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भारत के बच्चों की शिक्षा के लिए इस अमेरिकी ने दान की अपनी 30 लाख डॉलर की संपत्ति

न्यूज एजेंसी | Updated on: 3 December 2018, 14:44 IST

उत्तर प्रदेश के सहरानपुर जिले के रामपुर-मनिहारन स्थित बिल क्लिंटन स्कूल और हिलेरी क्लिंटन नर्सिग स्कूल के संस्थापक विनोद गुप्ता के जीवन का दर्शन है 'लर्न, अर्न और रिटर्न'.मतलब सीखो, कमाओ और दान करो. लेकिन वह दान भी ऐसे कार्यो में करने में विश्वास करते हैं जिनसे उनके दर्शन का यह चक्र सतत चलता है.विनोद गुप्ता खुद एक शिक्षाविद हैं और वह शिक्षा के महत्व को भलीभांति समझते हैं.इसलिए उन्होंने सारी दौलत शैक्षिक उन्नति में ही खर्च करने की ठानी है.

भारतवंशी अमेरिकी कारोबारी विनोद गुप्ता सेवा क्षेत्र की अमेरिकी कंपनी एवरेस्ट ग्रुप एलएलसी के चीफ एग्जिक्यूटिव हैं.विनोद गुप्ता को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा वाशिंगटन स्थित जॉन एफ. केनेडी सेंटर फॉर परफॉर्मिग आर्ट्स के ट्रस्टी नियुक्त किया था.पिछले दिनों दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में गुप्ता ने कहा, "मेरा मानना है कि जिस धरती पर पैदा हुए उसके लिए अगर कुछ नहीं कर पाए तो सारी उपलब्धि बेकार है.इसलिए मैंने रामपुर-मनिहारन में बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल और महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने के लिए नर्सिग स्कूल खोला है."

उन्होंने कहा कि गांवों की में तब तक समृद्धि नहीं आएगी जब तक महिलाएं शिक्षित और स्वावलंबी नहीं होंगी.गुप्ता से जब पूछा गया कि महिलाओं को स्वालंबी बनाने के लिए उन्होंने नर्सिग स्कूल ही क्यों खोला, तो उन्होंने कहा, "देश में नर्सो की जितनी जरूरत है उतनी नर्स नहीं है.इसलिए प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद नौकरी आसानी से मिल रही है और वे सरकारी व निजी अस्पतालों में अच्छी तन्ख्वाह भी पा रही हैं."उन्होंने आगे कहा, "शिक्षा और स्वास्थ्य गांवों की जरूरत है.इसलिए मैंने बच्चों के लिए स्कूल और स्कूल से पास करने वाली लड़कियों के लिए नर्सिग स्कूल खोला है."

दो संस्थानों का संचालन विनोद गुप्ता चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है.गुप्ता ने कहा कि बहरहाल वह रामपुर-मनिहारन के आसपास के गांवों के बच्चों और महिलाओं के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण के कार्य में जुटे हैं, लेकिन उनका फाउंडेशन अन्य संस्थानों की मदद कर रहा है.

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भारती प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खगड़पुर से 1967 में बी.टेक की डिग्री लेने के बाद गुप्ता मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए अमेरिका गए.उन्होंने 1969 में अमेरिका के लिंकोइन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का से एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में एमएस की उपाधि हासिल की.उन्होंने 1971 में एमबीए की डिग्री हासिल की.गुप्ता को यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का के मोनटेरी इंस्टीट्यूट और आईआईटी खड़गपुर ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की है.

गुप्ता ने आईआईटी खड़गपुर को विनोद गुप्ता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्थापित करने के लिए 20 लाख डॉलर की राशि प्रदान की है.उन्होंने अपने शहर रामपुर-मनिहारण में ही रामरती एजुकेशन कांप्लेक्स के लिए 10 लाख डॉलर दान में दिया है.विनोद गुप्ता 1945 में नई दिल्ली से 160 किलोमीटर दूर सहारनपुर जिला स्थित रामपुर-मनिहारन में पैदा हुए थे.इसलिए उनको रामपुर-मनिहारन से अतिशय लगाव है.वह कहते हैं कि गांव समृद्ध होगा तो देश समृद्ध होगा.

First published: 3 December 2018, 14:13 IST
 
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