Home » इंडिया » India, Balochistan, Pakistan: what Modi must do next
 

भारत, पाकिस्तान और बलोचिस्तान के त्रिकोण में मोदी का अगला कदम

विवेक काटजू | Updated on: 22 August 2016, 7:49 IST
QUICK PILL
  • बलोचिस्तान और पीओके का महज जिक्र कर मोदी ने यह बताने की कोशिश की है कि भारत जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान से उब चुका है और वह अब इस मामले में पाकिस्तान को बिलकुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.
  • ऐसे में मोदी अब अगर पाकिस्तान के साथ सामान्य रिश्ते की तरफ कदम बढ़ाते हैं तो उनकी विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी. लेकिन इस दौर में भी कूटनीतिक कुशलता की जरूरत बनी रहेगी.
  • पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है. लेकिन इस बार पीएम मोदी के बलोचिस्तान में मानवाधिकार हनन के मुद्दे का जिक्र किए जाने के बाद पाकिस्तान बैकफुट पर आ चुका है.

राजनीति में अगर एक हफ्ता लंबा समय हो सकता है तो कूटनीति में भी यह पूरी तरह से नाटकीय और रोमांच से भरा भी हो सकता है. खासक र बात जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की हो. पिछले हफ्ता दोनों देशों के बीच कुछ ऐसा ही रहा. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इससे आने वाले दिनों में हासिल क्या होगा.

इन सबकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बलोचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर एवं गिलगित में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर दिए बयान के बाद हुई. कश्मीर घाटी की स्थिति पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने इस मुद्दे का जिक्र किया था.

मोदी ने पूर्व के अन्य प्रधानमंत्रियों के उलट इस बात को लेकर संकेत दे दिए थे कि वह पाकिस्तान के साथ अब आक्रामक विदेश नीति की तरफ कदम बढ़ा चुके हैं और फिर इस रणनीति के तहत उन्होंने पहली 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से दिए गए भाषण में इन मुद्दों का जिक्र कर दिया.

मोदी ने लालकिले के भाषण में किसी तरह की चूक नहीं की और उन्होंने बलोचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर एवं गिलगित के लोगों का धन्यवाद दिया जिन्होंने इसकी शानदार प्रतिक्रिया दी.

बयानों का मतलब

इस तरह के संकेत कूटनीतिक रिश्तों में बेहद अहम होते हैं, खासकर तब जब कहने की ठीक मंशा का सही तरह से अंदाजा नहीं हो. इससे कई बार कूटनीति करनेे का भी मौका मिल जाता है.

तो क्या मोदी उसी दिशा में जा रहे हैं जिसका जिक्र वाशिंगटन पोस्ट की 16 अगस्त की रिपोर्ट में मैक्स बराक ने किया था. उन्होंने कहा, 'एक तरह से यह उनके आक्रामक मतदाताओं को अपील करेगा जो उन्हें सत्ता में लेकर आया है. वह दुनिया को बता रहे हैं कि भारत बलोचिस्तान में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकता है और वह शायद पहले ऐसा करता भी रहा है जो कश्मीर में पाकिस्तानी मौजूदगी के खिलाफ भारत रणनीतिक तौर पर इस्तेमाल भी करता रहा है.'

इस बात को मानने का कम ही आधार है कि बलोचिस्तान और पीओके का महज जिक्र कर मोदी ने यह बताने की कोशिश की है कि भारत जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान से उब चुका है और वह अब इस मामले में पाकिस्तान को बिलकुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.

बुरहान वानी की मुठभेड़ में हुई मौत के बाद पाकिस्तान ने इस मौके का इस्तेमाल करने में कोई कसर नहीं छोउ़ी और वह लगातार जम्मू-कश्मीर में आग भड़काने में लगा हुआ है. प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हमेशा से कश्मीर मसले पर पाकिस्तानी सेना के साथ खड़े रहे हैं और उन्होंने इस बार इस मुद्दे को जमकर हवा दी.

कश्मीर में पाकिस्तान की आक्रामकता और पठानकोट हमला मामले में पाकिस्तान की तरफ से उचित कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह से मोदी ने कूटनीतिक आक्रामक रुख अख्तियार किया है.

जवाबी रणनीति

तो फिर सवाल है कि पाकिस्तान कैसे मोदी को जवाब देगा और भविष्य में वह क्या करेगा?

इस बार हालांकि चौंकाने वाली बात यह रही कि पाकिस्तान ने मोदी के आरोप का उतनी आक्रामकता के साथ जवाब नहीं दिया है. निश्चित तौर पर पाकिस्तान भारत के जाल में फंस गया है. अब कश्मीर से ज्यादा बलोचिस्तान पर बात हो रही है. वैसे भी जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की भूमिका हमेशा से ही सवालों के घेरे में रही है.

अभी तक पाकिस्तानी अधिकारी और सेना अपना सारा दुष्प्रचार कश्मीर पर केंद्रित रखा करते थे. इस रुख को ध्यान में रखते हुए नवाज शरीफ ने मोदी को जवाब नहीं दिया बल्कि उनके विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने मोदी को जवाब दिया.

अजीज ने कहा कि मोदी बलोचिस्तान पर बयान देकर कश्मीर से ध्यान हटाना चाहते हैं. उन्होंने हमेशा की तरह कहा कि कश्मीर में जो कुछ भी हो रहा है 'वह आतंकवाद से कम नहीं है' और यह आत्मनिर्णय के हक की घरेलू लड़ाई है. यह वैसा अधिकार है जिसे संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने कश्मीर को दिया है.'

बलोचिस्तान पर उन्होंने कहा, 'मोदी का बयान पाकिस्तान की इस बात को पुख्ता करता है कि भारत बलोचिस्तान में रॉॅ की मदद से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है.' तीन दिन बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का हवाला देते हुए कहा, 'बलोचिस्तान पर बयान देकर मोदी ने लक्ष्मण रेखा को लांघ दिया है.'

रणनीतिक कदम

कश्मीर पर ध्यान केंद्रित रखते हुए पाकिस्तान ने भारत के विदेश सचिव को इस्लामाबाद आने का न्योता दे डाला. विदेश सचिव को लिखे पत्र में  पाकिस्तानी विदेशी सचिव ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का जिक्र किया है.

पाकिस्तान को यह बात अच्छे से पता है कि भारत बेहद आसानी से इस सुझाव को खारिज कर देगा. भारत ऐसा कर भी चुका है. भारत ने हमेशा की तरह पाकिस्तान से यह कहा कि पहले उसे आतंकियों को खत्म करना होगा जो उसकी नीति को हांक रहे हैं.

भारत ने न केवल बैठक से इनकार किया बल्कि उन्होंने बैठक की शर्तों को भी तय कर दिया जिसे पाकिस्तान अक्सर खारिज करता रहा है.

भारत ने पहले कभी ऐसा नहीं किया और अगर वह ऐसा करने में सफल रहता है तो  निश्चित तौर पर कश्मीर मुद्दे पर भारत की रणनीति में यह बड़ी उपलब्धि होगी. पूरे प्रकरण में बस इस बात को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत होनी चाहिए कि मोदी मई 2016 के बाद से पाकिस्तान पर कई बार अपनी नीतियों में बदलाव कर चुके हैं और उन्हें इससे बचना चाहिए.

सतर्कता और बुद्धिमता

यह कूटनीतिक रूप से सही होगा कि बलोचिस्तान के मानवाधिकार मुद्दे को लगातार उठाया जाए और पाकिस्तान प्रांत पर किसी तरह की टिप्पणी से परहेज किया जाए. पीआईबी को बलोच राष्ट्रवादियों की उस टिप्पणी को रीट्वीट नहीं करना चाहिए था जिसे उन्होंने मोदी के बयान के बाद जारी किया था.

अगर बलोच राष्ट्रवादी मोदी के बयान को मान्यता के तौर पर ले रहे हैं तो यह उनका नजरिया है. ऐसा भारत के एक अखबार में भी देखने को मिला. यह इस बात पर आधारित नहीं है कि मोदी ने वास्तव में क्या कहा.

दुनिया की बड़ी शक्तियां अन्य देशों में मानवाधिकार हनन को लेकर लगातार मुखर रही हैं और अब उन्हें बलोचिस्तान की स्थिति जैसे तर्कों का सामना करना पड़ सकता है. मोदी अब अगर पाकिस्तान के साथ सामान्य रिश्ते की तरफ कदम बढ़ाते हैं तो उनकी विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी. लेकिन इस दौर में भी कूटनीतिक कुशलता की जरूरत बनी रहेगी.

First published: 22 August 2016, 7:49 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी