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वीडियो: भारतीय रेलवे का नेत्रहीन कर्मचारियों को धोखा

शादाब मोइज़ी | Updated on: 23 May 2016, 14:54 IST
(कैच न्यूज)

23 साल के नेत्रहीन शादाब आलम धीरे-धीरे चलते हैं. नई दिल्ली के प्रताप नगर रेलवे कॉलोनी की धूल भरी सड़क में आलम अपनी सफेद छड़ी के सहारे दूसरे हाथ से सड़क पर झाड़ू लगा रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज से स्नातक आलम अपनी खुशी से यह काम नहीं करते हैं. वास्तव में भारतीय रेलवे की मनमानी के चलते उन्हें सफाई कर्मचारी बनने पर मजबूर होना पड़ा.

रेल मंत्री करेंगे कोई पहल?

कल्पना कीजिए आपको क्लर्क की नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र मिला हो, लेकिन ज्वाइनिंग के बाद आपको सफाई कर्मचारी का काम सौंपा जाए. आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? यह स्थिति किसी को भी सदमे में डाल सकती है. ऐसा ही शादाब और उनके जैसे 50 अन्य लोगों के साथ हुआ है. जब इन लोगों ने रेलवे की ग्रुप डी की परीक्षा को निकाला था, तो इनकी नियुक्ति खलासी, कम्प्यूटर ऑपरेटर, वायरलेस टेले जैसे पदों पर होनी थी. ज्वाइनिंग के बाद इनके नियुक्ति पत्र को बदलकर सफाई कर्मचारी के पद पर ज्वाइन करने के लिए कहा गया.

आलम कहते हैं, "अगर हमें नाली साफ और झाड़ू लगाने का काम करता होता, तो ये हम पहले भी कर सकते थे. बीए करने का क्या फायदा हुआ. मुश्किल में पढ़ाई करके और तीन साल लगातार मेहनत करके हमने रेलवे में नौकरी पाई है. लेकिन मेरे जैसे लोगों को सफाई कर्मचारी बना दिया गया."

25 साल के नेत्रहीन अश्वनी कुमार ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया है और उनके पास बीएड की डिग्री भी है. वे कहते हैं, "मेरी नियुक्ति वायरलेस टेली के पद पर हुई थी. वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यहां खंभे पर चढ़कर बिजली का काम होता है और यह काम आपसे नहीं हो पाएगा. इसके बाद मुझे सफाई के कामों में लगा दिया गया."

शारीरिक अक्षमता के बावजूद उत्तर रेलवे की दिल्ली डिवीजन ने उनके हाथों में झाड़ू थमा दिया. भारतीय रेलवे के रूल बुक के अनुसार डिवीजन स्तर पर ही सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए पद निकाले जा सकते हैं. नेत्रहीन विश्वनाथ साहू की अलग कहानी है. वह कहते हैं कि जब उन्होंने रेलवे के प्रवेश परीक्षा के लिए अावेदन किया था तो उसमें डेस्क की नौकरी या चपरासी का पद था. आवेदन पत्र में कही भी सफाई कर्मचारी का उल्लेख नहीं था.

ध्यान देने वाली बात है कि सफाई का काम इन नेत्रहीन लोगों के जीवन को संकट में डालता है. सीवेज की सफाई उनके लिए व्यावहारिक तौर पर असंभव है. अब इनकी उम्मीदें रेल मंत्री सुरेश प्रभु से हैं. ट्विटर पर रेलवे से जुड़ी शिकायतों पर रेल मंत्री प्रभु की सक्रियता जगजाहिर है. अब देखना है कि प्रभु इन नेत्रहीन सफाई कर्मचारियों के लिए क्या करते हैं.

First published: 23 May 2016, 14:54 IST
 
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