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जंग हुई तो 30 दिनों तक दुश्मन से लोहा लेगी भारतीय सेना, कम नहीं पड़ेगा हथियार और टैंक का जखीरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 May 2018, 10:06 IST

पिछले साल जुलाई में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने संसद में प्रस्तुत अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि अगर भारत का किसी देश से युद्ध होता है तो सेना 10 दिन भी टिक नहीं पाएगी. कैग ने रिपोर्ट में कहा था कि सेना के पास 10 दिनों का भी गोला-बारूद मौजूद नहीं है. यहीं नहीं कैग ने यह भी कहा था कि 152 प्रकार के गोला-बारूद में से सिर्फ 61 प्रकार के गोला-बारूद का भंडार ही उपलब्ध है.

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अब भारतीय सेना के पास इतना गोला-बारूद होगा कि महीने भर भी युद्ध होगा तो भी सेना के पास गोला-बारूद की कमी नहीं आएगी. दरअसल, काफी वर्षों के लंबे इंतजार के बााद सेना ने 15 हजार करोड़ रुपए की बड़ी परियोजना को अंतिम रूप दिया है. इस प्रोजेक्ट के तहत, सेना के अहम हथियारों और टैंकों के लिए स्वेदशी गोला-बारूद निर्मित किया जाएगा.

सेना के इस कदम से न सिर्फ आयात में होने वाले देरी से छुटकारा मिल जाएगा, बल्कि गोला-बारूद के घटते भंडार की समस्या का भी निदान हो जाएगा. सेना के ऑफिशियल सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बड़ी परियोजना में 11 प्राइवेट कंपनियों को शामिल किया जाएगा. परियोजना के कार्यान्वयन पर सेना और रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी खुद नजर रखेंगे.

इस परियोजना का तात्कालिक उद्देश्य सभी अहम हथियारों के लिए इतना गोला-बारूद सुनिश्चित करना है ताकि सेना 30 दिन की लड़ाई में सक्षम हो सके. जबकि दीर्घकालिक उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाना है. शुरुआत में विभिन्न प्रकार के रॉकेटों, वायु प्रतिरक्षा प्रणाली, हल्की तोपों, युद्धक वाहनों, ग्रेनेड लांचरों और अन्य युद्धक हथियारों के लिए निश्चित समयसीमा के तहत गोला-बारूद का उत्पादन किया जाएगा.

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इसके बाद पहले चरण के परिणाम के आधार पर उत्पादन लक्ष्यों में संशोधन किया जाएगा. इस परियोजना की व्यापक रूपरेखा पर पिछले महीने सेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन में विचार-विमर्श किया गया था.

First published: 14 May 2018, 10:02 IST
 
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