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17 सालों से अनावरण के इंतजार में कपड़े से लिपटी है देश की पहली महिला PM इंदिरा गांधी की मूर्ति

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 November 2018, 9:10 IST
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

आयरन लेडी कही जाने वाली देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज पुण्यतिथि है. आज ही के दिन यानी 31 अक्टूबर को देश की साहसी प्रधानमंत्री की साजिश के तहत हत्या कर दी गई थी. देश भर में आज कांग्रेस के नेता इंदिरा गांधी के आदर्शों पर चलने की प्रतिज्ञा ले रहे हैं. लेकिन देश में एक जगह ऐसी भी है जहां पर इस गौरवशाली प्रतिभा की धनी भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मूर्ती बनकर तो तैयार हो गई लेकिन आज तक अनावरण के इंतज़ार में एक कपड़ेसे लिपटी हुई नगरपालिका परिसर में खड़ी है.

राजस्थान के चोमू में आज से 17 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा तैयार करवाई गई थी. जिसे शहर की नगरपालिका परिसर में स्थापित किया गया था. लेकिन आज तक इस प्रतिमा का अनावरण नहीं हो सकता है. एक तरह से पूर्व प्रधानमंत्री और देश की एक महान नेत्री का अपमान है.


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कौन है जिम्मेदार

जानकारी के अनुसार स्थानीय स्तर पर गुटबाजी के चलते इस मूर्ति का अनावरण आज तक नहीं हो पाया है. अनावरण में हुई इतने सालों की देरी के लिए कांग्रेस के साथ ही भाजपा भी बराबरी की जिम्मेदार है. राजस्थान के चोमू में पिछले 17 सालों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने राज्य सरकार रही हैं. जिस नगर पालिका में ये मूर्ती आज भी कपड़े से लिपटी खड़ी हुई है उस स्थानीय पालिका में कांग्रेस व भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं.

लेकिन स्थानीय सूत्रों की मानें तो आपसी खींचतान के कारण पूर्व पीएम इंदिरा गांधी मूर्ति का अनावरण आज तक नहीं हो सका है. वहीं इस मामले में अब कांग्रेसियों का कहना है कि जब तक पूर्व पीएम की मूर्ति का अनावरण नहीं होगा, तब तक गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि नहीं दी जा सकती.

क्या है मामला

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनकी दूसरी पुण्य तिथि पर शहर के कांग्रेसियों ने गांधी की मूर्ति स्थापना समिति का गठन कर मूर्ति का निर्माण करवाया था. इस मूर्ति का निर्माण जयपुर के प्रसिद्ध जेमनी मूर्तिकार से 17 हजार की लागत से करवाया गया था. मूर्ति करीब ढाई फुट की है.

इस प्रतिमा को लेकर शुरू से ही विवादों का दौर चलता रहा है. पहले इस मूर्ति को पहले कबूतर निवास के पास स्थापित करने का विचार था लेकिन इसे बदल दिया गया.

21 सितंबर 1989 को जयपुर में स्वायत शासन मंत्री की अध्यक्षता में मूर्ति स्थापना समिति की बैठक में इसे कबूतर निवास की जगह किसी अन्य जगह पर लगाने का सुझाव दिया गया. ऐसा विपक्षी नेताओं की आपत्ति के बाद किया गया था. इसके बाद 6 अक्टूबर 1991 को नगरपालिका की बोर्ड बैठक में इंदिरा की मूर्ति को पालिका परिसर में लगाने का प्रस्ताव लिया गया, लेकिन मूर्ति नहीं लग पाई.

इसके बाद 2001 में पालिका परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री की मूर्ति स्थापित कर दी गई, लेकिन राज्य सरकार को शिकायतें जाने के बाद अनावरण अटक गया जो कि पिछले 17 सालों से आज तक लटका हुआ है. वहीं इस मूर्ती की निगरानी के लिए नगरपालिका का एक कर्मचारी नियुक्त किया गया है.

First published: 31 October 2018, 10:22 IST
 
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