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रक्षा खरीद: हथियारों का बड़ा बाजार बन गया है भारत

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
QUICK PILL
  • पिछले एक दशक (खास तौर पर 2010) से भारत हथियारों के वैश्विक बाजार का प्रमुख केंद्र बन गया है. इस साल अगस्त में एक बड़ी रक्षा कम्पनी ने मीडिया को जानकारी दी कि भारत विश्व के सर्वाधिक व्यापक औद्योगिक रक्षा नेटवर्क की धुरी बन गया है.
  • अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद भारत विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है और दुनिया भर के हथियार निर्माता भारत में अपना भविष्य देख रहे हैं. भारत की महत्वाकांक्षा है कि वह लड़ाकू विमानों की 45 स्काड्रन तैयार करे.

पिछले एक दशक (खास तौर पर 2010) से भारत हथियारों के वैश्विक बाजार का प्रमुख केंद्र बन गया है. इस साल अगस्त में एक बड़ी रक्षा कम्पनी ने मीडिया को जानकारी दी कि भारत विश्व के सर्वाधिक व्यापक औद्योगिक रक्षा नेटवर्क की धुरी बन गया है.

अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद भारत विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है और दुनिया भर के हथियार निर्माता भारत में अपना भविष्य देख रहे हैं. भारत की महत्वाकांक्षा है कि वह लड़ाकू विमानों की 45 स्काड्रन तैयार करे.

2010 में भारत ने एक ही झटके में अपनी सारी आवश्यकताएं पूरी करने की सोची और एक ही विक्रेता फ्रांसीसी फर्म दासौल्त से 11 खरब डॉलर में 126 मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदे. इसके सारे विमान तमाम हथियार कंपनियों के विमानों के बीच अव्वल साबित हुए.

हालांकि यह सौदा विफल रहा और इसे फिर से संशोधित करना पड़ा. अब भारत केवल 36 जेट खरीदने पर विचार कर रहा है. फिलहाल इसकी कीमतों पर बातचीत चल रही है.

सवाल यह उठता है कि शेष 90 विमानों का नुकसान कौन भरेगा.

इस बीच, भारत और फ्रांस के बीच जब तक इन 36 विमानों की खरीद पर बातचीत चल रही है, दुनिया के दूसरे देशों के एयरक्राफ्ट निर्माता मोदी सरकार से सम्पर्क साधे हुए हैं और उन्हें आकर्षक ऑफर दे रहे हैं.

ये सारे हथियार निर्माता मोदी की प्रिय योजना मेक इन इंडिया के तहत ये ऑफर दे रहे हैं और न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए.

अमेरिका स्थित एफ-16 लड़ाकू विमान और बोइंग निर्माता कम्पनी लॉकहीड मार्टिन जो कि एफ-18 दोहरे इंजन वाला लड़ाकू विमान बनाती है. वह भी अपना लड़ाकू जहाज भारत को बेचने की कोशिशें कर रही है. लॉकहीड मार्टिन ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि अगर उसे ऑर्डर मिलने की गारंटी दी जाए तो वह एफ-16 विमानों की पूरी खेप टैक्सस से भारत ले आएगी.

पिछले एक दशक (खास तौर पर 2010) से भारत हथियारों के वैश्विक बाजार का प्रमुख केंद्र बन गया है.

बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के प्रतिनिधि साल के शुरू से ही बहुत ही सक्रियता से अपना पक्ष रख रहे हैं और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अब तक कई प्रेजेंटेशन दे चुके हैं. ताजा जानकारी के अनुसार, पेंटागन ने भी लॉकहीड मार्टिन का समर्थन किया है.

अमेरिकी लड़ाकू विमानों का सौदा कितना लाभ का है?

अमेरिकी लड़ाकू विमान कम कीमत में अच्छा सौदा है. एफ-16 के एकल इंजन लड़ाकू विमान औतन 700 करोड़ डॉलर में बेचे जा रहे हैं और एफ-18 के डबल इंजन लड़ाकू विमान औसतन 1,000 करोड़ रूपए प्रति विमान के रेट पर ब्रिक्री के लिए उपलब्ध हैं.

लॉकहीड मार्टिन ने अब तक 27 अंतरराष्ट्रीय वायु सेनाओं को करीब साढ़े चार हजार एफ-16 लड़ाकू विमान बेचे हैं. इसके उपभोक्ताओं में पाकिस्तान भी एक है. पाक को इसने 80 एफ-16 विमान बेचे हैं. पाक को इसका एफ-16 ब्लॉक 52 वर्जन बेचा गया है. ब्लॉक नंबर जितना बड़ा होता है, लड़ाकू विमान उतना ही उन्नत और अत्याधुनिक होता है.

लॉकहीड मार्टिन जो लड़ाकू विमान भारत को बेचना चाह रही है, उसका ब्लॉक नम्बर 70 की श्रृंखला का है. इन विमानों में कथित तौर पर सुपीरियर राडार, अत्याधुनिक वायुयान उपकरण और सेंसर लगे होते हैं.

लॉकहीड मार्टिन का इन लड़ाकू विमानों की एसेम्बली लाइन ही भारत लाने का प्रस्ताव भारत सरकार को लुभा सकता है. इसके भारत आने से यहां रोजगार सृजन की संभावनाएं पैदा होंगी, क्योंकि ऐसेम्बली लाइन भारत ही नही दुनिया भर के लिए विमान आपूर्ति के ऑर्डर लेगी. 

भारत भी इस अमेरिका निर्मित हथियारों की खेप को खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है और पूर्व में अभी कुछ माह पहले तक भारत और अमेरिका के रक्षा कूटनीतिज्ञों और मंत्रियों के बीच परस्पर आदान-प्रदान होता आया है.

अमेरिकी उप रक्षा सचिव (अधिग्रहण) फ्रैंक केंडल इसी साल जुलाई में भारत आए थे. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच निगरानी लड़ाकू विमान का बड़ा अनुबंध साइन किया गया.

लॉकहीड मार्टिन का इन लड़ाकू विमानों की एसेम्बली लाइन ही भारत लाने का प्रस्ताव भारत सरकार को लुभा सकता है.

अब अपने तीन दिन के अमेरिकी दौरे में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर अमेरिकी रक्षा सचिव एश्टन कार्टर से मिले. इस मुलाकात में एक सामरिक समझाौते पर हस्ताक्षर हुए.

साथ ही उन्होंने वहां फिलेडेल्फिया में बोइंग अपाचे व चीनुक हेलीकॉप्टर फैक्ट्री भी देखी. भारतीय वायु सेना नए विकसित केसी-46 रणनीतिक टैंकर की खरीद पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह टैंकर भारतीय मिड-एयर रीफ्यूूलिंग टैंकर बेड़े में शामिल किया जाएगा.

परन्तु अमेरिकी फर्म- बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के अलावा लगता है भारत ने स्वीडन की साब के साथ डील करने से इनकार कर दिया है. यूरोपफाइटर टाईफून कंसोर्शियम भी कथित तौर पर फाइटर विमान सौदे के लिए भारत से बात करेगी.

भारत चाहे जिस कम्पनी के साथ सौदा फाइनल करे, उसे खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू करनी पड़ेगी. 2010 में भारत द्वारा बल्क में 126 लड़ाकू विमानों का सौदा इसलिए किया गया था क्योंकि चीन व पाकिस्तान से संयुक्त रूप से खतरे की आशंका थी. दोनों ही देश अपनी वायुसेना की क्षमताओं में तेजी से इजाफा कर रहे हैं.

पिछले 50 सालों से भारतीय वायु सेना में रूसी विमान मिग-21 हैं. अब उनमें से कई की क्षमताएं कम हो चुकी हैं, इसलिए उनकी तैनाती 33 स्क्वाड्रन तक सीमित कर दी गई है. प्रत्येक में 18 से 20 लड़ाकू विमान तैनात हैं. अब भारत ने पाक और चीन को टक्कर देने के लिए 45 स्क्वाड्रन में लड़ाकू विमानों को शामिल करने का निर्णय किया है.

भारतीय वायुसेना को देश में ही निर्मित हल्के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में इस साल दो तेजस मिलेंगे और साल के अंत तक आठ उन्नत वायुयान मिलेंगे. इसके अलावा वायुसेना में मौजूदा सुखोई 30 एमकेआई तो हैं ही.

अतः लॉकहीड मार्टिन जैसी कम्पनियां जानती हैं कि भारत में उनके सामान की जल्द खपत होगी, जो कि इन कंपनियों की आवश्यकता है. 

इसलिए भारत के पास अपनी वायुसेना की घटती क्षमताओं को नियंत्रित करने का एक मात्र तरीका यही है कि वह अगले साल तक अपनी लड़ाकू विमान आवश्यकताओं को पूरा करनेे के लिए इन लड़ाकू विमानों की सीधी और तुरंत खरीद करे.

First published: 8 September 2016, 7:45 IST
 
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