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लड़ाकू विमान सी-हैरियर ने भरी आखिरी उड़ान

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2016, 8:21 IST

भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत आईएनएस विराट से उड़ान भरने वाला लड़ाकू विमान सी-हैरियर अब नीले आसमान में उड़ान भरता नहीं दिखाई देगा. नौसेना की 'वाइट टाइगर्स' स्कावड्रन का हिस्सा रहे सी-हैरियर ने आज गोवा में आखिरी उड़ान भरी.

33 साल की सेवा के बाद बुधवार को सी हैरियर लड़ाकू विमानों को नौसेना से विदाई दे दी गई. भारतीय नौसेना में इस प्रतिष्ठित लड़ाकू विमान की जगह रूस के नए लड़ाकू विमान मिग-29 लेंगे.

साल 1983 में नौसेना में शामिल

गोवा के आईएनएस हंसा बेस में आयोजित सी-हैरियर के विदाई समारोह में एडमिरल आरके धवन और सेवानिवृत्त एडमिरल अरुण प्रकाश मौजूद थे. 

भारतीय नौसेना ने सी-हैरियर लड़ाकू विमान 1983 में ब्रिटेन से खरीदे थे. नौसेना में आने के बाद को विमान वाहक पोत विक्रांत और उसके बाद फिर विराट में तैनात किए गए.

सी-हैरियर विमान ने ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम के दौरान भारतीय नौसेना की सेवा की. इंडियन नेवल एयर स्वैड्रन 300 (आईएनएएस) में इस फाइटर प्लेन को वर्ष 1983 में सीहॉक फाइटर जेट की जगह शामिल किया गया था.

ब्रिटिश एयरोस्पेस एजेंसी ने  सी-हैरियर को 1979 में विकसित किया था. ये विमान हवा में ही ईंधन भरने में सक्षम था जिस कारण यह लंबी दूरी तय कर सकता था.

ये लड़ाकू विमान वर्टिकल लैडिंग करने में सक्षम है और इसकी यही खासियत दूसरे लड़ाकू विमानों से अलग करती है. इसके साथ ही ये बहुत छोटे रनवे से भी उड़ान भर सकता है. 

रूस के नए लड़ाकू विमान मिग-29 को अगले एक-दो साल में भारत के स्वनिर्मित विमानवाहक युद्दपोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात कर दिए जाएंगे. मिग-29 भी उसी 'वाइट-टाइगर' स्कावड्रन का हिस्सा होंगे जिसका सी-हैरियर हिस्सा थे. 

First published: 12 May 2016, 8:21 IST
 
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