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पाकिस्तान से युद्ध के हालात के खतरनाक होंगे परिणाम

सादिक़ नक़वी | Updated on: 7 February 2017, 8:25 IST
QUICK PILL
  • उरी के संवेदनशील सैन्य शिविर पर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा भयावह आतंकी हमला और भारत के जवाब देने की अटकलों के बीच यह डर भी बढ़ता जा रहा है कि कहीं यह अंतिम रूप से परमाणु युद्ध तक न पहुंच जाए. 
  • जार्ज पेरकोविच ने हाल ही में एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा है कि यदि भारत पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठानों पर सफलतापूर्वक हमला (यह एक बड़ा सवाल है) करता है और पाकिस्तानी सेना को भौतिक और राजनीतिक रूप से संकट में डालता है तो फिर पाकिस्तान, भारत को रोकने के लिए छोटे परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है.

उरी के संवेदनशील सैन्य शिविर पर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा भयावह आतंकी हमला और भारत के जवाब देने की अटकलों के बीच यह डर भी बढ़ता जा रहा है कि कहीं यह अंतिम रूप से परमाणु युद्ध तक न पहुंच जाए.  पाकिस्तान इस अंतिम विकल्प तक जा सकता है! 

जैसा कि पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो वह सामरिक हथियारों का प्रयोग करने से  हिचकेंगे नहीं. 

जबकि भारत अपनी परमाणु क्षमता पर चुप रहा है, विशेषकर परमाणु हथियारों के सवाल पर. पाकिस्तान बहुत ही आडम्बरपूर्ण तरीके से दावा करता रहा है कि उसने सामरिक परमाणु हथियारों का विकास कर लिया है. वह समय-समय पर यह भी कहता रहा है कि वह अपनी दहलीज तक पहुंच जाएगा ताकि वह भारत के खिलाफ सामरिक परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सके. 

अमरीकी विदेश विभाग की रिपोर्ट कहती है कि भारत की तरह पाकिस्तान ने भी परमाणु हथियार अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, पर वह तेजी के साथ परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है. अमरीकी विदेश विभाग का अनुमान है कि पाकिस्तान के पास 120-130 परमाणु हथियार हैं जबकि भारत के पास 120. 

भारत के रणनीतिक एवं रक्षा प्रतिष्ठान के एक वर्ग में यह आपसी समझ तेजी से बढ़ रही है कि भारत की-नो फस्ट यूज पॉलिसी-कलाकृति की भूमिका में नहीं रहेगी. पाकिस्तानी जनरलों को भी भविष्य में किसी भी तरह की जल्दबाजी की दिशा में पहले चौकस होने की जरूरत है. 

इस बात का भी डर है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार जिहादियों के हाथों तक पहुंच सकते हैं. यह एक ऐसा भय है जिसके चलते पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने भाषण में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस बारे में पक्का विश्वास दिलाने की कोशिश करनी पड़ी.

उन्होंने कहा कि हमने परमाणु पदार्थों और सुविधाओं की रक्षा और सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय किए हुए हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की  भारत के साथ हथियारों की दौड़ में शामिल होने की न तो कोई मंशा है और न ही वह शामिल है. (हालांकि उसने चीनी पनडुब्बियां तैनात कर रखी हैं) उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन हम अपने पड़ोसी द्वारा अप्रत्याशित रूप से हथियारों को जुटाने की अनदेखी भी नहीं कर सकते. और हम अपनी सुरक्षा के विश्वसनीय उपाय बरकरार रखेंगे जो जरूरी होंगे.

अमरीकी विदेश विभाग का अनुमान है कि पाकिस्तान के पास 120-130 परमाणु हथियार हैं जबकि भारत के पास 120.

भारत के रणनीतिक मामलों के एक विशेषज्ञ का कहना है कि पाकिस्तानी परमाणु हथियार या परमाणु बम का कुछ भाग जिहादियों के हाथों में जाने का ऐसा भय है जिससे कोई भी पूरी तरह नकार नहीं सकता. और इसके घातक परिणाम हो सकते हैं.

इसके पूर्व, पाकिस्तान ने परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम शार्ट रेंज-मिसाइल- हत्फ 9 का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया है.  इसकी मारक क्षमता करीब 60 किमी की है. पाकिस्तानी सेना की जन सम्पर्क शाखा आईएसपीआऱ (इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन्स) ने दावा भी किया है कि वह परमाणु हथियार की क्षमता से सम्पन्न है और अपनी रक्षा के लिए मिसाइल सिस्टम को बेहतर बना रहा है. यह इस बात का संकेत है कि उसने छोटे परमाणु हथियारों का विकास कर लिया है ताकि भारत को धमाके के साथ ध्वस्त किया जा सके.

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल इस तरह की किसी भी सम्भावना से इनकार करते हैं. वह कहते हैं कि इस बात की कोई सम्भावना नहीं है कि अपने सामने मंडराते खतरे को लेकर पाकिस्तान परमाणु हथियार का इस्तेमाल करे. वैसे भी कोई परमाणु युद्ध नहीं चाहता. 

सिब्बल कहते हैं कि वर्तमान परिदृश्य में अमरीका और रूस के बीच परमाणु युद्ध की ज्यादा सम्भवना हो सकती है. वह यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान ने छोटे परमाणु डिवाइस का परीक्षण उस तरह से नहीं किया है. 

पाकिस्तान एक ऐसा राष्ट्र है जो अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को तोड़ता रहता है और दूसरे देशों की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआा है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि पाकिस्तान यह कैसे दावा कर सकता है कि उसकी सामरिक क्षमता डर पैदा करने के लिए उपयोगी है. 

कुछ विश्लेषकों और राम माधव जैसे राजनीतिक नेताओं ने उसे ऐसा देश बताया है जो परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी देकर ब्लैकमेल करता है. 

सिब्बल यह भी कहते हैं कि चीन और पाकिस्तान के बीच परमाणु सहयोग ज्यादा चिन्ताजनक है बनिस्पत भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होने की संभावना की अटकलों के.

पाकिस्तान ने परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम शार्ट रेंज-मिसाइल- हत्फ 9 का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया है.

हालांकि, जार्ज पेरकोविच समेत अन्य विशेषज्ञों के भी अपने विचार हैं. जार्ज पेरकोविच ने हाल ही में एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा है कि यदि भारत पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठानों पर सफलतापूर्वक हमला (यह एकबड़ा सवाल है) करता है और पाकिस्तानी सेना को भौतिक और राजनीतिक रूप से संकट में डालता है तो फिर पाकिस्तान, भारत को रोकने के लिए छोटे परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है. उन्होंने सवाल किया कि यह उत्साहपूर्ण हो सकता है या फिर मूर्खतापूर्ण. यदि यह मूर्खतापूर्ण है तो भारत को संतुलित और समझदार बने रहना होगा. 

भारतीय सेना के एक पूर्व जनरल कहते हैं कि मनोवैज्ञानिक रूप से काम करने का उसकी यह युद्धनीति है. पाकिस्तानी जनरल और राजनीतिक नेता इसी तरह की डरावनी और परमाणु सामरिक हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देते रहते हैं. 

भारत के पास पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा सैन्य बल है, हथियार हैं. ज्यादा अधिक तो यह तथ्य है कि भारत ने सामरिक परमाणु हथियारों के उपयोग कर लिया तो पाक में बड़ी तबाही मच जाएगी. 

उदाहरण के लिए, पंजाब में जहां पाकिस्तान के अधिकांशत: विशिष्ट वर्ग के लोगों का आशियाना है और उसका शस्त्रागार भी है, वे उसके बचाव के लिए जुट जाएंगे. रावलपिंडी सेना मुख्यालय पर पदस्थ सैन्य कमाडंर भी ऐसा कुछ करने से बचेंगे ताकि उनके भोग-विलास वाली जिन्दगी में कई खलल न पड़े.

ज्यादा अधिक तो यह कि चीन और अमरीका अपने कारणों के चलते चीजों को सुनिश्चित करना चाहते हैं. उन्हें क्षेत्र में माहौल नहीं खराब करना चाहिए. 

परमाणु युद्ध से चीनी योजना को खतरा होगा जो उसने पाकिस्तान में 46 बिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ है. पाकिस्तान के -सर्वकालिक मित्र-को उस पर दबाव डालना चाहिए कि वह जल्दबाजी में कोई कदम न उठाए. 

इसी तरह अमरीका को भी अपनी आधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिए यह पता लगाते रहना चाहिए कि वह ऐसे घातक हथियारों की तैनाती तो नहीं कर रहा है. सैटेलाइट तकनीकी से इसका पता आसानी से लगाया जा सकता है. भारत को वह गुप्त रूप से उसकी योजना के बारे में संकेत दे सकता है.

First published: 25 September 2016, 7:24 IST
 
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