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भारत का वह डोजियर जिसने मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने पर UN को किया मजबूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 May 2019, 11:36 IST

जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है. मसूद अज़हर 20 साल से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल बना हुआ था. 1999 के IC-814 अपहरण से लेकर 2001 के संसद हमले और 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले से लेकर 2019 पुलवामा हमले तक मसूद अजहर का नाम उन सबसे बड़े आतंकी हमलों में आया जो भारत ने पिछले दो दशकों में झेले. 1 अक्टूबर 2001 को भारतीय हिरासत से रिहा होने के वह तुरंत बाद उसने पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद स्थापित किया. इसके बाद मसूद अजहर ने कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रची.

इन हमलों में आया नाम

मसूद अज़हर ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर एक वाहन-जनित आत्मघाती हमला करवाया, जिसमें 38 लोग मारे गए थे. मसूद अज़हर ने इसके बाद एक और बड़े हमले को अंजाम दिया, जब उस साल दिसंबर में जेईएम के आतंकवादियों ने भारत के संसद परिसर में हमला किया. चार जेएम बंदूकधारियों ने गृह मंत्रालय और संसद लेबल ले जाने वाली कार में संसद के परिसर में प्रवेश किया और अंधाधुंध गोलियां चलाई. उस वक़्त सौ से अधिक नेता संसद के अंदर मौजूद थे.

आतंकियों ने मारे जाने से पहले सात सुरक्षाकर्मियों और एक माली की हत्या कर दी. संसद हमले को लेकर अपनी भूमिका के लिए पाकिस्तान ने अजहर को गिरफ्तार किया लेकिन अपर्याप्त सबूतों के कारण उसे एक साल बाद रिहा कर दिया गया. 2002 में JeM को एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया था, जिसके बाद जैश ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की हत्या की भी कोशिश भी की. 

जैश के संबंध शुरुआत से पाक सरकार से से कुछ खास अच्छे नहीं रहे. यही कारण था कि बीच में कश्मीर में जेएमएम की गतिविधियों में लंबे समय तक गिरावट आई और वह लगभग एक दशक तक किसी बड़े हमले से जुड़ा नहीं था. लेकिन संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद JeM फिर से सक्रिय हो गया.

मसूद अज़हर ने अजहर ने एक 'अफ़ज़ल गुरु शहीद दस्ते' का गठन किया, जिसने 2014-15 में कठुआ, सांबा, जम्मू, श्रीनगर और पुलवामा में कई हमलों को अंजाम दिया. प्रत्येक हमले के बाद आतंकी खुद को अफजल गुरु दस्ते का सदस्य घोषित कर एक नोट छोड़ देते थे. तब से जेएम के आतंकियों ने एक के बाद एक हमले किए, जिनमें 2016 में पठानकोट, उसी साल नगरोटा और उरी सेना के शिविर, 2018 में सुंजुवान सेना शिविर और 14 फरवरी 2019 का पुलवामा हमला शामिल है.

क्या था यूएन को दिए भारतीय डोजियर में ?

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अजहर दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक है. वह पूरी तरह से पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की जासूसी एजेंसी पर निर्भर नहीं है, बल्कि तालिबान और अल-कायदा के साथ उसके संबंध हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अजहर पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले डोजियर में भारत ने उसे एक पाकिस्तान स्थित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद का नेता, प्रमुख फाइनेंसर, रिक्रूटर के रूप में वर्णित किया था. इसमें कहा गया था कि मसूद अजहर का संबंध इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा से भी हैं.

मसूद अजहर पहली बार 1993 में भारतीय खुफिया एजेंसियों के रडार पर आया था, जब उसका नाम अल-इतिहाद अल-इस्लामिया के साथ जुड़ा हुआ था, अल-कायदा ने सोमाली आतंकी समूह को संभाला जो हर्कत-उल से पैसा और रंगरूटों की तलाश कर रहा था. मुजाहिदीन (हूएम) अजहर ने उस समय सोमालिया का दौरा किया था और यमनी भाड़े के सैनिकों की भर्ती की सुविधा दी. उन्हें जल्द ही भारतीय एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया, जब उन्होंने आतंकवादी गतिविधियों के लिए कश्मीर का दौरा किया था.

खुफिया एजेंसियों के अनुसार उसके परिवार के 18 सदस्य JeM के सदस्य हैं. कंधार अपहरण से शुरू, जहां उसके बड़े भाई इब्राहिम अतहर, बहनोई यूसुफ अजहर और छोटे भाई अब्दुल रऊफ असगर ने साजिश की योजना बनाई, अजहर ने अपने परिवार के सदस्यों को कई जेएमएम हमलों में शामिल किया. आईबी डोजियर के अनुसार 2007 के बाद असगर संचालन और जेएम के खुफिया समन्वयक का प्रमुख रहा. डोजियर में कहा गया था कि मसूद के परिवार की दूसरी पीढ़ी भी जेएमएम में शामिल हो गई है.

मसूद अज़हर का पूरा खानदान जैश का हिस्सा

जैश के लिए काम करने वाले उसके रिश्तेदारों में मोहम्मद ताहिर (बड़े भाई और वरिष्ठ अधिकारी), इब्राहिम अजहर (अफगानिस्तान में बड़े भाई और परिचालन कमांडर), अब्दुल रऊफ असगर (जेएम के छोटे भाई और डी-फैक्टो प्रमुख) हैं. तल्हा सैफ (छोटे भाई और JeM के प्रकाशनों के प्रमुख और उसके छात्रों के विंग), यूसुफ अज़हर (बालाकोट प्रशिक्षण सुविधा के प्रमुख ), अब्दुल राशिद (बहनोई और बहवलपुर में प्रशासन और प्रशिक्षण के प्रमुख) ), मंसूर अहमद (बहनोई और रक्षा विंग के प्रभारी), अब्दुल्ला , बेटा (अफगानिस्तान और कश्मीर में संचालन में शामिल ), वलीउल्लाह (आतंकी प्रशिक्षण ले रहा बेटा), उस्मान हैदर और मोहम्मद उमर (इब्राहिम के बेटे) अजहरपिछले साल कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था और तलहा रशीद (बहनोई) 2017 में कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा मारा गया.

डोजियर के अनुसार हाल के वर्षों में पाकिस्तान में अपने केंद्रों पर जैश द्वारा आयोजित बुनियादी ट्रेनिंग पाठ्यक्रमों, धार्मिक कार्यक्रमों और जिहादी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है." डोजियर कहता है कि अजहर JeM द्वारा स्विमिंग कोर्स प्रोजेक्ट का प्रमुख भी है.

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First published: 2 May 2019, 11:12 IST
 
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