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द अनसीन इंदिरा गांधी: मेनका से कितनी करीब थीं इंदिरा ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2016, 17:09 IST

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने पुत्र संजय गांधी के असामयिक निधन के बाद उनकी पत्नी और छोटी बहू मेनका गांधी को राजनीति में लाना चाहती थीं. एक किताब में ये दावा किया गया है.

किताब के मुताबिक मेनका गांधी उस समय ऐसे लोगों के साथ थीं, जो राजीव गांधी के विरोधी माने जाते थे.

हालांकि दिवंगत इंदिरा गांधी, बड़ी बहू सोनिया गांधी को छोटी बहू मेनका की अपेक्षा ज्यादा मानती थीं, लेकिन संजय गांधी की मौत के बाद उनका झुकाव मेनका गांधी की तरफ हो गया था.

इंदिरा के निजी डॉक्टर की किताब


ये सारी बातें इंदिरा गांधी के निजी चिकित्सक डा. केपी माथुर की नई किताब 'द अनसीन इंदिरा गांधी' से सामने आई हैं. 

कोणार्क प्रकाशन की इस किताब में कहा गया है कि विमान हादसे में संजय गांधी की मौत के बाद इंदिरा का मेनका के प्रति झुकाव भी दोनों को एक-दूसरे के करीब नहीं ला पाया.

उस दौरान सोनिया गांधी आम तौर पर घरेलू मामलों का जिम्मा संभालती थीं, जबकि राजनीतिक मामलों में प्रधानमंत्री मेनका के विचारों पर ध्यान दिया करती थीं, क्योंकि मेनका गांधी की राजनीतिक समझ काफी अच्छी थी.

सफदरजंग अस्पताल के पूर्व चिकित्सक माथुर ने करीब 20 साल तक दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के डॉक्टर के  तौर पर काम किया और वह हर सुबह इंदिरा गांधी से मिलते थे.

यह सिलसिला साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या तक जारी रहा. डॉक्टर माथुर ने इंदिरा गांधी के साथ अपने उन्हीं अनुभवों को किताब की शक्ल दी है.

राजनीति में लाना चाहती थीं इंदिरा !


किताब के जरिए माथुर ने दावा किया है कि संजय गांधी के असामयिक निधन के कुछ ही साल बाद मेनका गांधी ने हालात से सामंजस्य स्थापित करने के बजाय प्रधानमंत्री आवास छोड़ना बेहतर समझा.

माथुर ने लिखा है कि संजय गांधी के निधन के बाद इंदिरा गांधी का उनकी पत्नी मेनका गांधी के प्रति रवैया बेहद नर्म हो गया था.

वह तो यह भी चाहती थीं कि मेनका गांधी राजनीति में आएं और उनकी मदद करें, लेकिन मेनका गांधी अक्सर ही ऐसे लोगों के साथ रहती थीं, जो राजीव गांधी के विरोधी माने जाते थे. 

इंदिरा की सलाह नहीं मानी !


इन्हीं सब वजहों से मेनका गांधी ने संजय विचार मंच नामक एक संगठन बनाया, जो संजय गांधी की विचारधारा को आगे ले जाए. ऐसा माना जाता था कि मेनका गांधी और उनके संजय विचार मंच के साथी राजीव गांधी के खिलाफ थे.

इसके साथ ही माथुर कहते हैं कि लेकिन मुझे यह कभी पता नहीं चल पाया कि वह क्या कर रहे हैं. डॉ माथुर ने किताब में संजय विचार मंच के उस सम्मेलन का जिक्र किया है जो लखनऊ में हुआ था.

उनके अनुसार इंदिरा गांधी तब विदेश दौरे पर थीं और वहां से उन्होंने मेनका गांधी को संदेश भेजा था कि वह इस सम्मेलन को संबोधित न करें. लेकिन मेनका गांधी ने अपनी सास और पीएम इंदिरा गांधी की बातों को अनसुना करते हुए सम्मेलन को संबोधित किया.

सोनिया ने संभाली जिम्मेदारी


किताब के मुताबिक राजीव गांधी और सोनिया गांधी के विवाह के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी के बीच तालमेल स्थापित होने में ज्यादा समय नहीं लगा.

सोनिया गांधी अपनी सास इंदिरा गांधी को बहुत सम्मान देती थीं और इंदिरा गांधी भी सोनिया गांधी को बहुत प्यार करती थीं. सोनिया गांधी ने जल्द ही सारे घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली.

इसके बाद इंदिरा गांधी, जिन्हें पढ़ने में गहरी दिलचस्पी थी. रविवार और छुट्टी के दिनों में किताबें पढ़ा करती थीं. उन्हें बायोग्राफी तथा लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाएं खास तौर पर पसंद दीं.

वह अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में आने वाले क्रॉसवर्ड पजल भी हल करती थीं. कई बार दोपहर के भोजन के बाद वह ताश भी खेला करती थीं. किताब के मुताबिक इंदिरा गांधी का पसंदीदा खेल ‘काली मैम’ था.

First published: 12 May 2016, 17:09 IST
 
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