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5वीं बार फटा देश का सबसे ऊंचा तिरंगा, रफू करके फिर से फहरा दिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2017, 15:47 IST
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मंगलवार को तेज हवाओं के चलने से अटारी बार्डर पर लगा 350 फीट ऊंचा तिरंगा झंडा तार से फट गया है. जानकारी के मुताबिक तेज हवा के चलने से पोल के साथ लगी लोहे की तार टूटने के कारण झंडा जमीन पर गिर गया. यह घटना दोपहर उस समय हुई जब देश-विदेश से सैलानी अटारी बार्डर पर रिट्रीट सेरेमनी देखने के लिए पहुंचने शुरू हो गए थे.

खबरों के मुताबिक जब यह राष्ट्रीय ध्वज चौथी बार फटा था, तब रफू कर उसे दोबारा फहरा दिया गया. इसके बाद सोमवार को तेज हवा और रात में बारिश के कारण यह एक बार फिर फट गया इसके बावजूद उसे उतारा नहीं जा सका. यह तिरंगा बीते 5 मार्च को तत्कालीन निकाय मंत्री अनिल जोशी ने फहराया था. अब इस तिरंगे को लेकर सियासत तेज हो गई है. कानून के जानकार कह रहे हैं कि जिन अधिकारियों को तिरंगे की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई है या जिस कंपनी ने तिरंगा फहराने का ठेका ले रखा था, उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में केस दर्ज हो सकता है. 

नगर सुधार ट्रस्ट के पूर्व चैयरमैन सुरेश महाजन ने कहा कि रफू किया गया तिरंगा फहराना वैसे ही कानूनन अपराध है. तिरंगा फहराने से लेकर टेंडर तक की जांच के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है.

कैसे बना था ये तिरंगा
सीमा पर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराने में 3.5 करोड़ की लागत आई थी, जिसमें 1.5 करोड़ की लागत से पोल को बनाया गया है. होशियारपुर की भारत कंपनी को इसका ठेका दिया गया था. राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए मुंबई से स्पेशल क्रेन मंगवाई गई थी.  

यह कहता है नियम
भारतीय ध्वज संहिता-2002 को 26 जनवरी 2002 से लागू किया गया. उसमें स्पष्ट लिखा गया है कि फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जा सकता. जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए. 

First published: 5 April 2017, 15:16 IST
 
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