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मोदी के अमेरिका दौरे में भारत बन सकता है एमटीसीआर का सदस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 June 2016, 12:10 IST

छह देशों के दौरे पर निकले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल रात अमेरिका पहुंचे. पीएम बनने के बाद ये उनका चौथा अमेरिका दौरा है. संभव है कि पीएम मोदी के इस दौरे में भारत को मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजिम (एमटीसीआर) का सदस्य घोषित कर दिया जाए.

अमेरिका साल 2008 से ही भारत को एमटीसीआर में शामिल करने की कोशिश कर रहा है. इटली भारत की सदस्यता का विरोध करता रहा है.

हालांकि इटली के नौसैनिकों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रियायत देने के बाद इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि अब इटली का रुख नरम होगा.

भारत की बढ़ी साख

मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत ने परमाणु समझौते और नॉन-प्रॉलिफेरेशन ट्रीटी पर दस्तखत किए थे. 

भारत ने हाल ही में हेग कोड ऑफ कंडक्ट पर भी हस्ताक्षर किया. ये एक स्वैच्छिक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोलिफेरैशन समझौता है, जिससे अतंरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की साख बढ़ी है. 

भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, "भारत का इससे जुड़ना वैश्वि नॉन-प्रोलिफेरैशन के उद्देश्य मजबूत होते हैं."

एमटीसीआर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इस उसका मकसद परमाणु हथियारों की होड़ पर लगाम लगाना है.

 एमटीसीआर व्यापक विनाश के हथियारों (डब्ल्यूएमडी) से जुड़े उपकरण और तकनीकी के निर्यात पर भी नियंत्रण लगाता है. 

तकनीकी पाना होगा आसान

अभी दुनिया के 34 देश एमटीसीआर के सदस्य हैं. ये सभी देश प्रमुख मिसाइल निर्माता देश हैं.

एमटीसीआर का सदस्य न होने के नाते भारत की मिसाइल तकनीकी तक सीमित पहुंच है. एमटीसीआर का सदस्य होने के बाद भारत पर लगा अंकुश हट जाएगा.

एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद भारत के लिए अमेरिका से ड्रोन तकनीकी पाना भी सुलभ हो सकेगा. साथ ही भारत मिसाइल तकनीकी का निर्यात भी कर सकेगा.

एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद भारत के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने में मदद मिलेगी. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पहले ही भारत की इन समूहों में सदस्य बनने का समर्थन किया है.

पीएम मोदी जिन छह देशों के दौर पर हैं उनमें से स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको एनएसजी के सदस्य हैं.

चीन सबसे बड़ा रोड़

भारत के एनएसजी का सदस्य बनने की राह में सबसे बडा रोड़ा चीन है. 

9 और 10 जून को एनएसजी समूह की विएना में बैठक होने वाली है. इस बैठक में भारत की सदस्यता की संभावना पर विचार होगा.

भारत ने अभी न्यूक्लियर नॉन-प्रॉलिफेरेशन ट्रीटी पर दस्तखत नहीं किया है. इस बैठक में इसपर चर्चा होगी. 

चीन कहता रहा है कि भारत को एनएसजी में शामिल करने के लिए विशेष छूट नहीं दी जानी चाहिए, ये छूट पाकिस्तान को भी देनी चाहिए. 

जबकि परमाणु तकनीकी देने के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड काफी खराब रहा है. हाल ही में पाकिस्तान की लीबिया को परमाणु तकनीकी देने के लिए काफी आलोचना हई.

कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार परमाणु तकनीकी के मामले में चीन का रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा नहीं रहा है. ये एक खुला राज है कि चीन पाकिस्तान की परमाणु तकनीकी से जुड़ी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करता रहा है.

First published: 7 June 2016, 12:10 IST
 
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