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आईआईएम अहमदाबाद में शिक्षकों के पद के लिए आरक्षण

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 September 2016, 8:26 IST
QUICK PILL
  • मानव संसाधन मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद में हर क्षेत्र के लोगों को आमंत्रित कर आरक्षण की व्यवस्था तैयार की जा रही है. 
  • आईआईएम-ए में सभी निदेशकों और अध्यक्षों की बैठक में, और शिलांग में भी एचआरडी मंत्री प्रकाश जावडेकर ने स्टाफ की भर्ती में आरक्षण की नीति लागू करने के निर्देश दिए.

शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण का शुरू से विरोध कर रहा आईआईएम-अहमदाबाद अब तरस खाने के मूड में है. दरअसल यह मानव संसाधन विकास मंत्रालय का ही निर्देश है, जो सभी आईआईएम में शिक्षकों के पद पर पिछड़े वर्ग को लाने के लिए आरक्षण लागू करने की पूरी कोशिश कर रहा है. 

मंत्रालय ने सभी आईआईएम को कहा है कि वे कोटा सिस्टम लागू करके अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करें. इस पर शहर की शीर्ष बिजनेस संस्था के निदेशक आशीष नंदी ने कमेंट करते हुए रिपोर्टर्स को बताया कि उन्होंने हमसे केवल यह उम्मीद की है कि हम हर क्षेत्र से लोगों को (शिक्षकों के पद के लिए ) आमंत्रित करें, खासकर पिछड़े वर्ग से. हमने उनसे कहा कि हम यह पहले से कर रहे हैं और अपनी कोशिशों को दुगुना कर देंगेे.

आईआईएम-ए में सभी निदेशकों और अध्यक्षों की बैठक में, और शिलांग में भी एचआरडी मंत्री प्रकाश जावडेकर ने स्टाफ की भर्ती में आरक्षण की नीति लागू करने के निर्देश दिए. सूत्रों के अनुसार आईआईएम और अन्य संस्थाओं को एक सरकारी आदेश के माध्यम से 1975 में राहत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि तकनीकी संस्थाओं को आरक्षण की नीति नहीं अपनानी है.

पहले भी हो चुकी है कोशिशें

कोटा का मुद्दा हमेशा विवादास्पद रहा है. 2008 में सरकार ने केंद्र से सहायता प्राप्त आईआईटी और अईआईएम जैसी सभी शिक्षण संस्थाओं को शिक्षकों के पद के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए कोटा तय करने को कहा था. गुणवत्ता की दृष्टि से इस कदम का विरोध किया गया था. 

एचआरडी मंत्री अर्जुन सिंह एक बिल लाए थे, जिसमें आईआईटी और आईआईएम सहित भारत की 47 शीर्ष शिक्षण संस्थाओं को आरक्षण से छूट दी गई थी. बिल राज्य सभा में पारित हुआ था, पर लोक सभा में नहीं. 14वीं लोकसभा के भंग होने के बाद बिल रद्द हो गया. 

नियमों के मुताबिक, स्कूलों से लेकर शीर्ष शिक्षण संस्थाओं तक में शिक्षक पद के लिए एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों की 50 फीसदी सीट आरक्षित होनी चाहिए, पर देश की शीर्ष प्रबंधन संस्थाओं आईआईएम-ए और आईआईएम बंगलुरू ने शिक्षकों की भर्ती में कोटा सिस्टम का पूरी तरह पालन नहीं किया. 

First published: 29 September 2016, 8:26 IST
 
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