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चीन के राजदूत ने गलवान में हुई झड़प को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कहा- तनाव कम करना जरूरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 August 2020, 7:57 IST
(File Photo)

लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में 14-15 जून की रात को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई भारतीय और चीन सैनिकों की हिंसक झड़प को भारत में चीन के राजदूत सून वेडॉन्ग (Sun Weidong) ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. इस हिंसक झड़प में भारत ने अपने 20 सैनिक गंवाए थे, उसके बाद दावा किया गया कि इस घटना में चीन के भी करीब 45 सैनिक मारे गए. इस हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. इस बीच भारत में चीन के राजदूत सून वेडॉन्ग (Chinese Ambassador Sun Weidong) ने कहा है कि गलवान घाटी में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी.

उन्होंने कहा कि ये घटना इतिहास के संदर्भ से संक्षिप्त लम्हा है. वेडॉन्ग ने कहा कि बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की कोशिशें की जा रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सून वेडॉन्ग ने ये बातें भारत-चीन यूथ फॉरम में कहीं. जिसका आयोजन 18 अगस्त को हुआ था. राजदूत की इन बातों को चीन के दूतावास ने मंगलवार को छापा है. इस वेबिनार में सून वेडॉन्ग ने कहा कि, "दो उभरते हुए प्रमुख पड़ोसियों के रूप में चीन और भारत को विचारधारा की लाइनों की पुरानी मानसिकता को छोड़ देना चाहिए और 'एक का लाभ दूसरे के नुकसान' के पुराने खेल से छुटकारा पाना चाहिए. ऐसे में आप भटक जाएंगे और गलत रास्ते पर चले जाएंगे."


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चीनी राजदूत सून वेडॉन्ग ने आगे कहा, "बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब सीमा पर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी जिसे न तो चीन और न ही भारत देखना पसंद करेगा. अब हम इसे ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं. ये घटना इतिहास के संदर्भ में संक्षिप्त लम्हे थे." सून ने कहा कि विकास के लक्ष्यों को पाने के लिए, दोनों देशों को एक 'शांतिपूर्ण और अनुकूल' बाहरी वातावरण की जरूरत है. उन्होंने कहा कि चीन और भारत, पड़ोसी देशों को शांति से रहना चाहिए और संघर्ष से बचना चाहिए.

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इसके अलावा सून ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के बारे में कहा कि, "मुझे लगता है कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे को चुंबक की तरह आकर्षित करना चाहिए, बजाय इसके कि इसे जबरदस्ती अलग करने की कोशिश की जाए. सून ने कहा कि हमें अपने सामाजिक व्यवस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता है. हर देश की सामाजिक प्रणाली अपने संबंधित लोगों द्वारा बनाई गई एक स्वतंत्र चीज है और इसमें किसी दूसरे को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि, "चीन और भारत की अलग-अलग सामाजिक प्रणालियां और सांस्कृतिक परंपराएं हैं, लेकिन हम सभी का लक्ष्य ऐसे विकास पथ पर चलना है जो हमारी अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल हो."

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First published: 26 August 2020, 7:58 IST
 
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