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आईएनएस बेतवा: पिछले एक दशक में बिना लड़े ही 30 नौसैनिक गंवा चुकी है नौसेना

सुहास मुंशी | Updated on: 8 December 2016, 7:38 IST
(प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया )
QUICK PILL
  • बार-बार हादसे का शिकार होते भारतीय नौसेना के जहाज़ अभी तक नौसेना के 30 नाविकों की ज़िंदगी लील चुके हैं. 
  • हर हादसे के बाद मामले में फ़ौरन कार्रवाई शुरू हो जाती है मगर इसके बावजूद इस तरह की दुर्घटनाएं नहीं थम रही हैं.  

सोमवार को मुंबई में बंदरगाह पर उतरते हुए भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस बेतवा डूब गया. इससे दो नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए. नौसेना के लिए इस तरह का हादसा पहली बार नहीं हुआ है. रोज़मर्रा के रख-रखाव के दौरान नौसेना के जहाज़ों और पनडुब्बियों के साथ ऐसे दर्जनों हादसे हुए हैं, जिनमें अभी तक 30 नाविकों की जान जा चुकी है. 

इनमें से 18 जानें तो एक ही हादसे में गई हैं, आईएनएस सिन्धुरक्षक दुर्घटना में. 2004 के बाद नौसेना के कुल मिलाकर एक पनडुब्बी और तीन जहाज लापता हैं. इसमें वे छिटपुट घटनाएं शामिल नहीं हैं, जब नौसेना के जहाज या तो किसी मछली पकड़ने वाले वाहन से टकरा गए या मरम्मत के दौरान उनमें आग लग गई हो.

अगर इन आंकड़ों पर गौर करें तो ज़ाहिर है नौसेना अपने जहाजों का रख-रखाव करने और अपने नाविकों का ध्यान रखने के मामले में नाकारा ही साबित हुई है. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, जब युद्ध नहीं होते, तब शांति के दौरान भी हर पांच साल में भारतीय नौसेना का एक जहाज़ तो किसी न किसी वजह से कम होता ही होता है और हर साल में दो से तीन नाविक.

कब-कब हुए हादसे

2010

आईएनएस मुंबई पर एक गैटलिंग गन चलने से चालक दल के तीन सदस्यों की मौत हो गई. जांच में पाया गया कि सुरक्षा के लिए ज़रूरी मानदंडों का ध्यान नहीं रखा गया, इसीलिए यह हादसा हुआ.

2011

आईएनएस विद्यागिरि मुंबई हार्बर में एक कारोबारी के टैंकर से टकरा गया, नुकसान इतना ज्यादा था कि इसे दुर्घटना के तुरंत बाद नौसेना से बाहर कर दिया गया.

2013

यह दुर्घटना नौसेना की शांति के दिनों में घटी सबसे बड़ी दुर्घटना थी. नौसेना की सबसे शक्तिशाली पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक में एक के बाद एक धमाका हुआ. इस हादसे में 15 नाविक और तीन अधिकारियों की मौत हो गई. हादसे से चार माह पहले ही इस पनडुब्बी को रूस में मरम्मत के लिए भेजा गया था.

इसके अलावा 2013 में ही एक और हादसा तब हुआ जब रूस निर्मित आईएनएस तलवार एक मछली पकड़ने वाले जहाज से टकरा गया. आईएनएस तलवार भारत ने 1500 करोड़ रूपए में खरीदा था. हादसे के वक्त इस पर 27 मछुआरे सवार थे. इनमें से चार बुरी तरह घायल हो गए थे.

2014

ठीक दो हफ्ते बाद वही जहाज़ आईएनएस बेतवा फिर हादसे का शिकार हो गया. इस बार मुंबई के नौसेना बेस पर इसने छोटे जहाज के उपकरणों को काफी नुकसान पहुंचाया. आईएनएस तलवार और बेतवा दोनों के कैप्टन को दोषी मानते हुए सेवानिवृत्त कर दिया गया.

इसी साल आईएनएस सिंधुरत्न पनडुब्बी में आग लग गई और दो नाविकों की मौत हो गई. उस वक्त एक बड़ी व्यवस्था के बाद निरीक्षण चल रहा था. तत्कालीन नौसेना प्रमुख डीके जोशी ने हादसों और नौसेना को हुए नुकसान की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

2014 में ही हुए एक हादसे में आईएएस कोलकाता में मुख्य इंजीनियर के पद पर तैनात कमांडर कुंतल वाधवा की तकनीकी खराबी की वजह से हुई गैस लीक के चलते मौत हो गई थी. 

इसी साल एक और हादसे में एक नाविक की मौत हो गई, जब दक्षिण में विशाखापट्टनम की ओर चलते हुए एक टॉर्पीडो रिकवरी व्हीकल (टीआरवी) डूब गया.

2016

आईएनएस विराट के एक बॉयलर रूम में आग लगने और भाप लीक होने पर उसे ठीक करने की कोशिश में एक नाविक घायल हो गया और बाद में जिंदगी से लड़ते हुए उसकी मौत हो गई.

आईएनएस निरीक्षक पर एक ऑक्सीजन सिलैंडर फटने से तीन नाविक घायल हुए. इनमें से एक की टांग टूट गई. इसी साल जून में विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कम्पार्टमेंट मरम्मत के दौरान जहरीली गैस लीक होने से एक नाविक और सिविल ठेकेदार सहित दो लोगों की मौत हो गई.

दिसम्बर में 3800 टन वजनी आईएनएस बेतवा उस वक्त पलट गया जब मुंबई में नौसेना के डॉकयार्ड से उतारा जा रहा था. हादसे में दो नाविकों की मौत हो गई. इसे नौसेना की पश्चिमी कमान का सबसे काबिल लड़ाकू जहाज माना जाता था, जो रूसी और इजराइली हथियारों से लैस था.

First published: 8 December 2016, 7:38 IST
 
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