान से निर्मित किए जा रहे उनके ईंट-सीमेंट के आश्रम को ग्राम सभा से अनुमति मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद इसे नगर निगम द्वारा ढहा दिया गया. लेकिन उन्हें अभी भी उम्मीद है.

वो कहते हैं, "जब हम कलेक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने हमसे कहा कि इस आश्रम को गलती से ढहा दिया गया. उम्मीद है कि हम सभी विभागों से अनुमति लेकर फिर से आश्रम बनाना शुरू कर देंगे."

First published: 21 April 2016, 20:31 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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