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फैक्ट फाइंडिग रिपोर्ट: हैदराबाद यूनिवर्सिटी हिंसा में शिक्षा मंत्रालय की भूमिका

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 March 2016, 9:38 IST
QUICK PILL
  • 22 मार्च को हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए \'हिंसक विरोध प्रदर्शन\' की जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट कैच के पास है.
  • फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट बताती है कि अप्पा राव की कैंपस में वापसी पूर्व नियोजित थी और उनकी वापसी की योजना उनके सहयोगियों ने तैयार की थी. रिपोर्ट के मुताबिक राव की वापसी की वजह से कैंपस में हिंसा हुई.

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में स्थिति नियंत्रण के बाहर होती जा रही है. दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को लेकर छात्रों में जबरदस्त आक्रोश है और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ उनका आंदोलन दिनों दिन मजबूत होता जा रहा है. 

वाइस चांसलर अप्पा राव के छुट्टी से लौटकर दोबारा अपनी जिम्मेदारी संभालने के फैसले के खिलाफ छात्रों में जबरदस्त गुस्सा है. अप्पा राव का विरोध कर रहे छात्रों पर जिस तरह से पुलिस ने लाठी बरसाई, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में कैंपस में सामान्य स्थिति की बहाली की उम्मीद कम ही दिखाई पड़ती है.

छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है वहीं सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन भी छात्रों की बात सुनने को तैयार नहीं दिख रहे. 22 मार्च को हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए 'हिंसक विरोध प्रदर्शन' की जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की अंतिम रिपोर्ट कैच के पास मौजूद है.

वाइस चांसलर अप्पा राव के छुट्टी से लौटकर दोबारा अपनी जिम्मेदारी संभालने के फैसले के खिलाफ छात्रों में जबरदस्त गुस्सा है

कमेटी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन की स्थिति की पड़ताल करने के साथ ही कैंपस में शांति बहाली की दिशा में सुझाव भी रखे हैं.

इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी में हेनरी टिफेन, तारा राव, बर्नार्ड फातिमा, कुफिर नलगुंडवार, किरुबा मुनस्वामी, बीना पल्लीकल, रमेश नाथन, आसा कोटवाल और पॉल दिवाकर शामिल थे.

पूर्व नियोजित थी अप्पा राव की वापसी

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट बताती है कि अप्पा राव की कैंपस में वापसी पूर्व नियोजित थी और उनकी वापसी की योजना उनके सहयोगियों ने तैयार की थी. रिपोर्ट के मुताबिक राव की वापसी की वजह से कैंपस में हिंसा हुई.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में वाइस चांसलर अप्पा राव के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट 1989 के तहत मामला दर्ज था लेकिन अभी तक इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है.

शिक्षा मंत्रालय पर सवाल

रिपोर्ट ने पूरे मामले में शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट बताती है कि राव की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता का ख्याल नहीं रखा गया. 

रिपोर्ट बताती है कि अंतरिम वाइस चांसलर प्रोफेसर पेरिसामी के नेतृत्व में कैंपस में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था. अप्पा राव के कैंपस में नहीं होने के दौरान भी छात्र संगठनों, संकायों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी मांगों को लेकर कैंपस में विरोध प्रदर्शन जारी रखा था. हालांकि अप्पा राव की वापसी के साथ ही कैंपस का माहौल बिगड़ गया.

गृह मंत्रालय के मुताबिक अप्पा राव ने गृह मंत्री से कैंपस में लौटने की अपील की थी जिसका पुलिस ने विरोध किया था. यहां तक कि गृह मंत्री ने राव की इस मांग का विरोध किया था क्योंकि उन्हें कैंपस में शांति भंग होने का खतरा था. मंत्रालय के सुझाव के बाद भी राव ने कैंपस लौटने का फैसला किया.

कमेटी ने पाया कि गैर जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने अभी तक केंद्रीय मंत्री बंडारु दत्तात्रेय और एबीवीपी के नेता सुशील कुमार को गिरफ्तार नहीं किया है. साथ ही विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जिन छात्रों को गिरफ्तार किया उन्हें कानून के मुताबिक 24 घंटों के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया.

पुलिस पर अभद्रता के आरोप की पुष्टि

पुलिस ने महिला छात्रों के साथ बदतमीजी की और उन्हें गालियां भी दी. इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को भी निशाना बनाया गया. पुलिस गिरफ्तार किए गए छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को जमानत दे सकती थी लेकिन उसने ऐसा करने की बजाए छात्रों को न्यायिक हिरासत में रखना उचित समझा.

जिन्हें गिरफ्तार किया गया उन्हें कानूनी तौर पर 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया. इसके अलावा पुलिस ने अल्पसंख्यक छात्रों को आतंकवादी शब्द से संबोधित किया.

First published: 27 March 2016, 9:38 IST
 
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