Home » इंडिया » Indira Gandhi this decision made her the Iron Lady to country's biggest villain
 

इंदिरा गांधी के इस एक फैसले ने उन्हें 'आयरन लेडी' से बना दिया था देश का 'सबसे बड़ा विलेन'

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 November 2018, 13:27 IST

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर 25-26 जून की रात राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फरमान से पूरे देश में हड़कंप मच गया था. इंदिरा ने देश को आपाताकाल में झोंक दिया था और जनता के सभी नागरिक अधिकार छीन लिए थे. इमरजेंसी की वजह से इंदिरा गांधी इतिहास में एक विलेन के रूप में दर्ज हो गईं.

25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी, जो 21 मार्च 1977 तक लगी रही. 

 

आपातकाल ने देश के राजनीतिक दलों से लेकर पूरी व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था. आपातकाल के दौरान एक कानून की खूब चर्चा हुई थी जिसके जरिए इंदिरा सरकार ने काफी अलोकतांत्रिक काम किया था. आप भी जानिए क्या था वह कानून-

मीसा(MISA)
मेंटेनेंस अॉफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के नाम से इस विवादित कानून को 1971 में इंदिरा गांधी सरकार ने पास करवाया था. इसके बाद सरकार के पास असीमित अधिकार आ गए. पुलिस या सरकारी एजेंसियां कितने भी समय के लिए किसी की प्रिवेंटिव गिरफ्तारी कर सकती थीं, किसी की भी तलाशी बिना वारंट ली जा सकती थी. सरकार के लिए फोन टैपिंग भी इसके जरिए लीगल बन चुकी थी. अापातकाल के दौरान 1975 से 1977 के बीच इसमें कई बदलाव भी किए गए.

39वें संशोधन के जरिए इसे 9वीं अनूसूची में डाल इंदिरा ने इसे कोर्ट की रूलिंग से भी सुरक्षा दिलवा दी थी. 9वीं अनुसूची के कानूनों पर तब सुप्रीम कोर्ट रूलिंग नहीं दे सकता था. हालांकि अब ये बाध्यता हटा दी गई है.

 

आपातकाल के दौरान इसका जबरदस्त तरीके से दुरुपयोग किया गया. कांग्रेस और इंदिरा गांधी के विरोधियों को बिना किसी चार्ज के इस कानून के जरिए महीनों जेल में रखा गया. यहां तक कि विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं को तक नहीं बख्शा गया. अटल बिहारी वाजपेई,लालकृष्ण आडवानी, चंद्रशेखर, शरद यादव और लालू प्रसाद सरीखे नेता इसी कानून के तहत जेल में रहे थे.

1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आते ही उन्होंने इस कानून को रद्द कर दिया. 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया. इस कानून में आपातकाल के दौर में बंद लोगों को मीसाबंदी कहा गया. मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में इन्हें स्वतंत्रता सेनानियों की तरह पेंशन भी दी जाती है.

First published: 19 November 2018, 13:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी