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मालेगांव ब्लास्ट: एटीएस के दो अफसरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 May 2016, 14:08 IST
(पीटीआई )

इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत ने महाराष्ट्र एटीएस के दो अफसरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. सितंबर 2008 के मालेगांव ब्लास्ट के मामले में सीबीआई ने गवाह दिलीप पाटीदार के रहस्यमय ढंग से गायब होने की रिपोर्ट दी थी. जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है.

रिपोर्ट में सीबीआई ने बताया था कि उसे मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन इंस्पेक्टर राजेंद्र घुले और तत्कालीन सब इंस्पेक्टर रमेश मोरे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 342 (बंधक बनाना), 365 (बंधक बनाने की नीयत से गुप्त तौर पर अपहरण), 193 (झूठे सबूत गढ़ना) और अन्य संबद्ध धाराओं के तहत दंडनीय अपराध में शामिल होने के सबूत मिले हैं.

सीबीआई ने दलील देते हुए कहा कि उच्च अधिकारी ने दोनों अफसरों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी है. इसलिए दोनों के खिलाफ मामले को खत्म कर दिया जाना चाहिए. अदालत ने इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि दोनों आरोपियों का कृत्य लोक सेवकों के कर्तव्यों के दायरे में नहीं आता हैं. इस लिहाज से उनके खिलाफ अभियोजन की दलील को स्वीकार करना जरूरी नहीं है.

विशेष सीबीआइ मजिस्ट्रेट राघवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि केस डायरी को देखने से स्पष्ट है कि घुले और मोरे के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत मामला चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. अदालत ने दोनों पुलिस अफसरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए सीबीआई को आदेश दिया कि वो उन्हें गिरफ्तार करके तीन जून को अदालत में पेश करे.

महाराष्ट्र एटीएस की टीम 10 और 11 नवंबर, 2008 की दरम्यानी रात पाटीदार को पूछताछ के लिए इंदौर से अपने साथ लाई थी. मालेगांव धमाकों का गवाह तबसे आज तक घर नहीं लौटा और उसका कोई अता-पता नहीं है.

इस मामले में पाटीदार के भाई रामस्वरूप ने गुमशुदगी को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सीबीआई जांच की अर्जी दायर की थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था. रामस्वरूप के वकील जेपी शर्मा ने कहा कि दिलीप पाटीदार का परिवार करीब आठ साल से उसकी गुमशुदगी की पीड़ा झेल रहा है. इस परिवार को यह तक पता नहीं है कि दिलीप पाटीदार अब दुनिया में हैं या नहीं.

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस के दोनों आरोपी अफसरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन्हें अदालत में पेश किया जाना चाहिए. खबरों के मुताबिक पाटीदार समझौता एक्सप्रेस विस्फोट समेत अलग-अलग बम धमाकों में वांछित रामचंद्र कलसांगरा उर्फ रामजी का इंदौर में किराएदार रहा था.

मालेगांव विस्फोट की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस को पाटीदार से पूछताछ में फरार कलसांगरा के बारे में सुराग मिलने की उम्मीद थी. वहीं दूसरी तरफ इस मामले में एटीएस ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर अपने जवाब में कहा था कि मालेगांव धमाकों के मामले में बयान दर्ज कराने के लिए पाटीदार अपनी मर्जी से मुंबई गया था. एटीएस के मुताबिक पाटीदार पूछताछ के बाद 18 नवंबर, 2008 को एटीएस के मुंबई कार्यालय से निकला था, लेकिन घर वापस नहीं लौटा.

First published: 28 May 2016, 14:08 IST
 
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