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50 लाख पेड़ लगाने वाले वृक्षमानव VD सकलानी की अजब कहानी, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 January 2019, 17:14 IST

देश में 50 लाख पेड़ लगाकर मशहूर होने वाले वृक्षमानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी का 96 साल की उम्र में निधन हो गया. उनको राजकीय सम्मान के साथ ऋषिकेश के श्मशान घाट में मुखाग्नि दी गयी. उन्होंने 50 लाख से अधिक पेड़ लगाकर अपना पूरा जीवन प्रकृति को समर्पित कर दिया था.

विशेश्वर दत्त सकलानी का जन्म दो जून 1922 को सकलाना पट्टी के पुजार गांव में हुआ था. वह बचपन से ही बाप-दादा की पर्यावरण संरक्षण की कहानियां सुनकर प्रेरित होते थे. इन कहानियों का उन पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उन्होंने आठ साल की छोटी सी उम्र से पेड़ लगाने शुरू कर दिए.

सकलानी ने स्वतंत्रता की लड़ाई में भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया और देश की आजादी की खातिर उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा. उन्होंने बांज, बुरांश, सेमल, देवदार का घना जंगल तैयार कर सकलाना क्षेत्र के बंजर इलाके की तस्वीर बदल दी. इस कारण आज भी क्षेत्र में प्राकृतिक जल धाराएं ग्रामीणों की प्यास बुझा रही हैं.

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छह-सात दशक पहले यह पूरा इलाका वृक्ष विहीन था. धीरे-धीरे उन्होंने बांज, बुरांश, सेमल, भीमल और देवदार के पौधे लगाना शुरू किए और इसके बाद पुजार गांव में बांज, बुरांश का मिश्रित सघन जंगल खड़ा हो गया. ये जंगल आज भी उनके परिश्रम की कहानी को बयां कर रहे हैं.

 

विशेश्वर दत्त सकलानी को 19 नवंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया था. उनका सपना था कि हर आदमी पेड़ों को अपने जीवन के तुल्य माने और उनकी रक्षा करे.

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सकलानी का संदेश था कि जीवन के तीन महत्वपूर्ण मौकों जन्म, विवाह और मृत्यु पर एक पेड़ जरूर लगाएं. शुक्रवार(18 जनवरी) सुबह विशेश्वर दत्त सकलानी ने अपने घर में अंतिम सांस ली. उनके अचानक से चले जाने पर क्षेत्र के प्रकृति प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई.

First published: 19 January 2019, 17:10 IST
 
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