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20 साल पहले आज के ही दिन धरती में हुई थी हलचल, भारत बना था परमाणु शक्ति

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 May 2018, 15:04 IST

आज से 20 साल पहले आज ही के दिन यानी 11 मई को भारत ने दुनिया के सामने अपनी परमाणु ताक़त दिखा कर सबको हैरान कर दिया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया गया. इसी के साथ भारत दुनिया का तीसरा परमाणु ताक़त वाला राष्ट्र बन गया. इस परिक्षण से भारत ने अमेरिका की CIA जैसी ख़ुफ़िया एजेंसी को भी चकमा दे दिया. अमेरिका भारत के इस परमाणु परिक्षण से हैरान था कि कैसे CIA जैसी मजबूत ख़ुफ़िया एजेंसी के सेटेलाइट्स को भारत ने चकमा दे दिया.

11 मई 1998 को पहली बार पोखरण में 3 अंडरग्राउंड न्यूक्लिअर टेस्ट किये. उस समय ललित मान सिंह विदेश मंत्रालय के सचिव थे. 11 मई के पहले परमाणु परिक्षण के बाद 13 मई को भारत ने 2 और परमाणु परिक्षण किए. इन परीक्षणों के बारे में घोषणा खुद प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने की थी. पोखरण के इन 5 परमाणु परीक्षणों के बाद भारत पहली ऐसी न्यूक्लिअर पावर बन गया जिसने परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty) पर अब हस्ताक्षर नहीं किये थे.

तत्कालीन विदेश मंत्रालय के सचिव ललित मान सिंह इस मामले में कहते हैं,'' परीक्षण के कुछ महीनों बाद विदेश सचिव के रघुनाथ ने अमेरिकी विदेश सचिव को बताया कि भारत का परमाणु परीक्षण करने का कोई इरादा नहीं था. ये परीक्षण पूरी तरह से सीक्रेट था और इस बारे में केवल पांच लोगों को मालूम था. यहां तक की उन्हें भी नहीं बताया गया था.''

भारत के लिए ये परमाणु परिक्षण बहुत अहम कदम था जिसके बाद पूरी दुनिया में भारत को परमाणु शक्ति के रूप में जाना जाने लगा. इस परिक्षण के बारे में मान सिंह बताते हैं, ''इस परिक्षण के बाद भारत को बहुत मुश्किलों को सामना करना पड़ा. आर्थिक तौर पर कई प्रतिबंधों का सामना भारत को करना पड़ा. भारत को एक प्रकार से अलग-थलग कर दिया गया था. उस वक्त भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस अलगाव की स्थिति से निपटना और अमेरिका-भारत की दूरियों को कम करना.''

जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने इस परिक्षण के बाद प्रत्रक्रिया में विदेश सचिव स्तर की वार्ता को स्थगित कर दिया. इतना ही नहीं अमेरिका ने 200 से अधिक भारतीय इकाइयों को प्रतिबंधित कर दिया. जिसमे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और अंतरिक्ष विभाग की इकाइयां थीं. इतना ही नहीं इनमे से कुछ प्राइवेट फर्म भी शामिल थे.

भारत का परमाणु अप्रसार संधि में हस्ताक्षर किये बिना विश्व की परमाणु शक्ति बनना एक अलग ही बहस का विषय बना रहा. परिक्षण के कई सालों बाद भी मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश जूनियर के दौर में भारत परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना ही सभी व्यवहारिक उद्देश्यों के लिए न्यूक्लियर मंच पर जगह बना रहा था.

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के एक संयुक्त बयान ने 18 जुलाई 2005 को इस पर मुहर लगा दी. मानसिंह के अनुसार इसके बाद भारत ने कुछ रिएक्टरों को IAEA के तहत रखा.

30 साल बाद हटा भारत पर लगा वैश्विक प्रतिबंध

परमाणु परिक्षण के बाद भारत पर अमेरिका नेतृत्व में लगे वैश्विक प्रतिबंध को लगभग 30 साल बाद हटाया गया. 2008 सितंबर में NSG से राहत मिलने के बाद ये प्रतिबन्ध हटाया कि 1974 और 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर लगाया गया था. इसके साथ ही भारत को सिविलियन न्यूक्लियर तकनीक के तहत व्यापार का भी मिला.

इस तरह से भारत के परमाणु शक्ति बनने के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्टीय उतार-चढ़ाव रहे जिसके बाद भारत आखिरकार दुनिया की बड़ी परमाणु शक्तियों में शुमार हो गया.

 

First published: 11 May 2018, 14:58 IST
 
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