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आतंकी के मरने पर भारतीय सेना के ब्रेगेडियर ने जताया शोक, फेसबुक पर दी श्रद्धांजलि

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 July 2018, 15:22 IST
(Facebook)

जब कश्मीर इतने लम्बे समय से आतंकियों की वजह से सुलग रहा है ऐसे समय में अगर सेना का कोई ब्रिगेडियर सेना के आधिकारिक पेज पर आतंकी के लिए श्रद्धांजलि लिखे तो ये यकीन करने के योग्य नहीं है. जम्मू कश्मीर में नूर खान उर्फ गुलाम हसन मलिक की मौत पर भारतीय सेना के आधिकारिक फेसबुक पेज पर ब्रिगेडियर पीएस गोथरा की ओर से श्रद्धांजलि लिखी गई. इस पोस्ट का टाइटल है- 'नूर खान नहीं रहे, और यह मेरे लिए निजी नुकसान है.'

भारतीय सेना के ब्रिगेडियर पीएस गोथरा ने ये पोस्ट लिखी है. गौरतलब है कि पीएस गोथरा के परिवार की पिछली तीन पीढ़ियां भारतीय सेना में देश की सेवा में थीं. फेसबुक पर भारतीय सेना के आधिकारिक पेज पर गोथरा ने बताया है कि 1989 में नूर कैसे आतंकवादी बनने के बाद सुरक्षाबलों के हाथ लगा.

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लेकिन बचाव में उसने फरार होने की कोशिश की जिसमें बिल्डिंग से कूदने की वजह से उसकी टांग टूट गई. ब्रिगेडियर ने पोस्ट में ये भी लिखा कि टूटी टांग का इलाज कैसे NHPC के कर्मचारियों की मदद से हुआ. ब्रिगेडियर ने बाद में इस घटना को तफ्तीश से लिखा और बताया कि इस घटना के बाद फरवरी 1993 में गोथरा के पिता मेजर जीएस गोथरा जो कि उस समय उरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (NHPC) में चीफ इंजीनियर थे, उनको आतंकवादियों ने किडनैप कर लिया. ऐ

से में NHPC के कर्मचारियों ने नूर खान से मदद मांगी. टूटी टांग के समय NHPC के लोगों ने जो नूर खान की मदद की थी. उसका एहसान मानते हुए नूर खान ने अपने नेटवर्क के चलते मेजर जिस गोथरा को ढूंढ लिया  और सही सलामत उन्हें वापस भी ले आया.

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इस काम को करने के लिए नूर खान ने अपनी जान पर खेल कर मेजर जीएस गोथरा की जान बचाई. ब्रिगेडियर ने आगे लिखा कि कुछ दिन बाद जब उन्हें पिता जीएस गोथरा ने नूर खान को बुला कर उसे कुछ रकम बतौर इनाम देनी चाही तो नूर ने मना कर दिया. इन सब घटनाओं के बाद 2013 में खुद ब्रिगेडियर गोथरा की तैनाती उसी इलाके में हुई तो वो वहां उसे अपने पिता की जान बचाने के लिए धन्यवाद देने चले गए. वहां जाकर पता चला कि नूर खान ने आत्मसमर्पण कर दिया था. और अब वो अपने नेटवर्क के जरिये सेना की मदद करता था.

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बतौर ब्रिगेडियर गोथरा नूर खान से उनका रिश्ता निजी था और नूर खान ने सिर्फ एक बार अपने इलाज के लिए ब्रिगेडियर से मदद मांगी थी. उसके अलावा उसने कभी किसी तरह की कोई मदद नहीं ली.

First published: 19 July 2018, 15:20 IST
 
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