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राज्यसभा में आज पेश नहीं होगा इंस्टैंट ट्रिपल तलाक बिल, कांग्रेस में मंथन जारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2018, 11:46 IST

मोदी सरकार एक बार में तीन तलाक बिल बुधवार को राज्यसभा में पेश करेगी. पहले खबरें थीं कि तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाले बिल को मंगलवार को पेश किया जाएगा. संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं से कहा "तीन तलाक बिल पर सरकार कांग्रेस और अन्य दलों से बातचीत कर रही है. हमें उम्मीद है कि ये राज्यसभा में आसानी से पास हो जाएगा.

बुधवार को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इसे राज्यसभा में पेश करेंगे. लोकसभा में इस बिल को पिछले गुरुवार को इस बिल को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित करा लिया था. लोकसभा में इस बिल पर कांग्रेस ने भाजपा का समर्थन किया था. लेकिन इसके साथ ही उसने इसमें सुधार के लिए इसे सलेक्ट कमेटी के पास भेजने का सुझाव दिया था. हालांकि इस सुझाव को सरकार ने खारिज कर दिया था.

संसद का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी को खत्म हो रहा है. ऐसे में सरकार को इसी हफ्ते इसे पास कराना होगा ताकि ये बिल कानून बनने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जा सके. भाजपा के लिए राज्यसभा में इसे पास कराना आसान नहीं होगा, एनडीए का राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नहीं है. ऐसे में उसे वहां विपक्षी पार्टियों के सहयोग की ज़रूरत होगी. भाजपा इस समय राज्यसभा में कांग्रेस के साथ सबसे बड़ी पार्टी है.

भाजपा ने अपने सभी सांसदों को राज्यसभा में पेश करने के लिए व्हिप जारी किया है. वहीं कांग्रेस राज्यसभा मेंं इस बिल पर स्टैंड लेने के लिए अपनी सहयोगी पार्टियों से बातचीत कर रही है. वहीं, लेफ्ट भी चाहता है कि इस बिल को राज्यसभा में भेजने से पहले सलेक्ट कमेटी में भेजा जाए. यही कारण है कि सीपीआई नेता डी राजा ने मंगलवार को इसे सलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग दोहराई.

राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं. इसमें से सात सीटें अभी खाली हैं. 238 सदस्यीय राज्यसभा में कांग्रेस 57 और भाजपा के पास 57 सीटें हैं. इनके अलावा समाजवादी पार्टी के पास18, अन्नाद्रमुक के पास 13, तृणमूल कांग्रेस के पास 12, बीजेडी के पास 8, लेफ्ट के पास 8, टीडीपी के पास 6, एनसीपी के पास 5, द्रमुक के पास 4, बसपा के पास 4 और राजद के कुल 3 सदस्य हैं. वहीं, भाजपा के पास सहयोगी एनडीए दलों के 20 सांसद हैं. 

विपक्षी पार्टियों की आपत्ति को देखते हुए सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल सकती है. सरकार राज्यसभा में इस बिल पर कई संसोधन कर सकती है. लोकसभा में सभी संसोधन प्रस्ताव खारिज हो गए थे. विपक्ष को इसकी सजा की अवधि से लेकर पीड़िता को मिलने वाले गुजारे-भत्ते पर आपत्ति है.

 तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

First published: 2 January 2018, 11:46 IST
 
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