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भारत में लड़कियों को गोद लेना पसंद कर रहे हैं लोग, देश में महाराष्ट्र पहले नंबर पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2018, 17:05 IST

इसे सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का असर कहें या बेटियों के प्रति लोगों का बदलता नजरिया. जो बेटियों को गोद लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहा है. दरअसल, सरकारी आंकड़ों में इस बात का पता चला है कि पिछले 6 साल में जितने बच्चे गोल लिए गए उनमें आधे से अधिक लड़कियों की संख्या शामिल है. बच्चों को गोल लेने के मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है. वहीं दूसरे नंबर पर कर्नाटक और तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल का नंबर आता है.

चाइल्ड अडॉप्शन रिसर्च एजेंसी (CARA) के आंकड़ों के मुताबिक देश में साल 2017-18 में कुल 3,276 बच्चे गोद लिए गए जिनमें 1,858 लड़कियां शामिल हैं. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान महाराष्ट्र में कुल 642 बच्चों को गोद लिया गया. जिसमें लड़कियों की संख्या 353 थी. CARA के सीईओ लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार के मुताबिक महाराष्ट्र में गोद लेने वाली 60 एजेंसियां हैं जबकि अन्य राज्यों में इनकी औसतन संख्या 20 है.

जिसमें लड़कियों की संख्या 353 थी. CARA के सीईओ लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार के मुताबिक महाराष्ट्र में गोद लेने वाली 60 एजेंसियां हैं जबकि अन्य राज्यों में इनकी औसतन संख्या 20 हैआंकडो़ं के मुताबिक पिछले 6सालों में औसतन 59.77 फीसदी जोड़ों ने लड़कियों को गोद लिया. वहीं 40.23 प्रतिशत लोगों बच्चा गोद लेने के मामले में लड़कों को वरीयता दी.

 

 

आंकड़ों के मुताबिक साल 2016-17 में लिंगानुपात के मामले में सबसे पिछड़े राज्य हरियाणा में भी 31 लड़कियों पर मात्र 19 लड़के गोद लिए गए. वहीं उत्तर प्रदेश में 86 लड़कियों पर 40 लड़कों को गोद लिया गया. CARA के सीईओ दीपक कुमार ने बताया कि वे बच्चा गोद लेने वाले जोड़े के सामने तीन ऑप्शन रखते हैं. पहला लड़की या लड़के का या एक लड़की और एक लड़का या किसी को भी वरीयता देना का ना देना शामिल है. बावजूद इसके ज्यादातर लोग लड़कियों को गोद लेना पसंद कर रहे हैं. गोद लेने वाली लड़की और लड़कों का अनुपात 55:45 है.

वहीं कुमार ने बच्चियों के गोद लेने में हुई वृद्धि का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि विशेष जरूरत वाले लोग बच्चों को गोद ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोग 4-5 साल से बड़े बच्चे को गोद लेना पसंद नहीं करते. जिससे ऐसे बच्चों को गोद लेने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है.

उन्होंने बताया कि उनके पास वर्तमान में बच्चे गोद लेने के लिए 20 रजिस्ट्रेशन हैं, लेकिन हमारे पास गोद लेने लायक कुछ ही बच्चे हैं. बता दें कि पिछले कुछ सालों में भारत में बच्चे गोल लेने के मामले में वृद्धि हुई है. वहीं अमेरिका, इटली, फ्रांस और स्पेन जैसे देश बच्चों को गोद लेने के मामले में सबसे ऊपर हैं.

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First published: 6 May 2018, 17:05 IST
 
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