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चीनी सेना के जवानों के कॉलर में लगाई जाती है नुकीली पिन, झुकते ही गर्दन से निकाल देती है खून

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 June 2020, 14:11 IST

India China Dispute: भारत और चीन की सेना के बीच 15-16 जून की रात हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. इसके बाद से ही भारत में चीन के प्रति काफी गुस्सा व्याप्त है. भारत में चीनी सैनिकों के प्रति भी काफी गुस्सा है. हर देश के सैनिक उसके लिए अनमोल धरोहर की तरह होते हैं. सैनिकों को तैयार करने के लिए उनकी कड़ी ट्रेनिंग होती है.

भारतीय सैनिकों की तरह ही चीनी सैनिकों को भी कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि चीनी सैनिकों के कॉलर में एक नुकीली सुई लगाई जाती है. यह इसलिए लगाई जाती है कि सैनिक की गर्दन जरा सी भी नीचे हुई कि पिन चुभ जाती है. इस कारण जवान हमेशा अपनी गर्दन सीधी रखता है. धीरे-धीरे जवान को ऐसी ही प्रैक्टिस हो जाती है. इस तरह सेना को प्रशिक्षित करने के लिए चीन काफी क्रूर तरीका अपनाता है.

काफी क्रूर है चीन की पैरा सेना

चीन में देश की आंतरिक सुरक्षा तथा नियमों को लागू करने और दंगे-फसाद कुचलने के लिए पैरा फोर्स का इस्तेमाल किया जाता है. लड़ाई के दौरान पैरा फोर्स का काम सेना की मदद करना होता है. पैरा फोर्स को भी सेना जैसी कड़ी ट्रेनिंग से गुजारना होता है. इनका अनुशासन सेना से भी बढ़कर माना जाता है.

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बता दें कि चीन में 15 लाख पैरा मिलिट्री फोर्सेस हैं. उनकी कड़े प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है. सैनिक चलते हुए स्मार्ट लगें तथा कदमताल के समय सब एक साथ हो, इसके लिए उनकी यूनिफॉर्म के कॉलर पर दोनों तरफ पिन लगी होती है. पिन का नुकीला सिरा सीधे उनकी गर्दन की ओर होता है. चूंकि शुरुआत में सैनिकों की गर्दन काफी झुकती रहती है. ऐसे में पिन सीधे उनकी गर्दन में चोट करती है.

पीठ में बांधा जाता है लकड़ी का क्रॉस

चीनी पैरामिलिट्री फोर्स के लगभग सभी जवानों के गले शुरुआती ट्रेनिंग के समय जख्मी रहते हैं. यहां तक कि कई बार सारे जवानों की गर्दन एक बराबर ऊंची रखने के लिए गर्दन के बीच ताश के पत्ते रख दिए जाते हैं. इसमें उन्हें बिना पत्ते गिराए मार्च करना होता है. इसके अलावा सैनिकों का पोश्चर ठीक रहे, इसके लिए उनकी पीठ पर लकड़ी का क्रॉस बांधा जाता है. इसके वह सीधे चलें और पीठ बिल्कुल न झुके. 

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First published: 26 June 2020, 14:11 IST
 
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