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बीजेपी की कमायी 44.02 % और बीएसपी की 67.31 % बढ़ी

आकाश बिष्ट | Updated on: 21 April 2016, 12:03 IST
QUICK PILL
  • एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वाच (एनईडब्ल्यू) ने विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के आय-व्यय के ब्योरे का विश्लेषण किया है.
  • इस रिपोर्ट के अनुसार सीपीआई को छोड़कर सभी राजनीतिक पार्टियों की आय बढ़ी है. कांग्रेस ने अभी तक नहीं दिया है आय-व्यय ब्योरा.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वाच (एनईडब्ल्यू) द्वारा भारत की राष्ट्रीय पार्टियों के आय और खर्च पर आधारित रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.

इस रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2013-14 से 2014-15 के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की आय में जबरदस्त इजाफा हुआ है.

इस दौरान बीजेपी की आय में 44.02 प्रतिशत (296.62 करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी हुई. वहीं बीएसपी की आय में 67.31 प्रतिशत (45.04 करोड़ रुपये) बढ़ोतरी हुई.

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बीजेपी ने विज्ञापन और प्रचार में 471 करोड़ (कुल आय का 51.69 प्रतिशत) रुपये खर्च किया जिसमें 209.57 करोड़ रुपये (22.95 प्रतिशत) यात्रा पर खर्च किए गए. बीएसपी को 92.80 करोड़ रुपये दान के रूप में मिले यानी उसकी सारी आय अज्ञात स्रोतों से हुई.

प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ही ऐसी पार्टी जिसकी आमदनी में इस दौरान कमी आयी है. वहीं कांग्रेस ने अभी तक अपना आईटी (आयकर) रिटर्न्स दाखिल नहीं किया है.

वित्त वर्ष 2014-15 में बीजेपी की आय 970.43 करोड़ रुपये रही. कांग्रेस ने अब तक नहीं दिया है ब्योरा

जब से भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने राजनीतिक पार्टियों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट का ब्योरा वित्त वर्ष 2013-14 से 2014-15 के बीच देना जरूरी किया है विभिन्न पार्टियों के आय और व्यय से जुड़ी हैरान करने वाली जानकारियां सामने आने लगी हैं. ईसीआई ने साल 2014 में सभी पार्टियों के लिए आयोग में ऑडिट रिपोर्ट जमा करने का नियम बनाया था.

उसके बाद से ही एडीआर-एनईडब्ल्यू विभिन्न पार्टियों की सालाना ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण पेश कर रहे हैं. एडीआर-एनईडब्ल्यू ने अपनी पहली रिपोर्ट 2015 में जारी की थी.

विभिन्न पार्टियों की आमदनी और खर्च से जुड़े कुछ तथ्य-

बीजेपी


वित्त वर्ष 2013-14 से 2014-15 के बीच बीजेपी की आय में 44.02 प्रतिशत (296.62 करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी हुई. सभी पार्टियों में सबसे ज्यादा आमदनी बीजेपी की रही. वित्त वर्ष 2013-14 में बीजेपी की आय 673.81 करोड़ रुपये थी. वित्त वर्ष 2014-15 में पार्टी की आय 970.43 करोड़ रुपये हो गयी. पिछले वित्त वर्ष में सभी राजनीतिक पार्टियों की कुल आय का 76.06 प्रतिशत बीजेपी के खाते में गया.

बीजेपी द्वारा दिए गए ब्योरे के अनुसार उसे 940.39 करोड़ रुपये दान के रूप में मिले थे. पार्टी के दान देने वालों में 50 फीसदी लोगों ने 20 हजार रुपये से अधिक का दान दिया. ऐसे दानदाताओं से पार्टी को 437.35 करोड़ रुपये मिले. हालांकि पार्टी ने इन दानदाताओं के बारे में जानकारी नहीं दी है. इस मामले में भी बीजेपी सभी पार्टियों से काफी आगे है.

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बीजेपी को 505.26 करोड़ रुपये ऐसे दानदाताओं से मिले जिन्होंने 20 हजार से कम राशि दान में दी. पार्टी को ये आय अज्ञात स्रोतों से हुई. पार्टी ने इस आमदनी की जानकारी अपने आईटी रिटर्न्स में दी लेकिन आय का स्रोत नहीं बताया है.

बीजेपी ने विज्ञान और प्रचार में 471 करोड़(कुल आय का 51.69 प्रतिशत) रुपये खर्च किया जिसमें 209.57 करोड़ रुपये(22.95 प्रतिशत) यात्रा पर खर्च किए गए.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया(मार्क्सवादी)


वित्त वर्ष 2013-14 से 2014-15 के बीच सीपीएम की आय में केवल 2.05 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ. ये राशि सभी राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का 9.71 प्रतिशत हुई.

सीपीएम को वित्त वर्ष 2014-15 में 123.92 करोड़ रुपये दान में मिले. आय के मामले में पार्टी सभी राष्ट्रीय पार्टियों में दूसरे स्थान पर रही. सीपीएम द्वारा दिए गए ब्योरे के अनुसार उसे इसमें से 59.27 करोड़ रुपये स्वैच्छिक दान के रूप में मिले हैं. इस राशि में से केवल 3.419 करोड़ रुपये(6 प्रतिशत) के स्रोत के बारे में पार्टी ने जानकारी दी है.

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पार्टी को 60 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोतों से मिले हैं. इस राशि में स्वैच्छिक और मिश्रित योगदान भी शामिल है. सीपीएम को 15.58 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में मिले.

सीपीएम सबसे अधिक खर्च कर्मचारियों की तनख्वाह (24.23 प्रतिशत) पर करती है. इसके बाद पार्टी के चुनावी खर्च (21.67 प्रतिशत) का नंबर है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी)


एनसीपी ने आय-व्यय का ब्योरा देेने की अंतिम तारीख के 63 दिन बाद दो फरवरी को अपनी ऑडिट रिपोर्ट सौंपी.

पार्टी को वित्त वर्ष 2014-15 में कुल 67.64 करोड़ रुपये की आमदनी हुई यानी उसकी आय पिछले साल की तुलना में 12.22 करोड़ रुपये बढ़ी.

सीपीआई देश की एकमात्र पार्टी है जिसकी आय कम हुई. वहीं अज्ञात स्रोत से आय के मामले में भी वो सबसे नीचे है

एनसीपी एक मात्र राजनीतिक पार्टी है जिसने अपनी आय में कूपन बेचने से हुई आय का जिक्र किया है. पार्टी के अनुसार उसने 27.16 करोड़ रुपये कूपन बेचकर कमाए. पार्टी को 27.18 करोड़ रुपये की आय अज्ञात स्रोतों से हुई.

एनसीपी ने सबसे अधिक खर्च (67.70 करोड़ रुपये) चुनाव पर किया. उसके बाद 13.36 करोड़ रुपये प्रशासनिक और सामान्य व्यय में खर्च किए गए.

बीएसपी


बीएसपी की आय में 67.31 प्रतिशत (45.04 करोड़ रुपये) बढ़ोतरी हुई. पार्टी को वित्त वर्ष 2014-15 में कुल 111.95 करोड़ रुपये की आय हुई. जबकि इससे पहले के वित्त वर्ष 2013-14 में उसकी कमायी 66.91 करोड़ रुपये थी.

बीएसपी को 92.80 करोड़ रुपये दान के रूप में मिले. दान द्वारा आय के मामले में बीएसपी दूसरे नंबर पर रही.

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बीएसपी द्वारा दिए गए ब्योरे के अनुसार उसे किसी भी दानदाता ने 20 हजार रुपये से ऊपर की राशि दान में नहीं दी है. यानी पार्टी की पूरी आय अज्ञात स्रोतों से हुई है.

बीएसपी को 7.688 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में मिले और उसने चुनाव पर 31.04 करोड़ रुपये(82.88 प्रतिशत) खर्च किया.

सीपीआई


सीपीआई एक मात्र राष्ट्रीय पार्टी जिसकी आय इस दौरान कम हुई है. पार्टी की आय वित्त वर्ष 2013-14 में 2.43 रुपये थी. वित्त वर्ष 2014-15 में उसकी आय घटकर 1.84 करोड़ रुपये हो गयी. पार्टी की आय में 24.28 प्रतिशत (59 लाख रुपये) की कमी आयी.


सीपीआई को 72 लाख रुपये दान के रूप में मिले. वहीं उसे 1.33 करोड़ रुपये ऐसे दाताओं से मिले जिनका योगदान 20 हजार रुपये से ज्यादा था. अज्ञात स्रोतों से पार्टी को महज 30 हजार रुपये की आमदनी हुई.
   
सीपीआई ने अपनी आय का 40.93 प्रतिशत चुनाव और प्रचार पर खर्च किया. इसके बाद 16.74 प्रतिशत राशि तनख्वाह और भत्तों पर खर्च की गयी.

इंडियन नेशनल कांग्रेस


वित्त वर्ष 2013-14 में कांग्रेस की आय 598.06 करोड़ रुपये थी. साल 2014-15 के आय-व्यय का ब्योरा देने की तारीख के 141 दिनों बाद भी कांग्रेस ने आयोग को अपनी ऑडिट रिपोर्ट नहीं सौंपी है.

First published: 21 April 2016, 12:03 IST
 
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