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लड़कों के मुकाबले लड़कियों को गोद लेना पसंद करते हैं भारतीय

आशीष कुमार पाण्डेय | Updated on: 11 January 2016, 23:38 IST
QUICK PILL
  • केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में भारतीयों ने 5167 लड़कों की तुलना में 7439 लड़कियों को गोद लिया है
  • साल 2014-15 में 1688 लड़कों के मुकाबले 2300 लड़कियां गोद ली गई जो कि एक रिकॉर्ड है. 

भारतीय समाज मूलत: पुरुष प्रधान माना जाता है. कन्या भ्रूण हत्या के मामले में भारत दुनिया के कुछेक सबसे बदनाम देशों में शामिल है. लेकिन समाज की सोच में पहले के मुकाबले अब काफी परिपक्वता नजर आने लगी है. इसका ताजा उदाहरण कारा के वो आंकड़े हैं, जिनमें बताया गया है कि भारतीय, लड़कों के मुकाबले लड़कियों को गोद लेने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. 

आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में भारतीयों ने 5167 लड़कों की तुलना में 7439 लड़कियों को गोद लिया है. गोद ली जा रही लड़कियों के बढ़ते रुझान को देखकर महिला और बाल कल्याण मंत्रालय ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस तरह के आंकड़े उत्साहजनक हैं.

मंत्रालय के सार्थक प्रयास से लोगों में इस प्रकार की चेतना फैली है. मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के अनुसार गोद लेने वाले परिवार लड़कों के मुकाबले लड़कियां को ज्यादा पसंद कर रहे हैं कारा के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012-13 में 1848 लड़कों के मुकाबले 2846 लड़कियों को गोद लिया गया.

2013-14 में भी यही स्थिति बनी रही. इस वर्ष लड़कों की संख्या 1631 के मुकाबले 2293 लड़कियां गोद ली गईं. साल 2014-15 में 1688 लड़कों के मुकाबले 2300 लड़कियां गोद ली गईं.

गोद लेने के क्रम में विकलांग (जिन्हें अब प्रधानमंत्री ने दिव्यांग नाम दिया है) बच्चियों की संख्या भी उत्साहजनक रूप से बढ़ी है. केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012-13 में 170 विकलांग बच्चों को उनका नया परिवार मिला.

साल 2013-14 में यह संख्या बढ कर 242 तक पहुंची और साल 2014-15 में यह संख्या आंशिक तौर पर घट कर 214 रही.

First published: 11 January 2016, 23:38 IST
 
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