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हथियार कारोबार: अमेरिका ने सबसे ज्यादा बेचा, भारत ने सबसे ज्यादा खरीदा

अभिषेक पराशर | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • हथियारों की कुल वैश्विक खरीदारी में 14 फीसदी हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश बन गया है.
  • रक्षा उपकरणों के मामले में भारत पूरी तरह से दूसरे देशों पर निर्भर है. यह अपनी कुल रक्षा जरूरत का करीब 70 फीसदी आयात करता है. 
  • 2011-15 में सउदी अरब की हथियार खरीद में 275 फीसदी का इजाफा हुआ है. सउदी अरब पश्चिम एशिया में सबसे अधिक हथियार खरीदने वाला देश रहा.

2016-17 के बजट में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उम्मीद से अलग जाते हुए रक्षा बजट में मामूली बढ़ोतरी की. 2016-17 के लिए भारत का रक्षा बजट 38.32 अरब  डॉलर (2,49,099 करोड़ रुपये) का है जो पिछले साल के 37.96 अरब डॉलर के मुकाबले करीब एक फीसदी ज्यादा है. 

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक 2011-15 के बीच भारत हथियारों की खरीदारी करने वाले देशों की सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है.

2006-10 और 2011-15 के बीच दुनिया के हथियार व्यापार में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और शीर्ष 10 हथियार की खरीदारी करने वाले देशों में छह देश एशिया और ओसीनिया से आते हैं. हथियारों की कुल वैश्विक खरीदारी में 14 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश है. 

वहीं मोदी सरकार के पिछले दो सालों के दौरान रक्षा के क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट को जबरदस्त तरीके से आगे बढ़ाने के बावजूद साल दर साल रक्षा के क्षेत्र में होने वाले खर्च में लगातार गिरावट आई है.

पिछले साल जहां रक्षा के क्षेत्र में किया जाने वाला पूंजीगत खर्च 94,588 करोड़ रुपये रहा वह 2016-17 में घटकर 86,340 करोड़ रुपये हो गया. लेकिन इसे रक्षा क्षेत्र में की गई कटौती या रक्षा प्राथमिकताओं को नजरअंदाज किए जाने के तौर पर देखना सही नहीं होगा. 

सच्चाई यह है कि रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है. भारत अभी भी दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है.

14 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश बना हुआ है

रक्षा के मामले में भारत पूरी तरह से दूसरे देशों पर निर्भर है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत अपनी  कुल रक्षा जरूरतों का करीब 70 फीसदी आयात करता है. हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार होने की यह सबसे बड़ी वजह है. 

भारत अपनी जीडीपी का करीब 2 फीसदी से अधिक हिस्सा रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च करता है. लेकिन स्थानीय उत्पादन और सक्षम टेक्नोलॉजी तक पहुंच नहीं होने की वजह से भारत हथियारों की खरीद से काम चलाने के लिए मजबूर है. 

भारत की सीमा सात देशों से लगती है. हिंद महासागर में रणनीतिक स्थिति की वजह से भारत को लगातार जमीनी और समुद्री सीमा से खतरे का सामना करना पड़ता है. 

सीमा पार से होने वाला आतंकवाद, घुसपैठ और नक्सल समस्या जैसे आंतरिक चुनौतियां भारत की रक्षा नीति के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इसके अलावा भारतीय उप-महाद्वीप में क्षेत्रीय ताकत बनने की चाह भी हथियारों की खरीद  को बढ़ावा देती है.

Top10 arms importer.

ग्राफिक्स: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी)

पाकिस्तान भी पीछे नहीं

हथियारों की खरीद के मामले में चीन दूसरे पायदान पर है. कुल वैश्विक खरीदारी में चीन 4.7 फीसदी के साथ दूसरे पायदान पर जबकि ऑस्ट्रेलिया 3.6 फीसदी के साथ तीसरे पायदान पर खड़ा है. 3.3 फीसदी के साथ पाकिस्तान हथियारों की खरीद के मामले में चौथे पायदान पर बना हुआ है.

चीन ने हाल ही में कहा था कि 2016 में उसका रक्षा खर्च 7-8 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है. विशेषज्ञों की मानें तो चीन की तरफ से रक्षा के मद में किया जाने वाला खर्च आधिकारिक बजट के मुकाबले कहीं अधिक होगा और इसके बावजूद यह अमेरिका के रक्षा खर्च से बेहद कम रहेगा.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुमान के मुताबिक चीन का सैन्य खर्च बजटीय आवंटन के मुकाबले 50 फीसदी अधिक रहने की उम्मीद है. चीन अपनी जीडीपी का 1.3 फीसदी रक्षा बजट पर खर्च करता है जबकि अमेरिका का रक्षा बजट उसके जीडीपी के मुकाबले 3.1 फीसदी है.

अमेरिका ने बेचे सबसे ज्यादा हथियार

2011-15 के बीच कुल बेचे गए हथियार में सबसे अधिक 33 फीसदी हिस्सेदारी अमेरिका की रही. 2006-10 के मुकाबले अमेरिका के बड़े हथियारों की बिक्री में 27 फीसदी का इजाफा हुआ वहीं रूस की हथियार बिक्री में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

एशियाई देशों में हथियारों की खरीद का एक बड़ा पहलू चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा और विस्तारवादी रणनीति है. चीन की आर्थिक ताकत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और उसने दक्षिण चीन सागर में दावेदारी करना शुरू कर दिया है. चीन की इस मंशा की वजह से भारत, जापान और वियतनाम के रक्षा बजट में बढ़ोतरी हुई है.

वियतनाम की हथियार खरीदारी में 699 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. एशिया और ओसीनिया के देशों की हथियार खरीदारी में 2006-10 से 2011-15 के बीच 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. 

पश्चिम एशिया में बढ़ी हथियारों की खरीद

पिछले एक दशक से कुछ पश्चिम एशियाई देशों में गृह युद्ध की स्थिति बनी हुई और इसकी वजह से लाखों की संख्या में लोगों को शरणार्थी बनने को मजबूर होना पड़ा है. यमन और सीरिया में गृह युद्ध की स्थिति बनी हुई है और पूरा पश्चिम एशिया इस युद्ध में उलझा हुआ है.

2006-10 से 2011-15 के बीच पश्चिम एशियाई देशों की हथियार खरीद में 61 फीसदी का इजाफा हुआ है. 2011-15  में सउदी अरब की हथियार खरीद में 275 फीसदी का इजाफा हुआ है. सउदी अरब पश्चिम एशिया में सबसे अधिक हथियार खरीदने वाला देश रहा.

2011-15  के बीच पश्चिम एशियाई देश सउदी अरब की हथियार खरीद में 275 फीसदी का इजाफा हुआ है

यूएई ने इस अवधि में जहां 35 फीसदी अधिक हथियार खरीदे वहीं कतर की हथियार खरीद में 279 फीसदी का इजाफा हुआ. मिस्र की हथियार खरीद में 37 फीसदी का इजाफा हुआ. मिस्र ने सबसे ज्यादा हथियार 2015 में खरीदे.

गृह युद्ध की स्थिति से जूझ रहे इराक ने 2006-10 से 2011-15 के बीच 83 फीसदी अधिक हथियार खरीदे. इराक और सीरिया में आईएसआईएस की वजह से गृह युद्ध की स्थिति बनी हुई है.

Top 10 Arms Exporter.

ग्राफिक्स: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी)

कुल वैश्विक हथियार बिक्री में रूस की हिस्सेदारी 25 फीसदी रही. चीन के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई. वहीं फ्रांस की बिक्री में 9.8 फीसदी की कमी आई. 

2015 में हालांकि फ्रांस कई बड़े रक्षा सौदे करने में सफल रहा है. इसमें सबसे अहम राफेल लड़ाकू विमान का सौदा शामिल है. भारत ने भी फ्रांस से राफेल खरीदने पर मुहर लगाई है. 

सबसे अधिक चौंकाने वाले बात यह रही कि 2006-10 से 2011-15  के बीच यूरोप की हथियार खरीद में करीब 41 फीसदी की गिरावट आई.

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First published: 29 March 2016, 8:34 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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