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हमला ही नहीं, पठानकोट पर हमले की भी थी जानकारी

भारत भूषण | Updated on: 6 January 2016, 7:39 IST
QUICK PILL
  • सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक एक पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी ने भारत को आतंकी हमले की सटीक जानकारी देते हुए यह बताया था कि आतंकी पठानकोट पर हमला कर सकते हैं. हालांकि अभी तक यह नहीं साफ हो पाया है कि मोदी को इस बारे में पता था या नहीं क्योंकि वह उस वक्त लाहौर के दौरे पर निकल चुके थे.
  • आतंकवादी संभवतया ड्रेन की पाइप में लगे एक लोहे की छड़ को हटाकर एयर फोर्स बेस में घुसने में सफल रहे. इसका यह मतलब हुआ कि उनके पास एयर फोर्स बेस का विस्तृत नक्शा था या फिर उन्होंने हमला करने के लिए जबरदस्त रेकी की थी.

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से गर्मजोशी से हाथ मिला रहे थे तब भारत को आतंकी हमले के बारे में पक्की सूचना थी. इतना ही नहीं भारत को इस बारे में भी पता था कि हमला पठानकोट पर हो सकता है.

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक एक पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी ने भारत को आतंकी हमले की सटीक जानकारी देते हुए हुए यह बताया था कि आतंकी पठानकोट पर हमला कर सकते हैं. हालांकि अभी तक यह नहीं साफ हो पाया है कि मोदी को इस बारे में पता था या नहीं क्योंकि वह उस वक्त लाहौर के दौरे पर निकल चुके थे. सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी सटीक खुफिया जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां हमला रोकने के लिए कुछ नहीं कर पाईं. हमले का जिस तरह से सामना किया गया उसे देखते हुए तो यही कहा जा सकता है.

कैसे हुआ हमला

आतंकियों ने जबरदस्त योजना बनाई थी. जब चार आतंकी सीमा पार से भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे तब दो आतंकी पहले से भारत में उनका इंतजार कर रहे थे. फिर छह आतंकवादी एक साथ ड्रेन की मदद से पठानकोट एयर फोर्स बेस में घुसे. 

कैंपस की निगरानी डिफेंस सिक्योरिटी के पास थी जो एक तरह से पुलिस फोर्स की तरह काम करती है और इसमें सेवानिवृत्त सेना के लोग पुलिस के टाइटल पर काम करते हैं. आतंकवादी संभवतया ड्रेन की पाइप में लगे एक लोहे की छड़ को हटाकर एयर फोर्स बेस में घुसने में सफल रहे. इसका यह मतलब हुआ कि उनके पास एयर फोर्स बेस का विस्तृत नक्शा या फिर उन्होंने हमला करने के लिए जबरदस्त रेकी की थी.

सूत्रों की माने तो एक पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी ने पहले ही पठानकोट पर होने वाले हमले की जानकारी दे दी थी

सूत्रों ने बताया कि इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आतंकियों को अंदर के लोगों से मदद मिली हो. हालांकि वह 29 दिसंबर को बठिंडा एयर फोर्स बेस से गिरफ्तार किए गए एयरक्राफ्ट्समैन से इस हमले को जोड़कर नहीं देखते हैं. सूत्रों ने कहा, 'वह बेहद जूनियर था. आतंकवादियों को पठानकोट एयर फोर्स बेस के अंदर से मदद मिल सकती है लेकिन अभी इस बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. केवल विस्तृत जांच से ही किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचा जा सकता है.'

चार आतंकवादी हथियारों के साथ घूमते रहे और किसी ने भी उन्हें न तो देखा और नहीं रोकने की कोशिश की. यह पंजाब की मौजूदा कानून और व्यवस्था की हालत है. सूत्रों के मुताबिक उन्हें यह लोग तस्कर या फिर पंजाब के शक्तिशाली नेताओं के गुंडे समझ रहे थे.

कंधार से भी खराब स्थिति

सूत्रों ने बताया, 'जिस तरह से पठानकोट हमले से निपटा गया वह आईसी-814 की हाईजैकिंग वाली स्थिति से भी बुरी थी. कम से कम कंधार हाईजैकिंग के बारे में किसी को पता नहीं था. लेकिन इस बार हमें पता था कि क्या और कहां होने वाला है लेकिन फिर भी हम बचाव नहीं कर पाए.'

जिस तरह से छह आतंकवादियों ने भारतीय वायु सेना, डिफेंस सिक्योरिटी और एनएसजी के कमांडो को 60 घंटों तक उलझाए रखा वह उनकी तैयारियों और सैन्य प्रशिक्षण के बारे में बताता है. सूत्रों की माने तो इस तरह का आतंकी हमला करने के लिए कम से कम कुछ हफ्तों की तैयारी की जरूरत होती है. इसका मतलब यह हुआ कि इस हमले की तैयारी मोदी के अचानक हुए पाकिस्तान दौरे से पहले ही की जा चुकी थी. आप यह याद कर सकते हैं किस तरह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा से पहले करगिल हमले की योजना बना ली गई थी.

आईएसआई की भूमिका

इनमें से कोई भी सूत्र यह मानने को तैयार नहीं कि आतंकवादी नॉन-स्टेट एक्टर्स थे. उनका दावा है कि जैश-ए-मोहम्मद की इसमें भूमिका हो सकती है जिसे आईएसआई जिंदा कर चुकी है.

सूत्रों ने बताया, 'आईएसआई के फिर से जिंदा किए जाने से पहले तक जैश-ए-मोहम्मद पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका था. इनका पहला हमला 2014 में आम चुनाव के पहले मेरठ में होना था हालांकि भारत ने हमले की योजना को पूरी तरह से विफल कर दिया था.'

हथियारबंद आतंकी सरेआम घूमते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन की नजर उन पर नहीं पड़ी

उन्होंने कहा, 'यह संभव है कि जनरल राहिल शरीफ नवाज शरीफ के शांति वार्ता को समर्थन दे रहे हो. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आईएसआई में हर कोई उन्हीं की तरह सोच रहा हो. ऐसे लोग हो सकते हैं जो पूर्व प्रमुख जहीरुल इस्लाम, शुजा पाशा या फिर अशफाक कियानी से इत्तेफाक रखते हो. वह अभी भी शरीफ को उनकी औकात बताना चाहते हों. पठानकोट हमला निश्चित तौर पर आईएसआई की योजना है लेकिन उसमें कुछ लोगों का हाथ होगा. आईएसआई की भूमिका से कोई इनकार नहीं कर सकता. जैश-ए-मोहम्मद इस मकसद के लिए सबसे बढ़िया विकल्प रहा होगा.'

सूत्रों ने कहा कि यह कोई मानने को तैयार नहीं कि पठानकोट हमले के पीछे यूनाइटेड जिहाद काउंसिल का हाथ है. उन्होंने कहा कि यह महज कश्मीर की तरफ ध्यान खींचने की कोशिश की है.

मोदी सरकार के पास क्या है विकल्प

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली शांति बातचीत में इतनी बड़ी राजनीतिक पूंजी लगाने के बाद अगर मोदी एक आतंकी झटके की वजह से बातचीत रोकने का फैसला करते हैं तो यह उनकी छवि के लिए खतरनाक होगा. निश्चित तौर पर इससे नुकसान होगा क्योंकि रिश्तों के सामान्य होने के दौरान इस तरह के आतंकी हमलों की उम्मीद थी.

कुछ बदलाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखेंगे

सूत्रों ने बताया, 'प्रधानमंत्री मोदी के मिजाज को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह कुछ बदलाव के साथ पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखेंगे. आखिरकार 15 जनवरी को विदेश सचिव स्तर की बातचीत तय है और यह एकमात्र आधिकारिक स्तर की वार्ता है. और वह निश्चित तौर पर बात करने की योजना बना रहे हैं.'

पाकिस्तान कार्रवाई के नाम पर जैश-ए-मोहम्मद के उन आतंकियों को गिरफ्तार कर सकता है जिनके संगठन में होने़, नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ता

मोदी बातचीत के पहले जैश-ए-मोहम्मद पर कार्रवाई किए जाने की शर्त रख सकते हैं. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के लिए यह बहुत मुश्किल नहीं होना चाहिए. वह कुछ गिरफ्तारी कर सकते हैं. हालांकि इस दौरान जैश-ए-मोहम्मद के बड़े नेताओं को हाथ नहीं लगाया जाएगा. जबकि उन लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है जो संगठन के लिए बिलकुल मायने नहीं रखते हैं.'

इस पूरी कवायद से भारत और पाकिस्तान दोनों को शर्मिंदगी से बचने का मौका मिलेगा. मोदी पाकिस्तान पर बातचीत के लिए सार्थक माहौल बनाने का जोर डालेंगे और पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद के कुछ काडरों की गिरफ्तारी कर खाना पूर्ति कर लेगा. इससे आतंकियों की क्षमता और आईएसआई की रणनीति पर कोई असर नहीं होगा.

सूत्रों ने बताया कि इस बात की कम ही संभावना है कि मोदी पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, 'मोदी ने पाकिस्तान में मौजूद भारत विरोधी तत्वों को नजरअंदाज करते हुए लाहौर की यात्रा कर बेहतर संकेत दिए हैं.'

 

First published: 6 January 2016, 7:39 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

Editor of Catch News, Bharat has been a hack for 25 years. He has been the founding Editor of Mail Today, Executive Editor of the Hindustan Times, Editor of The Telegraph in Delhi, Editor of the Express News Service, Washington Correspondent of the Indian Express and an Assistant Editor with The Times of India.

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