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झारखंड में बढ़ रही है मॉब लिंचिंग, तीन साल में घटी 18 घटनाएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2019, 9:40 IST

झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की माने तो पिछले तीन साल में अब तक राज्य में ऐसी 18 घटनाएं हो चुकी हैं, तबरेज़ अंसारी (22), जिनपर चोरी के संदेह में भीड़ द्वारा हमला किया गया, वह इसका 18 वां शिकार था. लिंचिंग की इन घटनाओं में मवेशी वध, चोरी का संदेह और बच्चे को उठाने वाली अफवाहें शामिल थीं. रिपोर्ट के अनुसार इन मौतों से संबंधित कुल आठ मामले दर्ज किए गए थे. इनमें से ज्यादातर मामले लंबित हैं. केवल दो मामलों में समझौते सुरक्षित किए गए हैं.

लातेहार में 18 मार्च 2016 को मजलूम अंसारी और इम्तेयाज़ खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और उनके शव झाबर गांव में एक पेड़ से लटका दिया गाय था. अपराधी कथित रूप से एक गौ रक्षक समिति के सदस्य थे, जिन्होंने दो लोगों पर हमला किया जब वे बिक्री के लिए आठ बैलों को एक स्थानीय बाजार में ले जा रहे थे. 19 दिसंबर 2018 में एक सत्र अदालत ने आठ अभियुक्तों को हत्या के लिए दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

अपने आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा, "दोषियों के प्रति समाज या इस अदालत की कोई सहानुभूति नहीं है, इसलिए आठों दोषियों को अधिकतम सजा सुनाई जाती है ताकि समाज में संदेश जाए कि भविष्य में इस प्रकार के अपराध कोई नहीं दोहराये''. इसी तरह रामगढ़ 29 जून 2017 को अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी को भीड़ द्वारा संदेह के आधार पर पकड़ा गया कि वह अपनी वैन में गोमांस ले जा रहा था. भीड़ ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की और कार में आग लगा दी.

 

बाद में अंसारी ने दम तोड़ दिया. मार्च 2018 में एक फास्ट-ट्रैक अदालत ने बीजेपी नेता नित्यानंद महतो सहित 11 अभियुक्तों को दोषी ठहराया और हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. तीन महीने बाद, झारखंड उच्च न्यायालय ने 11 आरोपियों में से 10 को जमानत दे दी और हमले पर सबूतों की कमी के मद्देनजर उम्र कैद की सजा को उनके जीवनकाल को निलंबित कर दिया. अंसारी का परिवार सर्वोच्च न्यायालय में आदेश के खिलाफ अपील करेगा.

सिराइकेला खरसावां में 18 मई 2017 को चार लोगों हलीम, नईम, सज्जाद और सिराज खान पर शोभापुर और पदमसाई में बच्चे को उठाने की अफवाहों के कारण हमला किया गया. भीड़ ने पीड़ितों को बचाने के लिए गए पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया. इस घटना में दो मामले दर्ज किये गए. एक लिंचिंग के लिए और दूसरा ड्यूटी पर अधिकारी पर हमला करने के मामले में. पहला अभी मुकदमा लंबित है जबकि दूसरे मामले में जुलाई 2018 में एक फास्ट-ट्रैक अदालत ने 12 लोगों को दोषी ठहराया और उन्हें चार साल की कैद की सजा दी. सरकारी अधिकारियों को ड्यूटी पर बाधा डालने और हमला करने, के लिए इन्हे दोषी ठहराया गया.

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First published: 1 July 2019, 9:01 IST
 
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