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'ब्रेग्जिट के झटकों से बेअसर भारत बना निवेशकों का हब'

अभिषेक पराशर | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद को बताया कि भारत न केवल ब्रेग्जिट (ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर होना) के असर को झेलने में सफल रहा है बल्कि यह ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के बाद मची उथल पुथल के बीच दुनिया में निवेश का सबसे अधिक सुरक्षित केंद्र बनकर सामने आया है. 
  • ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के बाद रुपये की सेहत को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जाहिर की जा रही थी. लेकिन रुपया पूरी तरह से ब्रेग्जिट के असर को झेलने में सफल रहा.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद को बताया कि भारत न केवल ब्रेग्जिट (ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर होना) के असर को झेलने में सफल रहा है बल्कि यह ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के बाद मची उथल पुथल के बीच दुनिया में निवेश का सबसे सुरक्षित केंद्र बनकर सामने आया है. 

जेटली ने कहा, 'घरेलू नीतियों की वजह से भारत संकट के समय में स्थिरता और संभावनाओं से भरे केंद्र के तौर पर उभरकर सामने आया है.'

ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के बाद रुपये की सेहत को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जाहिर की जा रही थी. लेकिन रुपया पूरी तरह से ब्रेग्जिट के असर को झेलने में सफल रहा. 

ब्रेग्जिट के बाद 23 जून 2016 से 19 जुलाई 2016 के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी तक मजबूत हुआ.

लोकसभा में सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, 'ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के  केवल अगले दिन ही डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब एक फीसदी की कमजोरी आई जबकि दुनिया के अन्य देशों की करेंसी में कई दिनों तक गिरावट का दौर जारी रहा.' 

23 जून 2016 से 19 जुलाई 2016 के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी तक मजबूत हुआ. ब्रेग्जिट की वजह से रुपये में करीब 60 पैसे तक की कमजोरी आई थी और यह उस दिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 67.68 रुपये तक चला गया था. 

ब्रेग्जिट से बेअसर भारत

ब्रेग्जिट का असर दुनिया भर के शेयर बाजरों पर पड़ा था. भारतीय शेयर बाजार भी इसके प्रभाव से अछूूते नहीं रहे. ब्रिटेन की जनता ने जिस दिन यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के फैसले पर मुहर लगाई उसी दिन सेंसेक्स में करीब 2 फीसदी की जबरदस्त गिरावट आई. 

24 जून को बीएसई सेंसेक्स करीब 940 अंकों की गिरावट के साथ 26,062.15 पर खुला था. जबकि ठीक इसके एक दिन पहले सेंसेक्स 236.57 अंकों की तेजी के साथ 27,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर बंद हुआ था. ऐसा लग रहा था कि बाजार ब्रिटेन के ईयू से बाहर होने के संभावित असर को पचा चुका है लेकिन जिस तरह से सेंसेक्स ने प्रतिक्रिया दी, वह चौंकाने वाला रहा. 

हालांकि अब यह बात साफ हो चुकी है कि ब्रेग्जिट की वजह से भारतीय शेयर बाजारों में आई गिरावट का आधार महज भय और अनिश्चतता की स्थिति थी, जो समय गुजरने के साथ समाप्त हो गई.

जेटली ने बताया, 'ब्रेग्जिट के दिन ही केवल सेंसेक्स में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई जबकि कई अन्य विकासशील देशों के इक्विटी इंडेक्स में ब्रेग्जिट के बाद कई दिनों तक गिरावट का दौर जारी रहा. समग्र तौर पर 23 जून 2016 के मुकाबले 19 जुलाई तक सेेंसेक्स में 2.9 फीसदी की मजबूती आई.' जेटली ने कहा कि घरेलू नीतियों की वजह से भारत उथल-पुथल के बीच स्थिर और संभावनाओं से भरपूर केंद्र के तौर पर उभरकर सामने आया है.

वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े होने की वजह से अगर ब्रिटेन और यूरोपीय यूनिय में मंदी आती है तो निश्चित तौर से उसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. 

भारत के कुल निर्यात में ब्रिटेन और यूरोपीयन यूनियन को होने वाले निर्यात की हिस्सेदारी क्रमश: करीब 3 फीसदी और 17 फीसदी है. साथ ही भारत दोनों देशों को करीब 10 अरब डॉलर का सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करता है. 

जेटली ने कहा कि मांग में आई कमी की वजह से पिछले दो सालों के दौरान यूरोप की अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर जारी है. 

वैश्विक कमजोरी से पड़ेगा फर्क

वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिलहाल किसी तरह की रिकवरी के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में ब्रिटेन के बाहर होने से वैश्विक वृद्धि दर पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ब्रेग्जिट के असर को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वैश्विक  वृद्धि दर के अनुमान को 3.2 फीसदी से घटाकर 3.1 फीसदी कर दिया है. जेटली ने कहा, 'भारत की वृद्धि दर पर पड़न वाले संभावित असर को  तेल की कम कीमतों और नीतिगत समर्थन से थामने में मदद मिलेगी.'

वित्त मंत्री ने कहा अगर मीडियम टर्म में व्यापार पर ब्रेग्जिट के अलावा द्विपक्षीय व्यापार संधि को लेकर होने वाली बातचीत का भी असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार और आरबीआई स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और भारत के वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत हैं. साथ ही हमारे पास विदेशी मुद्रा कोष का मजबूत भंडार है जिससे हमें किसी भी तरह के उथल-पुथल का सामना करने में मदद मिलेगी.

First published: 23 July 2016, 2:41 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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