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तीन तलाक लेने पर होगी 3 साल की सज़ा, नहीं मिलेगी ज़मानत

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 December 2017, 11:51 IST

मोदी सरकार ने तीन तलाक पर मसौदा तैयार कर लिया है. मोदी सरकार इसे संसद के शीतकालीन सत्र में रखने की तैयारी में हैं. सूत्रों ने बताया कि इस ड्राफ्ट के मुताबिक, तीन तलाक लेने पर तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस ड्राफ्ट में हैं.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इस मसौदे को 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक' नााम दिया गया है. इस मसौदे को सभी राज्य सरकारों के पास उनकी राय जानने के लिए भेज दिया गया है. राज्य सरकारों से इस पर अपना जवाब जल्द से जल्द भेजने को कहा गया है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोर्ट के फैसले के बावजूद तीन तलाक के कई मामले सामने आ रहे हैं. इस तरह से तलाक देने पर दंडित किए जाने का प्रावधान नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है. 

मसौदे के अनुसार ये कानून 'तलाक ए बिद्दत' यानि एक बार में तीन तलाक बोलने पर लागू होगा. ये कानून पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा.

इस मसौदे में साफ किया गया है कि इस कानून के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

हम आपको बता दें कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक एक मंत्री समूह का गठन पीएम मोदी ने किया था. इसमें राजनाथ के अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे.

इस अधिकारी ने आगे बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार इसे लाएगी. गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र इस बार 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक चलेगा. 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार मे तीन तलाक देने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "तीन तलाक मुस्लिमों में शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है." प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था, "ऐसे भी संगठन हैं, जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है.

पांच जजों की संविधान पीठ में संविधान पीठ में जस्‍ट‍िस कुरियन जोसफ, जस्‍ट‍िस आरएफ नरीमन, जस्‍ट‍िस यूयू ललित और जस्‍ट‍िस अब्दुल नजीर भी शामिल थे. जबकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे. 

हम आपको बता दें कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा था, "अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी.

First published: 2 December 2017, 11:51 IST
 
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