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चाय बेचते हुए बने सीए, अब महाराष्ट्र में शिक्षा के ब्रांड एंबेसडर

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 June 2016, 17:15 IST

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलो से उड़ान होती है. यह कहावत सोमनाथ गिरम पर सटीक बैठती है.

महाराष्ट्र के सदाशिव पेठ में चाय दुकान चलाने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट गिरम को इस साल महाराष्ट्र सरकार की 'कमाओ और शिक्षा ग्रहण करो' (अर्न एंड लर्न) योजना का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया.

28 वर्षीय गिरम सोलापुर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने इसी साल सीए की परीक्षा पास की है. उनकी उपलब्धि पर राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा, "इन दिनों चाय वालों के लिए अच्छे दिन चल रहे हैं. चाय बेचने वाले प्रधानमंत्री बने और अब चाय बेचते हुए सोमनाथ सीए बन गए."

सोमनाथ सोलापुर जिले के करमाला तालुका के रहने वाले हैं. उनके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. पुणे में रहने और पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए गिरम ने टी-स्टॉल पर काम करना शुरू किया.

बाद में सोमनाथ ने सदाशिव पेठ इलाके के पेरुगेट चौराहे पर 2013 में चाय की दुकान खोल ली. वह दिन में चाय बेचने के बाद रात में पढ़ाई करने लगे. गिरम कहते हैं कि जब चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो मैं सीए क्यों नहीं बन सकता.

दो साल तक गिरम ने चाय बेची. शुरू में उनके पास स्टॉल नहीं था, क्योंकि इसके लिए पैसे नहीं थे. बाद में उन्होंने  अपना टी स्टॉल लगाया. गिरम बताते हैं कि पूरा दिन चाय बेचने के बाद वे छह-सात घंटे पढ़ाई करते थे. जब मनमाफिक नतीजा नहीं आया, तो उन्होंने सीए की तैयारी छोड़ने की सोच ली. वह प्रोफेसर बनने के लिए एसईटी परीक्षा की तैयारी करने लगे.

गिरम ने बताया कि पहले प्रयास में उन्होंने तीन में से दो पेपर क्लीयर किए. वह बताते हैं, 'अगले प्रयास में मैं यह परीक्षा पास कर जाता. लेकिन जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता था, ताकि अपने परिवार को गरीबी से निकाल सकूं.'

सोमनाथ के पिता करमाला में एक छोटे किसान हैं. उनके बड़े भाई भी खेती में पिता की मदद करते हैं. उनकी मां आर्थराइटिस की मरीज हैं और घर पर ही रहती हैं.

गिरम बारहवीं पास करने बाद ही पुणे आ गए थे. 2009 में उन्होंने ग्रेजुएशन और 2012 में एम.कॉम किया. उन्हें सीए की कामयाबी पांचवें प्रयास में मिली. अब वह पुणे में अपनी फर्म खोलना चाहते हैं. लेकिन उनका कहना है वह चाय बेचना तब तक जारी रखेंगे जब तक बेच सकेंगे, क्योंकि इससे उन्हें क्लायंट बढ़ाने में मदद मिलेगी.

First published: 11 June 2016, 17:15 IST
 
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