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एक दिन में नहीं आता है 'जंगलराज'

अभिषेक पराशर | Updated on: 4 January 2016, 8:11 IST
QUICK PILL
  • बीएससी-सीएंडसी के वाइस प्रेसिडेंट अशोक कुमार के मुताबिक बिहार में इंजीनियरों की हत्या निश्चित तौर पर चिंता का विषय है लेकिन इसे \'जंगलराज की वापसी के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
  • 10 नवंबर को बिहार में दो बड़े एफडीआई निवेश हुए. मरौढ़ा में डीजल लोकोमोटिव फैक्ट्री बनाने के लिए अमेरिका की कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक्स (जीई) को 14,656 करोड़ रुपये का ठेका मिला जबकि मधेपुरा में फ्रांसीसी कंपनी अल्सटॉम ने 20,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है.

2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने बिहार में सरकार और शासन की मुस्तैदी का उल्लेख करते हुए कहा था कि 'वह दिन लद गए जब लोग बिहार में गाड़ियों के शीशे से बंदूक की नली बाहर निकालकर चला करते थे.' बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह उपलब्धि विवाद से परे हैं. जनता ने उनके बेहतर शासन के दावे और निवेशकों ने उनके वादे पर भरोसा जताया. 

राज्य में बदले हालात को निवेशकों और उद्योगजगत के भरोसे से भी समझा जा सकता है. आठ नवंबर को विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के 48 घंटे के भीतर बिहार में दो बड़े एफडीआई निवेश की घोषणा हुई. 

पटना से करीब 81 किलोमीटर दूर मरौढ़ा में डीजल लोकोमोटिव फैक्ट्री बनाने के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक्स (जीई) को 14,656 करोड़ रुपये का ठेका मिला जबकि मधेपुरा में फ्रांसीसी कंपनी अल्सटॉम ने इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की घोषणा की जिसकी लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है.

नीतीश कुमार ने 2015 का विधानसभा चुनाव लालू प्रसाद की आरजेडी के साथ मिलकर लड़ा था और आम जनता से लेकर कारोबारियों के बीच 'जंगलराज' की वापसी को लेकर कई तरह की आशंकाएं थीं. हालांकि जनता ने जबरदस्त जनादेश और निवेशकों ने बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा कर बिहार में 'जंगलराज' की वापसी की आशंकाओं को खारिज कर दिया. 

क्या लौट आया 'जंगलराज'

दिसंबर के आखिरी हफ्ते में बिहार के दरभंगा स्थित बहेड़ी में 750 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे स्टेट हाईवे-88 के निर्माण कार्य की निगरानी करने गए बीएससी-सीएंडसी कंपनी कंपनी के दो इंजीनियर ब्रजेश कुमार सिंह और मुकेश कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड के 72 घंटे के भीतर पटना से सटे वैशाली जिले में रिलायंस के एक इंजीनियर और भागलपुर में एनटीपीसी थाना क्षेत्र में एनटीपीसी के सुपरवाइजर नवल कुशवाहा की भी हत्या हो गई.

बिहार के लिए इस तरह की सुर्खियां करीब एक दशक पुरानी बात हो चुकी थी. लिहाजा इन हत्याओं ने राज्य और देश के सियासी गलियारों में 'फिर से जंगलराज' और 'लौट आए पुराने दिन' का शिगूफा जोर पकड़ने लगा है. 

बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी इसे पुराने दिनों की वापसी करार देते हुए कहते हैं, 'अपराध की बढ़ती घटनाओं से बिहार की छवि पूरे देश में और दुनिया में खराब हो रही है.' उन्होंने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह बताना चाहिए कि ऐसी स्थिति में बिहार का विकास कैसे होगा और निवेशक किस भरोसे पर राज्य में निवेश करेंगे?'

1990 के दशक में लालू प्रसाद के शासनकाल में बिहार में कानून-व्यवस्था की बुरी हालत बदतर हो गई थी. गुंडे और माफियाओं को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार का संरक्षण मिलने की बाते होती थीं. नए निवेश की बात तो दूर मौजूदा उद्योगपति भी बिहार से बाहर निकल गए थे या निकलने की ताक में थे.

आरजेडी के सरकार में होने के बावजूद बिहार का कॉरपोरेट जंगलराज की वापसी मानने को तैयार नहीं है

मोदी की आशंका लालू के 'जंगलराज' और बिहार की उद्योग विरोधी छवि के बनने को लेकर है. हालांकि जिस समय वह इस तरह की आशंका जता रहे थे वह दौर लालू के 'जंगलराज' और उसकी वापसी की आशंका से बहुत दूर निकल चुका दिखता है. मोदी की आशंका काफी हद तक उनके विपक्षी दल की मजबूरियों से प्रेरित दिखती हैं. सियासी बयानबाजियों से इतर हम ठोस तथ्यों के आधार पर जंगलराज वापसी की आशंका की पड़ताल करेंगे.

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राज्य में मौजूद कॉरपोरेट के मन में कुछ आशंकाएं हैं लेकिन वह इन कुछेक घटनाओं को 'जंगलराज' की वापसी के तौर पर देखने को तैयार नहीं है.

जिस कंपनी के इंजीनियरों की हत्या की गई उसने सुरक्षा का हवाला देते हुए फिलहाल काम करने से मना कर दिया है लेकिन उसकी योजना राज्य से बाहर जाने की बिलकुल भी नहीं है. बीएंडसी-सीएंडसी एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी है जो बिहार में पिछले 10 सालों से निर्माण कार्य में लगी हुई है. 

कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट अशोक कुमार बताते हैं, 'हम अभी तक बिहार में 14 परियोजनाओं को पूरा कर चुके हैं और 12 पर काम कर रहे हैं. इसमें से तीन परियोजनाएं बीओटी मोड की है और अगले 15 सालों तक हमारे पास इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी भी होगी.' 

कंपनी अभी तक बिहार में 5,200 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना को पूरा कर चुकी है और करीब 2,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम जारी है.

नीतीश कुमार के नेतृत्व और बिहार सरकार की उद्योग हितैषी नीतियों पर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है

कुमार के मन में नई सरकार की राजनीतिक बनावट को लेकर आशंकाएं हैं लेकिन वह इस एकमात्र घटना को बिहार में जंगलराज की वापसी के तौर पर नहीं देखते हैं. उन्होंने कहा, 'सुरक्षा हमारी चिंता है लेकिन हमें नीतीश कुमार के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है.' 

कंपनी दो और नए प्रोजेक्ट (850 करोड़ रुपये की लागत वाली बख्तिायरपुर से मोकामा और 476 करोड़ रुपये की लागत वाली जयनगर से नरहिया बाजार) के लिए बोली लगा चुकी है. 

यह कंपनी पिछले 10 सालों से बिहार में काम कर रही है और इस दौरान यह पहली बड़ी वारदात हुई है. अशोक बताते हैं कि 2005-06 में बिहार में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के सभी बड़े प्रोजेक्ट साइट और प्रोजेक्ट मैनेजरों को सुरक्षा दी गई थी. बाद में जब राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ तो विशेष तौर पर दी जाने वाली सुरक्षा को हटा लिया गया.

कंस्ट्रक्शन बिजनेस में रंगदारी की मांग आम बात है. इसे जंगलराज से जोड़कर नहीं देखा जा सकता

कंस्ट्रक्शन की एक दिग्गज कंपनी के अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, 'दक्षिण भारत में बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां स्थानीय स्तर पर इस तरह के दबंगों को पैसे देकर मैनेज करती है ताकि उनका काम निर्बाध चलता रहे. कंस्ट्रक्शन बिजनेस में यह बेहद आम बात है. ज्यादातर कंपनियां इसके लिए एक अनधिकारिक फंड रखती हैं.'

कुमार आगे बताते हैं, 'हम इसे जंगलराज तब मानेंगे जब गुंडों और माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण दिया जाना लगे.' जाहिर है कुमार के इस भरोसे के पीछे नीतीश कुमार हैं. उन्होंने दोनों इंजीनियरों की हत्या की घटना को जिस तरह चुनौती के रूप में लिया और अधिकारियों को फटकार लगाई उससे उद्योग जगत का भरोसा कम होने की बजाय और बढ़ा है.

2002 में बिहार छोड़कर दिल्ली आ गए युवा बिजनेसमैन और बांका सिल्क के संस्थापक उदयन सिंह 2012 में बहुत सोच समझ कर वापस बिहार लौटे थे. वहां उन्होंने बांका सिल्क की स्थापना की जो आज बिहार के युवा उद्यमियों और एंटरप्रेन्योर की प्रेरणा है. उदयन कहते हैं, 'नीतीश कुमार के भरोसे पर लोगों ने बिहार में निवेश किया है. दरभंगा की घटना से भय तो पैदा हुआ है. लेकिन अभी समय है चीजों को काबू में करने का. हमें नीतीश कुमार की नीयत पर कोई शक नहीं है.'  

छवि को लेकर सरकार सतर्क

बिहार के विकास में कंस्ट्रक्शन सेक्टर की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2005-06 से 2009-10 के बीच जिन क्षेत्रों ने रिकॉर्ड 15 फीसदी की वृद्धि दर हासिल की थी उनमें कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी शामिल था. 2005-06 से 2009-10 के बीच बिहार में जहां मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ रेट 45.4 फीसदी रही वहीं कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की वृद्धि दर 19.8 फीसदी रही.

चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार ने सबसे पहले राज्य में कानून और व्यवस्था की हालत को लेकर समीक्षा बैठक की थी. उन्होंने साफ-साफ कहा था, 'माहौल खराब करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा.' और जब दरभंगा में इंजीनियरों की हत्या के बाद 'माहौल खराब' हुआ तो उन्हें राज्य के पुलिस अधिकारियों को सीधे धमका दिया. इससे सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट हो गईं हैं.

आरजेडी के सत्ता में होने से 'पुराने दिनों की वापसी' की आशंका को भी सरकार ने राजनीतिक तरीके से दूर करने की कोशिश की. हत्याकांड के एक दिन बाद ही लालू प्रसाद ने बयान जारी कर उन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की जिसका उन पर आरोप लगता रहा है. प्रसाद ने कहा, 'राज्य सरकार अपराध के खिलाफ कमर कस चुकी है और सूबे में किसी को डरने की जरूरत नहीं है.' उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के शासन में कानून का राज कायम रहेगा.

सामान्य अपराध या 'जंगलराज'

आईबी में काम कर चुके और पटना में प्राइवेट सिक्योरिटी के बिजनेस से जुड़े प्रभात सिंह बताते हैं कि आरजेडी और जेडीयू गठबंधन की सरकार आने के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि निजी कारोबारियों की तरफ से प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की मांग में बढ़ोतरी होगी. लेकिन असल में पिछले डेढ़ महीने में उनके व्यापार में इस तरह की कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है.

आम तौर पर बड़े कारोबारी कानून और व्यवस्था की खराब हालत में निजी सुरक्षा कंपनियों पर भरोसा जताते हैं. सिंह बताते हैं, 'आप कह सकते हैं कि हमारे धंधे का सीधा संबंध जंगलराज से है और इसमें जिस तरह का ठहराव है उससे नहीं लगता कि बिहार में जंगलराज की वापसी हो रही है.' 

एक और बड़ा बदलाव लालू यादव के लिहाज से है. इस बार वे भी अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क हैं. सिंह बताते हैं कि लालू के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'जंगलराज और विकास विरोधी' नेता की छवि तोड़ने की है. यही वजह रही है कि लालू प्रसाद ने बिना देर किए बयान देकर अपनी स्थिति साफ कर दी.

देश में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही बिहार की जीएसडीपी 2014-15 में 66.4 अरब डॉलर से अधिक रही

सिंह कहते हैं, 'बिहार जंगलराज की वापसी जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित नहीं है बल्कि अब उसकी चिंता पहले से चल रहे विकास को अगले चरण में पहुंचाने की है.'

चलता रहेगा विकास

जेडीयू के साथ आरजेडी के सत्ता में आने के तुरंत बाद ही करीब 35,000 करोड़ रुपये के एफडीआई निवेश की घोषणा हुई थी. बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रामलाल खेतान बताते हैं कि नीतीश कुमार पर निवेशकों का भरोसा बरकरार है. उन्होंने कहा, 'राज्य में बिजनेस का माहौल है. अपराध की घटनाओं से आशंका तो होती है लेकिन यह इस तरह का अपराध है जिससे हर राज्य को निपटना पड़ता है.' 

राज्य में होने वाले संभावित निवेश पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर खेतान ने कहा, 'निवेशकों के मन में पूंजी की सुरक्षा और बिजनेस माहौल को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है.' 

2010-11 से 2013-14 के बीच पर्यटन से जुड़े होटल और रेस्टोरेंट कारोबार 17.3 फीसदी की शानदार वृद्धि दर से आगे बढ़े

अपराध और कानून व्यवस्था की खराब हालत का सीधा असर बाहर से आने वाले पर्यटकों पर पड़ता है. बिहार की अर्थव्यवस्था भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. 2014-15 में बिहार की जीएसडीपी 66.4 अरब डॉलर से अधिक रही. 

विकास के विकेंद्रीकरण से हो रहे फायदों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2009-10 में बिहार में प्रति व्यक्ति आय 10,635 रुपये थी जो भारत के प्रति व्यक्ति आय (33,901 रुपये) का करीब एक तिहाई था. 2013-14 में बिहार में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 15,650 रुपये हो चुकी है.

पर्यटन उद्योग का सीधा संबंध कानून-व्यवस्था की छवि से जुड़ा होता है. बिहार में 2010-11 से 2013-14 के बीच पर्यटन से जुड़े होटल और रेस्टोरेंट कारोबार में 17.3 फीसदी की शानदार वृद्धि दर से आगे बढ़ी. 2010-11 के 1.65 करोड़ घरेलू पर्यटकों के मुकाबले 2014-15 में बिहार में घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़कर 2.33 करोड़ हो गई.

राज्य में बिजनेस और निवेश की राह आसान करने के लिए सरकार ने 'आओ बिहार' की नीति को आगे बढ़ाया है ताकि लोगों को उनकी मर्जी से उद्योगों के लिए जमीन देने की दिशा में प्रेरित किया जा सके. बियाडा के अधिकारी बताते हैं, 'बिहार जैसे राज्य में जमीन से जुड़े विवादों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पुलिस और संबंधित विभाग को इस तरह के मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश दे रखा है.'

2009-10 के 10,635 रुपये के मुकाबले 2013-14 में बिहार में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 15,650 रुपये हो चुकी है

कानून और व्यवस्था का मामला बहुत संवेदनशील होता है और मौजूदा सरकार को इससे होने वाली राजनीतिक हानि का अंदाजा है. इसके अलावा उन पर जबरदस्त जनादेश से उपजा भारी दबाव भी है जिसे नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद निजी तौर पर जाहिर भी कर चुके हैं. 

कुमार बताते हैं, 'जंगलराज सुनने में अच्छा लगता है लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है. मौजूदा सरकार ने जिस तरह से इस एक आपराधिक मामले को चुनौती के रूप में लिया है वह यह बताने के लिए काफी है कि बिहार जिस आशंका में जी रहा है उसकी चिंता जनता से कहीं ज्यादा सरकार को है. कॉरपोरेट के बीच सरकार यह संदेश देने में सफल रही है कि माफियाओं और गुंडों को किसी तरह का राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा.'

First published: 4 January 2016, 8:11 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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