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उरी का बदलाः सिंधु जल संधि पर ऐसे तथ्य जो सभी को मालूम होने चाहिए

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 27 September 2016, 4:06 IST

उरी का बदला लेने के लिए भारत क्या कर सकता है? क्या भारत को सिंधु जल संधि तोड़ देनी चाहिए या पाक के साथ सारे व्यापारिक संबंध खत्म कर दिए जाएं या फिर उस पर हमला किया जाए? हर विकल्प द्विपक्षीय है. चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि की समीक्षा करने के लिए हाई प्रोफाइल मीटिंग बुलाई थी. पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं इस ऐतिहासिक संधि से जुड़े कुछ तथ्य:

  • विश्व बैंक के साथ लंबी वार्ता के बाद 1960 में सिंधु जल संधि समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.
  • संधि के अनुसार भारत के पास व्यास, रावी और सतलुज नदियां हैं तो पाकिस्तान के पास सिंधु, चेनाब और झेलम.
  • सिंधु नदी भारत से हो कर बहती है और समझौते के तहत इसके 20 प्रतिशत पानी पर भारत का हक है. इसका इस्तेमाल भारत सिंचाई, परिवहन, बिजली निर्माण और बांध बनाने के लिए कर सकता है. हालांकि अगर भारत संधि समाप्त कर देता है तो भारत में पानी के अतिरिक्त भंडारण की समस्या हो जाएगी, जिससे बाढ़ आने का खतरा बना रहेगा. लेकिन पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी उसकी जीवन रेखा है. अगर संधि तोड़ दी गई तो यह उनके लिए कहर ही साबित होगा.
  • हालांकि सिंधु नदी चीन से बहना शुरू होती है लेकिन वह इस संधि का हिस्सा नहीं है. अगर भारत सिंधु नदी का प्रवाह रोकेगा तो उस स्थिति में बहुत संभव है कि चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा हो जाए और सिंधु का प्रवाह उसके उद्गम से ही बाधित कर दे. इससे भारत को भी नुकसान पहुंचेगा. हालांकि रोकने की स्थिति में चीन के सामने भी वही व्यावहारिक दिक्कतें पेश आएंगी जो भारत के सामने हैं. भारत के पूर्वोत्तर में बहने वाली नदी ब्रह्मपुत्र पर भी चीन का नियंत्रण है. यह नदी पूर्वोत्तर के ज्यादातर लोगों के लिए आजीविका का साधन है.
  • भारत-पाक के बीच 2 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापाारिक रिश्ता है. लेकिन भारत-पाक के बीच दुबई के रास्ते बहुत बड़ा अनौपचारिक व्यापार होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापार 4.7 अरब अमरिकी डॉलर के आस पास है.
  • इनमें से भारत का निर्यात 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जबकि यह पाक से 0.7 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात करता है. भारत से पाक को निर्यात की जाने वाली वस्तुएं हैं- रूई, पेट्रोलियम पदार्थ, टेलीफोन, कार, जैव केमिकल आदि. वहीं पाकिस्तान भारत को खजूर, आभूषण, चिकित्सा आपूर्ति और पेट्रोलियम तेल भेजता है.
  • कम परिवहन लागत और प्रतिस्पर्द्धा के चलते पाक, भारत को किए जाने वाले आयात (औपचारिक व अनौपचारिक) पर थोड़ा पैसा बचा पाता है. व्यापार खत्म करने से पाकिस्तान को दूसरे देशों से आयात का खर्च बढ़ेगा. इससे पाक जैसे कम फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व वाले देश की भुगतान सूची में बैलेंस नकारात्मक होने की आशंका रहेगी.
  • भारत को व्यापार खत्म करने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. साथ ही पाकिस्तान को भी कोई खास आर्थिक नुकसान होता दिखाई नहीं देता.
  • टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एसोचैम, भारत के वैश्विक महासचिव डीएस रावत ने हाल ही एक बयान में कहा था, ‘पाक के साथ भारत का व्यापार इसके वैश्विक वाणिज्य व्यापर का मात्र 0.41 प्रतिशत है’.
  • ज्यादा नुकसान दुबई, ईरान और अफगानिस्तान के रास्ते होने वाले अनौपचारिक व्यापार में होगा. यह व्यापार खत्म करने का मतलब इन तीनों के साथ साझेदारी करनी होगी.
First published: 27 September 2016, 4:06 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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