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क्यों भारत के लिए मुश्किल है पाकिस्तान का पानी रोकना?

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 February 2019, 16:20 IST

पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का एक बयान चर्चा में है. उन्होंने पाकिस्तान को धमकी देते हुए कहा है कि हम पाकिस्तान जाने वाला पानी रोक देंगे. नितिन गडकरी ने ट्वीट करके भी कहा कि अब भारत के हिस्से वाले पानी को पाकिस्तान नहीं जाने दिया जाएगा. उन्हें कहा कि इसके लिए डैम बनाए जा रहे हैं.

नितिन गडकरी के इस बयान के बाद पाकिस्तान का भी बयान आया. पाकिस्तान के सिंधु जल आयोग के उप-प्रमुख शेराज मेमन ने कहा कि भारत में हमारे पानी को रोकने या मोड़ने की क्षमता नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि पानी रोकने को लेकर भारत की ओर से हमारे पास कोई जानकारी भी नहीं आई है.

इसके साथ ही देश में यह बात चलने लगी कि भारत सरकार पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोक देगा और इससे पाकिस्तान में सूखा आ जाएगा. यह भी कहा जाने लगा कि पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस जाएगा पाकिस्तान. हालांकि नितिन गडकरी ने यह साफ जरूर कर दिया है कि वह सिर्फ भारत के हिस्से का पानी रोकेंगे. यानि कि रावी, सतलुज और व्यास नदी का पानी. 

गडकरी ने बताया, "इसके लिए जम्मू-कश्मीर के शाहपुर-कांडी में रावी नदी पर एक प्रोजेक्ट का निर्माण शुरु हो चुका है. एक अन्य प्रोजेक्ट की मदद से जम्मू-कश्मीर में रावी नदी का पानी स्टोर किया जाएगा और इस डैम का अतिरिक्त पानी अन्य राज्यों में प्रवाहित किया जाएगा." नितिन गडकरी के दफ्तर का भी कहना है कि ये दीर्घकालिक योजना है और इसका सिंधु नदी समझौते से कोई लेना-देना नहीं है.

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दरअसल, जम्मू-कश्मीर में छ: नदियां हैं. सिंधू, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज. इन्हें दो भागों में बांटा गया है. पूर्वी और पश्चिमी. इसमें से पहली तीन नदियां पश्चिमी नदियां कहलाती हैं और बाद की तीन नदियां पूर्वी नदी.

भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को एक समझौता किया गया है. इसे सिंधु नदी समझौता यानि इंडस रिवर ट्रीटी कहा जाता है. इसमें नदियों के पानी का बंटवारा किया गया है. समझौते के अनुसार, भारत का पूर्वी नदियों पर पूरा अधिकार होगा पर पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए छोड़ना पड़ेगा.

इसी समझौते को तोड़ कर पाकिस्तान का पानी बंद करने की बात कही जा रही है. बता दें कि सिंधु, झेलम और चेनाब का पानी भारत सिर्फ नॉन-कनजम्पटिव चीजों में ही इस्तेमाल कर सकता है. यानि कि पीने या सिंचाई में भारत इसके पानी का उपयोग नहीं कर सकता क्योंकि इसमें पानी खर्च होगा. बस इस पानी से भारत बिजली बना सकता है. इससे पानी का उपयोग तो होता है पर उस पानी को पाकिस्तान के लिए वापस नदियों में छोड़ दिया जाता है.

अब जो सिंधु नदी समझौता हुआ है उसके तहत पाकिस्तान को इन छ: नदियों का कुल लगभग 80% पानी मिलता है और भारत को मात्र 20 प्रतिशत पानी मिलता है. दरअसल, पश्चिमी नदियों में ज्यादा पानी है और पूरा पाकिस्तान को ही जाता है. जबकि कम पानी वाली पूर्वी नदियों का पानी भारत इस्तेमाल तो करता है, लेकिन इनका बाकी बचा हिस्सा भी पाकिस्तान को ही जाता है.

हम नहीं रोक सकते पाकिस्तान का पानी 

पानी रोकने की बात करने वाले ये भूल जाते हैं कि नदियां खुद से बहती हैं. नदियां कोई ट्यूबवेल का पानी नहीं है कि नासा बांधा और इस खेत से उस खेत में मोड़ दिया या फिर पाइपलाइन की तरह यहां-वहां कर दिया. इतना अथाह पानी रोकने के लिए बांध बनाने पड़ेंगे. बांध बनाने में सालों-साल लगते हैं.

अगर बांध बनाकर इतना पानी रोक लिया तो उसे डालेंगे कहां? इतना पानी कश्मीर की तरफ मोड़ेंगे तो कश्मीर पानी में डूब जाएगा. अगर पाकिस्तान सुखाने के लिए इन्हें पंजाब की तरफ मोड़ देंगे तो पूरा पंजाब डूब जाएगा. इन नदियों में करीब 170 MAF पानी बहता है. इसमें से 135 MAF पानी पाकिस्तान जाता है. वहीं भारत को मात्र 35 MAF के करीब पानी मिलता है.

पाकिस्तान भी 135 MAF में से करीब 40 MAF यूं ही बहा देता है. हम सिर्फ 5 से 10 MAF पानी ही अपनी नदियों में मिला सकते हैं. आप जानकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि इससे पाकिस्तान को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. और पाकिस्तान को प्यास से मार देने जितना पानी रोकने की हमारी क्षमता नहीं है.

First published: 22 February 2019, 13:10 IST
 
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