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भारत सरकार की नई नीति क्या रोक पाएगी गिरते भूजल स्तर को?

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST
QUICK PILL
  • भारत के कई इलाकों में भूजल चिंताजनक स्तर तक गिर चुका है. भारत सरकार ने गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए बनाई है नई नीति.
  • विशेषज्ञों ने की नीति की तारीफ. बड़े उद्योगों पर लग सकेगा अंकुश. ये नीति जमीनी स्तर पर कितनी लागू हो पाएगी इसमें संशय.

क्या आपने कभी 370 फीट गहरे कुएं से पानी खींचा है. अगर आपको नहीं पता कि ये कितनी गहराई होगी तो हम आपकी मदद करते हैं. बस इतना समझ लीजिए कि 35 मंजिला इमारत से आपको एक रस्सी लटकाकर एक बाल्टी पानी खींचना है.

आपको शायद ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन भारत के कुछ इलाकों में यह लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है.

ये हम नहीं कह रहे, ख़ुद भारत सरकार ऐसा मानती है. राजस्थान के कुछ इलाक़ों में भूजल स्तर काफ़ी नीचे जा चुका है. महाराष्ट्र के कुछ इलाक़ों में स्थिति इससे भी ख़राब है.

गिरते भूजल स्तर की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार नई नीति लेकर आयी है.

समस्या क्या है?

  • भारत उन देशों में से है जहां भूजल का सबसे अधिक दोहन किया जा चुका है. इसलिए यहां भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.
  • हर साल मानसून से पहले सरकार देश के 13 हज़ार कुओं में जलस्तर नापती है. सरकार की साल 2015 की रिपोर्ट के अनुसार आधे से ज़्यादा कुओं में जलस्तर पिछले साल की तुलना में नीचे चला गया है.
  • भारत के लगभग सभी राज्यों में 2015 में जलस्तर पिछले 10 सालों के औसत से नीचे था.
  • दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में स्थिति ज़्यादा ख़राब है.
  • तमिलनाडु में 95 प्रतिशत खुले कुएं सूख चुके हैं. बाक़ी कुओं के जलस्तर में पांच फ़ीट से भी ज़्यादा कमी आयी है.

क्या है नीति?

  • 16 नवंबर से प्रभावी हुई नई नीति के तहत भूजल निकालने या उसका दोहन करने पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. 
  • जल संसाधन मंत्रालय के केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने ये नीति बनायी है.
  • नई नीति के तहत जहां भूजल का अधिक दोहन हो चुका है उन इलाक़ों में उद्योगों के लिए भूजल दोहन पर अंकुश लगाया गया है.
  • नई नीति के तहत 14 उद्योगों, जैसे बोतलबंद पानी और कोल्ड ड्रिंक्स प्लांट को पानी के अत्यधिक खपत वाले उद्योगों के रूप में चिह्नित किया गया है. जहां पहले से ही भूजल काफी नीचे है उन इलाक़ों में ऐसे उद्योगों की अनुमति नहीं दी जाएगी.

भारत में अमेरिका से दोगुने भूजल का उपयोग किया जाता है लेकिन यहां किसानों की संख्या भी करीब 100 गुना ज़्यादा है

  • नई नीति के अनुसार उद्योगों के लिए भूजल के इस्तेमाल की इजाज़त तभी दी जाएगी जब वो उसके पुनर्भरण की जिम्मेदारी लेंगे. जिन इलाक़ों में भूजल का स्तर ज्यादा चिंताजनक है उनमें जितना पानी वो निकालने चाहते हैं उससे दोगुने का पुनर्भरण करना होगा.

  • कई 'नोटिफाइड एरिया' जैसे पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाक़ों में भूजल का इस्तेमाल केवल पीने के लिए किया जा सकेगा.

  • ये नीति नौ राज्यों में प्रभावी नहीं होगी, जिनमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु, दिल्ली एवं तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं. इन सभी राज्यों की अपनी भूजल नीति है. 

ये नीति कितनी कारगर होगी?

  • सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि नई नीति से कोका कोला जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स निर्माताओं पर लगाम लगेगी. स्थानीय समुदाय कोका कोला पर लंबे समय से बड़े पैमाने पर भूजल दोहन के आरोप लगाते रहे हैं.

  • भूजल में सुधार की सबसे बड़ी दिक्कत है इनपर निगरानी रखना. बोरवेल की खुदाई पर नज़र रखने के लिए बड़ी संख्या में निगरानी रखने वाले इंस्पेक्टर चाहिए होंगे.

  • विभिन्न राज्यों में पहले से ऐसी निगरानी करने वाले कर्मचारियों की कमी है.

  • नीति के क्रियान्वयन की पूरी  जिम्मेदारी 'स्थानीय अधिकारियों' पर छोड़ दी गयी है. इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश बहुत बढ़ जाती है.

  • इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के सीनियर फ़ेलो तुषार शाह के एक अध्ययन के अनुसार भारत अमेरिका से दोगुना भूजल इस्तेमाल करता है लेकिन यहां किसानों की संख्या वहां से करीब 100 गुना ज्यादा है. इतने बड़े स्तर पर निगरानी करना बहुत बड़ी चुनौती है.

  • तुषार शाह के अनुसार नई नीति तभी कारगर हो सकती है जब उसे कानून का सहारा मिले. लेकिन एक मॉडल ग्राउंड वाटर बिल  ( आदर्श भूजल विधेयक) पिछले 40 दशकों से संसद में लंबित पड़ा है. इसे पारित करके कानूनी रूप देना होगा.

  • शाह के अध्ययन के अनुसार अगर ऐसा कानून पारित हो भी जाए तो पूरे देश में फैले हुए लाखों कुओं की निगरानी का खर्च काफी ज्यादा होगा. 

इसका खेती और उद्योगों पर क्या असर होगा?

  • नई नीति में ये साफ नहीं है कि खेती के लिए भूजल के उपयोग पर किस तरह नियमन किया जाएगा.

  • एक बड़ी त्रुटि यह है कि खेती भूजल के दोहन का एक बड़ा माध्यम है. पंजाब और हरियाणा इसी वजह देश के सर्वाधिक भूजल दोहन वाले राज्य हैं.

तमिलनाडु के 95 फ़ीसदी खुले कुएं सूखे हुए हैं. बाक़ी में पानी का स्तर हर साल पांच फ़ीसदी कम हो रहा है

  • भूजल के औद्योगिक उपयोग पर नियंत्रण लगाना इस नीति की सबसे ख़ास बात है.

  • इस नीति के तहत सभी तरह के उद्योगों पर नियमन संभव है. पुरानी नीति 15 नवंबर, 2012 से पहले स्थापित उद्योगों पर लागू नहीं होती थी. जिसकी वजह से केरल के प्लाचीमाडा में कोका कोला लगातार भूजल का दोहन करता रहा.  

उद्योगों द्वारा भूजल के दोहन के ख़िलाफ़ लंबा संघर्ष कर चुके इंडिया रिसोर्स सेंटर के अमित श्रीवास्तव कहते हैं,  "नए दिशानिर्देश इस दिशा में महत्वपूर्ण क़दम है." 

श्रीवास्तव कहते हैं, "लेकिन ये सब इस बात पर निर्भर है कि सीजीडब्ल्यूए ज़मीनी स्तर पर इन दिशानिर्देशों को कितना लागू कर पाएगा."

First published: 24 November 2015, 2:05 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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