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पाक मसलाः अब्दुल गफ्फार खान की पड़पोती भारत के साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2016, 5:56 IST
QUICK PILL
  • सार्क सम्मेलन रद्द होन के बाद ख़ान अब्दुल गफ्फ़ार ख़ान की पड़पोती ने इसे भारत के हक़ में और पाकिस्तान पर दबाव बनाने वाला हथियार बताया है

सार्क शिखर सम्मेलन से दूर रहने के भारत के कदम का समर्थन करते हुए सीमान्त गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान की पड़पोती यास्मीन निगार खान ने कहा कि पाक को दबाव में लाने का यह कारगार तरीका है. साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान के विकास पर मोदी की बात का समर्थन करते हुए कहा, उन्हें लगता है कि बलूचिस्तान जब तक अलग राज्य नहीं बन जाता पाकिस्तान के साथ रहकर इसका सामाजिक-आर्थिक विकास मुश्किल है.

ऑल इंडिया पश्तून जिगरा-ए-हिन्द संगठन की अध्यक्ष 42 वर्षीय निगार खान ने कहा, कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अफगान समुदाय के विकास के लिए उनका सहयोग मांगेंगी. उन्होंने कहा वे सितम्बर माह के अंत में ही भारत में अफगानिस्तान के राजदूत डॉ. शैदा मोहम्मद अब्दाली से मुलाकात करेंगी और उन्हें अफगानी लोगों की समस्याओं के बारे में बताएंगी.

खान का संगठन पहले ही बलूचिस्तान और पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमान्त प्रान्त में रहने वाले पश्तो समुदाय के विकास कार्यों में जुटा है. वे कभी पाकिस्तान नहीं गई. उन्हें डर है कि कहीं उन्हें भी एक स्वतंत्र पश्तुनिस्तान की मांग पर गिरफ्तार न कर लिया जाए, जैसे उनके पड़ दादा को किया गया था.

तालीबान हर जगह दोषी नहीं

1996 में पश्तूनों के विश्व सम्मेलन लोया जिगरा में भाग लेने वे एक बार अपने पिता के साथ अफगानिस्तान गईं थीं. वे कहती हैं मेरी काबुल यात्रा के अनुभव और मेरे रिश्तेदारों व उच्च अधिकारियों के साथ लगातार सम्पर्क में रहते हुए मैं कह सकती हूं कि पाकिस्तान में हमलों के लिए सारे तालिबानियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

वे कहती हैं बांग्लादेश और भूटान दवारा सार्क से अलग हो जाने के बाद बाकी छोटे देश भी वैश्विक आतंकवाद का खतरा महसूस कर रहे हैं और छोटे देशों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं.

उरी हमले, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे की निंदा करते हुए खान ने कहा, वार्ता  से कोई हल निकलने वाला नहीं है; इसलिए पाक को जवाब देने के लिए कोई न कोई रणनीति अपनानी ही होगी. उन्होंने कहा ‘‘ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शीघ्र ही एक रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पाकिस्तान को अलग-थलग करने के भारत के निर्णय का समर्थन किया जाएगा. साथ ही प्रधानमंत्री से अफगान समुदाय के विकास पर ध्यान देने की अपील की जाएगी.

First published: 30 September 2016, 5:56 IST
 
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